बिहार: कभी एक गाय भी खरीदना था मुश्किल, अब केंद्र सरकार ने दिया ये पुरस्कार

सविता को पंडित दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार उनके कभी हार न मानने के जज्बे के साथ कृषि और पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है.

News18 Bihar
Updated: July 18, 2019, 7:56 AM IST
बिहार: कभी एक गाय भी खरीदना था मुश्किल, अब केंद्र सरकार ने दिया ये पुरस्कार
बांका की सविता को मिला पंडित दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार
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Updated: July 18, 2019, 7:56 AM IST
मन में कुछ करने का जज्बा हो और इंसान में हौसला और दृढ़ता हो तो न सिर्फ मुश्किलों पर जीत हासिल की जा सकती है बल्कि वह समाज को नई दिशा दिखाने के काम आ सकता है. बिहार के अमरपुर प्रखंड की रहने वाली सविता ने भी कुछ ऐसा ही किया है. एक छोटे से गांव सिझुआ की सविता ने ऐसा काम किया है कि उनके कार्यों की सराहना दिल्ली दरबार में भी हो रही है. यही कारण है कि 16 जुलाई को उन्हें दिल्ली में पंडित दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

दिल्ली में सम्मानित की गईं बांका की सविता
सविता को यह पुरस्कार उनके कभी हार न मानने के जज्बे के साथ कृषि और पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है.  उन्हें यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से मिलना था, लेकिन वो और कृषि मंत्री किसी कारणवश नहीं आ पाए थे. उन्हें ये पुरस्कार ICAR के डाइरेक्टर जेनरल टी महापात्रा के हाथों प्रदान किया गया. इस दौरान बांका कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ कुमारी शारदा भी साथ थीं.

सविता को प्रदान किया गया पंडित दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार. प्रमाण पत्र की तस्वीर.


सविता को मिल रहा समाज में सम्मान
सविता के अनुसार वह अपनी डेयरी से 70 से 80 लीटर दूध समिति के माध्यम से सुधा डेयरी को दे रही हैं.  इससे न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार कर पा रही हैं, बल्कि समाज में सम्मान भी पा रही हैं.सविता बताती है कि उन्होंने बहुत ही मुश्किल दौर में 2007 में गौ पालन शुरू किया. तब 18 हजार रुपये में एक गाय मुश्किल से खरीद पाईं. कड़ी मेहनत और लगातार संघर्ष के बाद एक दौर आया जब इससे लाभ भी मिलने लगा. अब वह अपनी डेयरी में 10 गाय और दस बछड़ा रखती हैं.

दुग्ध समिति संघ में मिला था प्रथम स्थान
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इसी वर्ष अप्रैल में उन्होंने बांका, भागलपुर, जमुई और मुंगेर जिला के दुग्ध समिति संघ में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया था. वह कहती हैं कि इससे पहले इस गांव में शंकर नस्ल गाय का नामोनिशान नहीं था, पर आज हर घर में ये गाय है. इस कार्य से आमदनी भी अच्छी हो रही है.

डेयरी परिसर में ही घास के कई प्रकार
सविता गौ पालन करने के साथ दो एकड़ की जमीन पर डेयरी के साथ-साथ कई कृषि कार्य भी करती हैं. उन्हें गाय के लिए हरा चारा मिलती रहे और गाय को पौष्टिक तत्व की कमी ना हो इसके लिए घास के भी कई प्रकार डेयरी परिसर में ही लगा रखे हैं.

बांका की सविता को जब सम्मान मिल रहा था इस दौरान बांका कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ कुमारी शारदा भी साथ थीं.


मिसाल बन गईं सविता
डेयरी परिसर में वह मशरुम, साग, भिंडी, गोभी सहित अन्य प्रकार की सब्जी के साथ-साथ गाय को हरा चारा देने के लिए अजोला घास, नेपियर घास सहित अन्य घास भी लगा रखा है. जाहिर है कल तो जो महिला सिर्फ अपने क्षेत्र में ही गौ पालन कर बेहतर दुग्ध उत्पादन की उपाधि पाकर नाम कमा रही थी, वह आज पूरे देश के लिए मिसाल बन गई हैं.

रिपोर्ट- नागेंद्र


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First published: July 17, 2019, 4:10 PM IST
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