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जरा हटके: शराब बनाने व पीने वाले 6 गांवों के लोगों ने कहा- न बनाएंगे, न पियेंगे और न बिकने देंगे

जरा हटके: शराब बनाने व पीने वाले 6 गांवों के लोगों ने कहा- न बनाएंगे, न पियेंगे और न बिकने देंगे

बिहार के बांका जिले के छह गांव के लोगों ने शराब सेवन व बिक्री के विरुद्ध शपथ ली.

बिहार के बांका जिले के छह गांव के लोगों ने शराब सेवन व बिक्री के विरुद्ध शपथ ली.

Liquor Ban in Bihar: कोई शराब न पीने वाला व्यक्ति, समूह या समाज शराब न बनानेे, न पीने की शपथ ले, तो इसमें कौनसी बड़ी बात है, लेकिन ऐसा समाज, जहां शराब का सेवन उसकी परपंरा का हिस्सा हो, वह अगर शराब को ना कहे, तो ये कदम न केवल सराहनीय बल्कि मिसाल कायम करने वाला जरा हटके वाले अंदाज से भरा कदम है. ऐसी ही अनोखी पहल की है बिहार के बांका जिले के 6 गांवों के लोगों ने, जिन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी योजना के साथ चलने का फैसला करते हुए हर, समाज में हिंसा, कलह का वजह बनने वाली शराब से तौबा करने का संकल्प लिया है.

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बांका. शराबबंदी को लेकर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सख्ती का अब साइड इफेक्ट भी देखने को मिल रहा है. जहां बीते 26 नवंबर को पूरे सूबे के सरकारी कर्मियों-अधिकारियों ने आजीवन शराब का सेवन नहीं करने की शपथ ली, वहीं बांका में आदिवासी समाज के ऐसे लोगों ने शराब की बुराई के खिलाफ गोलबंद होने का ऐलान करते हुए मिसाल कायम की है. यह खास इसलिए है, क्योंकि इन गांवों के लोग परंपरागत रूप से शराब का निर्माण और सेवन करते थे. बांका प्रखंड स्थित समुखिया पंचायत के कल्हौड़ी, सावरवाड़ी, कडुवाबाड़ी, झरना सहित करीब आधे दर्जन गांव के लोगों ने इसके निर्माण और सेवन से दूर रहने का शपथ ले चुके हैं. इन गांव की महिलाओं एवं पुरुषों के साथ सभी वर्ग के युवाओं ने इस कुरीति से अलग रहने को लेकर चलाये गए अभियान में अपना योगदान देने का संकल्प लिया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी योजना की सराहना करते हुए इन गांवों के लोग सीएम के कदम से कदम मिलाकर चलने की बात कह रहे हैं. ग्रामीण युवा अनिल कोल साफगोई से गांव में परंपरागत रूप से शराब बनने और इसका सेवन करने की बात स्वीकार कर रहा है. शराब सेवन से गृहकलह से लेकर गांव में विवाद का कारण बताते हुए अब इससे तौबा करने की बात कह रहा है. वहीं, पंचायत समिति सदस्य सुरेंद्र मांझी की मानें तो देशी शराब को जीवन का अहम हिस्सा मानते हुए अब मुख्यमंत्री की पहल को शानदार कदम बताते हुए आदिवासी समाज के युवाओं और महिलाओं के लिये रोजगार मुहैया कराने की मांग कर रहे हैं.

शराब नहीं बनेगी, तो लोग सेवन भी नहीं करेंगे

गांव की महिलाएं विमली देवी और नीतू देवी भी शराब के दुष्प्रभाव से अच्छी तरह वाकिफ हैं. इनकी मानें तो शराब नहीं बनने से शराब के सेवन पर भी रोक लगने की बात कह रही हैं. वहीं इसके बावजूद अगर कोई दूसरी जगह सेवन करता भी हैं तो गांव और घर में घुसने नहीं दिया जाएगा. महिलाएं सरकार से समाज की महिलाओं को जीविका समूह से जोड़ने के साथ ही रोजगर के अवसर उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं.

पंचायत के मुखिया रहे रविन्द्र मिश्र के प्रयास रंग लाए

इस पंचायत में आदिवासी समाज के लोगों के यहां शराब निर्माण और सेवन से रोकने के लिये पंचायत के तीन बार के मुखिया रहे रविन्द्र मिश्रा के प्रयास का ही असर रहा कि लोग इसके निर्माण और सेवन से दूर रहने पर राजी हुए हैं. इनकी मानें तो पंचायत के कलहौड़ी, झरना, कदुआवाड़ी, सावरवाड़ी और जीवनपुर के लोगों ने सामूहिक रूप से शपथ लिया है कि अब न तो शराब बनाएंगे, न पियेंगे और न ही इसे बिकने देंगे.

Tags: Bihar News, Illegal liquor, PATNA NEWS

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