बिहार में जज से दुर्व्यवहारः पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस सब इंस्पेक्टर संबंधित न्यायिक अधिकारी के प्रति नाराजगी रखता है. (फाइल फोटो)
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस सब इंस्पेक्टर संबंधित न्यायिक अधिकारी के प्रति नाराजगी रखता है. (फाइल फोटो)

याचिका में दावा किया गया है कि बिहार न्यायिक सेवा एसोसिएशन (Bihar Judicial Service Association) ने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था.

  • Share this:
नई दिल्ली. बिहार के औरंगाबाद (Aurangabad) में पिछले महीने एक जिला न्यायाधीश (District Judge) के साथ कथित दुर्व्यवहार (Misbehavior) करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिये उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर (Petition Filed) की गयी है. इस याचिका में पुलिस महानिदेशक और औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कथित निष्क्रियता के लिये कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया गया है.

यचिका में इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिये सभी राज्य सरकारों को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है. यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर की है. याचिका के अनुसार बिहार के औरंगाबाद में जिला न्यायाधीश को एक पुलिस सब इंस्पेक्टर और दूसरे पुलिसकर्मियों ने पिछले महीने एक शाम को उस समय कथित गालियां दीं, धमकी दी और उनका पीछा किया जब वह शाम को टहल रहे थे.

अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था
याचिका में दावा किया गया है कि बिहार न्यायिक सेवा एसोसिएशन ने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था, लेकिन इस घटना के सिलसिले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.  याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस सब इंस्पेक्टर संबंधित न्यायिक अधिकारी के प्रति नाराजगी रखता है, क्योंकि उन्होंने कुछ महीने पहले ही ड्यूटी में लापरवाही के लिये उसके तथा कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी.
जनता सुरक्षा के बारे में क्या अपेक्षा करेगी


याचिका में कहा गया है, ‘‘ पुलिस द्वारा न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेट पर हमला न सिर्फ न्यायपालिका की गरिमा कम करता है बल्कि जनता के दिमाग में भी यह धारणा बैठती है कि पुलिस ज्यादतियों से न्यायिक अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं तो जनता सुरक्षा के बारे में क्या अपेक्षा करेगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज