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लोकसभा चुनाव 2019: NDA के सामने है बिहार के 'चितौड़गढ़' में जीत का हैट्रिक लगाने की चुनौती

News18 Bihar
Updated: January 22, 2019, 4:30 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: NDA के सामने है बिहार के 'चितौड़गढ़' में जीत का हैट्रिक लगाने की चुनौती
औरंगाबाद शहर का एक हिस्सा

औरंगाबाद जिला योजना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सांसद सुशील कुमार सिंह ने अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास से लिए 533 योजनाओं की अनुशंसा की जिसमें औरंगाबाद जिले के लिए 335 और गया जिले के 3 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 198 योजनाएं हैं.

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बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र का इतिहास काफी पुराना है. यह प्राचीन मगध जनपद का महत्वपूर्ण हिस्सा था. यहां अलग-अलग धर्मों के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं. इतिहासकारों का भी मानना है कि इस इलाके के लोग प्रगतिशील सोच के रहे हैं लेकिन बदलते दौर में इस क्षेत्र में लड़ाई विकास बनाम विकास ही है यानि इस सीट पर चुनाव ल़ड़ने वाला हर नेता विकास की ही दुहाई देता है. इस विधानसभा में छह क्षेत्र हैं जहां लड़ाई टक्कर की होती है.

सर्वधर्म संपन्न लेकिन राजपूतों का वर्चस्व

औरंगाबाद में हिन्दू, मुस्लिम सिख, इसाई सभी धर्मों का धर्मिक स्थल हैं. हसपुरा में हमजरशरीफ का मकबरा है, नवीनगर में गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज से जुड़ी यादें हैं. देव में प्राचीन सूर्य मंदिर है जिसकी महिमा पूरे भारत में फैली हुई है. कार्तिक और चैत्र महीने में हजारो लोग छठ करने यहां आते हैं...यही नहीं यहां धर्म के साथ साहित्य की भी समृद्ध परंपरा रही है. औरंगाबाद को बिहार का चितौड़गढ़ भी कहा जाता है क्योंकि इस इलाके में राजपूत जाति के लोगों की काफी आबादी है. 1952 के पहले आम चुनाव से लेकर अब तक जितने चुनाव हुए हैं उसमें राजपूत जाति के उम्मीदवार जीते हैं.

खेतिहर बाहुल्य क्षेत्र

औरंगाबाद इलाके में पहाड़ है. जंगल है और खेतिहर जमीन है. यहां के मेहनतकश लोगों का पेशा खेती है. इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है. धान, गेहूं और दलहन की फसल के साथ यहां गन्ना का उत्पादन होता है लेकिन हाल के दिनों में गन्ना किसानों की उपेक्षा का असर औरंगाबाद के किसानों पर भी दिखता है. किसानों की शिकायत है कि गन्ना का खरीदार नहीं है. वो स्थानीय कारोबारियों पर निर्भर हैं....

वोटरों की समस्या

औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र की बड़ी आबादी पानी की किल्लत के बीच अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर है. पहाड़ी इलाके में पीने के पानी की घोर किल्लत है. स्थानीय लोगों की शिकायत है कि केन्द्र हो या राज्य किसी सरकार की योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है. औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित है. नक्सलियों के कारण इलाके का विकास प्रभावित हुआ है. हालांकि हाल के दिनों में इलाके में नक्सली वारदात में कमी आई है लेकिन कुछ लोगों की शिकायत है कि यहां के सांसद स्थानीय मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं रहते. लोगों से मिलते-जुलते नहीं.
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10 साल से सांसद हैं सुशील कुमार सिंह

सासंद सुशील कुमार सिंह 2009 से औरंगाबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 2009 में सुशील कुमार सिंह JDU से जीते थे फिर 2014 में BJP में आ गए और मोदी लहर में जीते. किसी क्षेत्र के विकास के लिए 10 साल का समय कम नहीं है. इस लोकसभा चुनाव में क्षेत्र का विकास बड़ा मुद्दा रहने वाला है. हर जाति हर धर्म और हर उम्र के लोगों का यही कहना है जो विकास करेगा वही उनका सांसद होगा मतलब साफ है इस बार औरंगाबाद में विकास मुख्य चुनावी मुद्दा है.

विकास के दावे

लोगों की बातों से साफ है कि इस साल लोकसभा चुनाव में यहां किसी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा, हालांकि मौजूदा सांसद सुशील कुमार सिंह का दावा है कि उन्होंने सांसद रहते हुए क्षेत्र के विकास पर पूरा ध्यान दिया. इलाके के लोगों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की रही है. सांसद का कहना है कि 45 साल से लंबित उत्तर कोयल परियोजना का शिलान्यास उनके प्रयास से हुआ. झारखंड के पलामू में कोयल नदी पर मंडल डैम बनेगा जिससे औरंगाबाद, गया के किसानों की सिंचाई की समस्या दूर हो जाएगी.

सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के साथ-साथ सांसद का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सभी असंभव काम को संभव करने की कोशिश की. देश के नक्सल प्रभावित जिलों में औरंगाबाद जिला विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में सबसे आगे रहा. सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण औरंगाबाद जिले में हुआ. हल्दिया गैस पाइप लाइन को औरंगाबाद लाने की कोशिश की. सांसद सुशील सिंह का यह भी कहना है कि सांसद निधि से मिली राशि का क्षेत्र के विकास के लिए खर्च किया.

विकास की हकीकत

औरंगाबाद जिला योजना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सांसद सुशील कुमार सिंह ने अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास से लिए 533 योजनाओं की अनुशंसा की जिसमें औरंगाबाद जिले के लिए 335 और गया जिले के 3 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 198 योजनाएं हैं. इन योजनाओं को पूरा करने के लिए 22 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि जारी हुई. 293 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और अभी 234 योजनाओं पर काम चल रहा है. सुशील कुमार सिंह ने टिकारी के केसपा गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था इस गांव में आवास योजना के अलावा ज्यादा योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पायी हैं. यही कारण है कुछ लोग सांसद के विकास के दावे को ख़ारिज कर रहे हैं.

रिपोर्ट- अरूण चौरसिया

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First published: January 22, 2019, 4:30 PM IST
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