डेढ़ लाख वर्ष पुराना है बिहार का यह सूर्य मंदिर

बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर कई मामलों में अनोखा है.

आईएएनएस
Updated: October 22, 2017, 7:03 PM IST
डेढ़ लाख वर्ष पुराना है बिहार का यह सूर्य मंदिर
बिहार के औरंगाबाद स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर (आईएएनएस)
आईएएनएस
Updated: October 22, 2017, 7:03 PM IST
बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर कई मामलों में अनोखा है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में की थी. साथ ही, यह देश का अकेला ऐसा सूर्य मंदिर है, जिसका दरवाजा पश्चिम की ओर है.

हर साल छठ के मौके पर यहां लाखों श्रद्धालु छठ करने झारखंड, मध्य प्रदेश, उतरप्रदेश समेत कई राज्यों से आते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त मन से इस मंदिर में भगवान सूर्य की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.


कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण डेढ़ लाख वर्ष पूर्व किया गया था. त्रेता युगीन पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर अपनी विशिष्ट कलात्मक भव्यता के साथ-साथ अपने इतिहास के लिए भी विख्यात है. यह मंदिर औरंगाबाद से 18 किलोमीटर दूर देव में स्थित है.

यह सूर्य मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. करीब सौ फीट ऊंचा यह सूर्य मंदिर काले और भूरे पत्थरों की नायाब शिल्पकारी से बना है. यह सूर्य मंदिर पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से मिलता-जुलता है. देव मंदिर में सात रथों से सूर्य की मूर्तियां अपने तीनों रूपों उदयाचल (सुबह) सूर्य, मध्याचल (दोपहर) सूर्य और अस्ताचल (अस्त) सूर्य के रूप में मौजूद है.

कहा जाता है कि एक राजा ऐल एक बार देव इलाके के जंगल में शिकार खेलने गए थे. शिकार खेलने के समय उन्हें प्यास लगी, तो उन्होंने अपने आदेशपाल को लोटा भर पानी लाने को कहा. आदेशपाल पानी की तलाश करते हुए एक पानी भरे गड्ढे के पास पहुंचा. वहां से उसने एक लोटा पानी लेकर राजा को दिया. राजा के हाथ में जहां-जहां पानी का स्पर्श हुआ, वहां का कुष्ठ ठीक हो गया. बाद में राजा ने उस गड्ढे में स्नान किया और उनका कुष्ठ रोग ठीक हो गया. उसके बाद उसी रात जब राजा रात में सोए हुए, तो सपना आया कि जिस गड्ढे में उन्होंने स्नान किया था, उस गड्ढे में तीन मूर्तियां हैं. राजा ने फिर उन मूर्तियों को एक मंदिर बनाकर स्थापित किया.
First published: October 22, 2017, 7:03 PM IST
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