मिट रहा है सोन नदी पर शेरशाह सूरी के ऐतिहासिक मध्यकालीन पुल का वजूद, जानें पूरा मामला

सोन नदी पर मध्यकालीन पत्थरों से बने पुल के अस्तित्व पर संकट, शेरशाह सूरी ने कराया था निर्माण

सोन नदी पर मध्यकालीन पत्थरों से बने पुल के अस्तित्व पर संकट, शेरशाह सूरी ने कराया था निर्माण

रोहतास और औरंगाबाद के बीच सोन नदी पर मध्यकालीन पत्थरों से बने पुल का अस्तित्व खतरे में है. पुरातत्व विभाग के उदासीनता और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से इस ऐतिहासिक पत्थर के पुल का धीरे -धीरे अस्तित्व मिटता जा रहा है. इसे मध्यकाल में शेरशाह सूरी ने बनवाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 11:49 PM IST
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अजीत कुमार

सासाराम. रोहतास और औरंगाबाद के बीच सोन नदी ( Son River ) पर मध्यकालीन पत्थरों से बने पुल (Bridge) का अस्तित्व खतरे में है. पुरातत्व विभाग (Archeology department) की उदासीनता और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से इस ऐतिहासिक पत्थर के पुल का धीर -धीरे अस्तित्व मिटता जा रहा है. इसे मध्यकाल में शेरशाह सूरी ने बनवाया था. यह जीटी रोड का हिस्सा रहा है. यह पुलिस प्राचीन कारीगरी का शानदार नमूना है. लोगों ने इसको हो नुकसान पर चिंता जाहिर की है.

जानकारी के अनुसार करीब 500 साल पूर्व ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड के तहत रोहतास जिला के डेहरी और औरंगाबाद के बीच सोन नदी के बीचों-बीच पत्थर के स्लीपर से पुल बनाया गया था. लेकिन अब इस पुल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. ये पुरानी ग्रैंड ट्रंक रोड का हिस्सा है. सोन नदी पर साढ़े तीन किलोमीटर से लंबी इस पत्थर के पुल की चौड़ाई 17 फीट है. इसे इतनी मजबूती से बनाया गया कि अभी भी इसके पत्थर यथावत हैं. इसके स्टोन स्लीपर की लंबाई 9 फिट तक है.

जानकार कहते हैं कि जब मध्यकाल में बड़ी-बड़ी नदियों पर पुल बनना मुश्किल था. ऐसी परिस्थिति में इसी तरह के सड़क पुल बना करते थे. जब नदी में पानी कम होता था, तो इसी रास्ते से होकर लोग आवागमन करते थे. लेकिन बालू खनन किए जाने से धीरे-धीरे यह पुल क्षतिग्रस्त हो रहा है.
स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

स्थानीय लोगों ने पुलिस के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी प्रशासन को दी है. डिहरी के पूर्व विधायक सत्यनारायण यादव का कहना है कि सोन नदी के किनारे बालू खनन के कारण इस ऐतिहासिक पत्थर के पुल को काफी क्षति पहुंची है. पुरातात्विक महत्व से यह पत्थर पुल एक धरोहर है और इसके संरक्षण की आवश्यकता है. शेरशाह सूरी के जमाने में भारतीय अभियंत्रण का एक बेजोड़ नमूना है. चुकी बरसात के दिनों में जैसे-जैसे सोन नदी का जलस्तर ऊपर बढ़ता है. ये पुल पानी के अंदर चला जाता है. लेकिन जब पानी का स्तर नीचे जाता है, तो यह पत्थर का ऐतिहासिक ब्रिज साफ नजर आने लगता है. जिस तरह से हम अपने प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के प्रति लापरवाह है. जिससे आने वाली पीढय़िां हमसे सवाल कर सकती हैं कि हमने उन प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित क्यों नहीं रखा?

क्या कहते हैं अधिकारी-



डेहरी के एसडीओ सुनील कुमार कहते हैं, कि बालू खनन करने वालों पर नकेल कसी जा रही है. इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित करने की कवायद शुरू कर दी गई है.
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