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बिहार: 'साइकिल गर्ल' ज्योति के बाद मजदूरों के 'पोस्टर ब्वॉय' के लिए छलका तेजस्वी का दर्द, जानें क्या कहा

बेटे की मौत के बाद लॉकडाउन में फंसे पिता की वायरल हुई थी तस्वीर.

बेटे की मौत के बाद लॉकडाउन में फंसे पिता की वायरल हुई थी तस्वीर.

रामपुकार पंडित (Rampukar Pandit) बिहार के बेगूसराय के रहनेवाले हैं जो लॉकडाउन (Lockdown) के बीच अपने बेटे के वियोग और तमाम परेशानियों को झेलकर बेगुसराय (Begusarai) पहुंचे थे.

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पटना. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Leader of Opposition Tejashwi Yadav) इस कोरोना संकट (Corona Crisis) काल में भी राजनीति करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे. साइकिल गर्ल ज्योति (Cycle Girl Jyoti) के बाद अब प्रवासी मजदूरों के पोस्टर ब्वॉय बने रामपुकार पंडित से सोमवार को तेजस्वी यादव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात की और उन्हें 1 लाख की आर्थिक मदद और बेगूसराय में नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया. बता दें कि रामपुकार पंडित (Rampukar Pandit) बिहार के बेगूसराय (Begusarai)  के रहनेवाले हैं जो कोरोनाबन्दी के बीच देश की राजधानी दिल्ली में फंस गए थे और फिर उनसे जुड़ी कुछ परेशानियों की तश्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं.  तेजस्वी ने अपने ट्विटर हैंडल के डीपी पर रामपुकार पंडित की बहुत मार्मिक तश्वीर भी लगाई है.

कौन हैं रामपुकार पंडित
रामपुकार पंडित (Rampukar Pandit)  बिहार के बेगूसराय के रहनेवाले हैं जो लॉकडाउन (Lockdown) के बीच अपने बेटे के वियोग और तमाम परेशानियों को झेलकर बेगुसराय (Begusarai) पहुंचे थे. तेजस्वी अब रामपुकार पंडित के जख्मों पर आर्थिक मरहम लगाकर ना सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने में लगे हैं बल्कि चुनावी साल में ऐसे लोगों के जरिये वो सरकार पर दवाब बनाने की भी कोशिश में हैं. तेजस्वी यादव ने आज वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये बेगूसराय में रह रहे पोस्टर ब्वाय यानि रामपुकार पंडित से बात की.



होम क्वारन्टीन में तेजस्वी का फूल डोज पॉलिटिक्स
तेजस्वी दिल्ली से लौटकर जब से पटना में आए हैं तब से हर रोज वीडियो कान्फ्रेंसिंग पर लोगों से चैट कर रहे हैं. कभी अपनी पार्टी के वर्कर से बात करते हैं तो कभी अपने पार्टी के पदाधिकारियों से चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं. ऐसे में तेजस्वी वैसे मौकों को हरगिज नहीं छोड़ रहे जिससे उन्हें चुनाव में फायदा हो रहा हो. मसलन साइकिल गर्ल ज्योति की पढ़ाई और उनकी शादी का पूरा जिम्मा उठा लिया तो अब रामपुकार पंडित के जख्मों पर मरहम लगाकर वो आप्रवासी मजदूरों के दिलों तक पहुंचना चाहते हैं.

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