Bihar Election 2020: औरंगाबाद में BJP करना चाहती है Comeback, क्या बरकरार रहेगा कांग्रेस का कब्जा?

औरंगाबाद सीट पर कड़ा मुकाबला हो सकता है.
औरंगाबाद सीट पर कड़ा मुकाबला हो सकता है.

Bihar Assembly Election 2020: 10 सालों तक औरंगाबाद की बागडोर बीजेपी (BJP) के रामाधार सिंह ने संभाल रखी थी. 2015 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस (Congress) के हाथ आई.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 8:42 PM IST
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औरंगाबाद. विधानसभा चुनाव की तारीखों की ऐलान भले ही नहीं हुई है लेकिन पूरा बिहार चुनावी (Bihar Election) मोड में आ गया है. वैसे भी चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कभी भी कर सकता है. ऐसे में औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र (Aurangabad Assembly Seat) की चर्चा न हो, यह बात थोड़ी अटपटी लगती है क्योंकि बीजेपी के वर्चस्व वाले इस सीट पर क्या बीजेपी (BJP) एक बार फिर काबिज़ हो पाएगी ,लोग यह जानना चाहते हैं. इसकी चर्चा आम अवाम में अब होने भी लगी है. खासकर राजनैतिक विश्लेषकों की नजरें इस चुनाव में औरंगाबाद सीट पर टिकी हैं जो यह जानना चाहती है कि औरंगाबाद का मिज़ाज़ इस बार क्या है? परिसीमन के बाद विधानसभा के भौगोलिक स्वरूप में थोड़ा बदलाव तो जरूर आया, मगर विधानसभा क्षेत्र का नाम औरंगाबाद का औरंगाबाद ही रह गया.

साल 2000 के विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो उस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के सुरेश मेहता ने अप्रत्याशित तौर पर अपनी जीत दर्ज कराई थी. बीजेपी के रामाधार सिंह को उस वक्त हार का मुंह देखना पड़ा था. वहीं 2015 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हाथ में आ गई और आज इस क्षेत्र से कांग्रेस के आनंद शंकर विधायक हैं. इस बीच 10 सालों तक यहां की बागडोर बीजेपी के रामाधार सिंह ने संभाल रखा था. लेकिन कहते हैं कि जनता कभी-कभी बदलाव भी चाहती है. यही वजह होती है जब आम अवाम यानी कि मतदाता प्रायोगिक तौर पर अपनी कमान किसी नए के हाथों सौंप कर उसकी निगहबानी करती है कि वह उनके लिए क्या कर रहा है. अच्छा किया तो ठीक नहीं तो किसी नए को चुनती है या फिर पुराने में से ही किसी एक को फिर से मौका देती हैं.

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मानी जाती है बीजेपी की दबदबा वाली सीट
कुछ ऐसा ही औरंगाबाद सीट के साथ भी होता रहा है. आम तौर पर बीजेपी का दबदबा माने जाने वाली इस सीट के लिए पार्टी को भी एड़ियां घिसनी पड़ी है. 2015 के चुनाव में कांग्रेस के आनंद शंकर की जीत को एक बदलाव के रूप में ही देखा जा सकता है, लेकिन परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं. पिछले चुनाव में स्थिति कुछ और थी. जदयू एक बार फिर एनडीए के साथ है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस क्या इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी? यह एक यक्ष प्रश्न है. 3 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में एनडीए तथा महागठबंधन के प्रत्याशियों के अलावा निर्दलियों की भूमिका भी अहम साबित हो सकती है. ऐसे कई दावेदार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के टिकट बंटवारे का इंतज़ार कर रहे हैं. वैसे 2015 के चुनाव में भाकपा ने भी यहां से अपना उम्मीदवार दिया था. मगर अब तक की स्थिति के अनुसार इस बार भाकपा महागठबंधन का हिस्सा रहेगी. पिछले चुनाव में कांग्रेस के आनंद शंकर ने को कुल 63,637 मत लाकर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी के रामाधार सिंह को 45,239 मत मिले थे. भाकपा प्रत्याशी सिनेश राही चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव भी नहीं डाल पाए थे.
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