बाल दिवस विशेष : 11 साल के मासूम पर है मां, बहन और नानी की जिम्मेदारी

ETV Bihar/Jharkhand
Updated: November 14, 2017, 5:58 PM IST
बाल दिवस विशेष : 11 साल के मासूम पर है मां, बहन और नानी की जिम्मेदारी
ईटीवी फोटो
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Updated: November 14, 2017, 5:58 PM IST
कहते है कि बचपन कभी लौट कर नहीं आता है. बाल दिवस भी इसलिए मनाया जाता है ताकी बच्चों को उसका हक मिल सके. लेकिन अररिया के 11 साल के नीतीश ने अपने बचपन को परिवार की जिम्मेदारियों के लिए न्यौछावर कर दिया है.

अररिया शहर के गोढ़ी टोला निवासी 11 वर्षीय नीतीश के पैदा होते ही उसके पिता छोड़ गये. अब नीतीश पर अपनी मां एक छोटी बहन और नानी की जिम्मेदारी है. नीतीश रोज सुबह और शाम अररिया बस स्टैंड में मछली की दूकान में काम करता है. रोजाना 100 रुपये मिलते है जिससे वह बीमार बहन और परिवार का भरण पोषण करता है.

अपने परिवार के साथ नीतीश (ईटीवी फोटो)


नीतीश के पिता गजेन्द्र बहरदार घर छोड़ लुधियाना में बस गया और अब तक 4 शादियां कर चुका है. नीतीश की मां नीरो देवी अब अपने पति का नाम भी नहीं लेना चाहती है. वह गुस्से में बताती है कि जिसे मेरी और मेरे बच्चे की परवाह भी नहीं उसकी तश्वीर और उसकी यादों को भी हम अपने पास भटकने देना नहीं चाहती है.

नीरो देवी दूसरे के घरों में अब बर्तन मांजती है. नीतीश के मासूम मन को कुछ भी याद नहीं बस वह दिन रात काम करता रहता है. उससे जब हमने इस बावत सवाल पूछा तो तो वह कैमरे पर कुछ भी बोलने से पहले डर गया. वह डर इसलिए गया कि जिसकी दूकान पर वह काम करता है यदि उसने बुरा मान लिया तो उसे यह नौकरी भी गंवानी पड़ सकती है.

नीतीश पिछले वर्ष तक पढ़ाई करता था लेकिन जिम्मेदारियों के बोझ ने उसके पीठ से बस्ते का बोझ छीन लिया है. ऐसे में दोष किसे दिया जाए, उसके पिता को या फिर उस समाज को जिसने कभी उसे सहारा नहीं दिया .
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