Womens Day 2020: नक्सलियों के गढ़ से निकली 'जलपरी' जिसने बदल डाली गांव की पहचान

पायल पंडित ने तैराकी के दम पर अपने गांव की पहचान बदल डाली. (File Photo)
पायल पंडित ने तैराकी के दम पर अपने गांव की पहचान बदल डाली. (File Photo)

बेगूसराय जिले के सरौंजा गांव जो कभी नक्सलियों (Naxalas) का गढ़ माना जाता था, आज पायल पंडित (Payal Pandit) के नाम से उस गांव की पहचान है. पायल अबतक तैराकी में 14 नेशनल गेम में भाग ले चुकी हैं.

  • Share this:
बेगूसराय. प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती है, इस वाक्य को जमीन पर बेगूसराय (Begusarai) की पायल पंडित  (Payal Pandit) ने उतार कर दिखा दिया. गांव के नदी और नालों में तैराकी (Swimming) का अभ्यास कर स्टेट एवं नेशनल स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवा चुकी है और यही वजह है कि बेगूसराय जिले के सरौंजा गांव जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, आज पायल पंडित के नाम से उस गांव की पहचान है. गांव के लोग पायल पंडित को प्यार से जलपरी कहकर बुलाते हैं.

ग्रामीणों के तानों की पायल ने नहीं की परवाह

नक्सलियों के गढ़ बेगूसराय के सरौंजा गांव के लोगों को उस वक्त पता नहीं था कि गरीबों की मोहल्ले की एक लड़की एक दिन ऐसा काम कर दिखाएगी कि जिसके चलते राष्ट्रीय स्तर पर गांव की पहचान बन जाएगी. दरअसल गांव के मधुसूदन पंडित की बेटी पायल पंडित जिसे 4 साल की उम्र से ही तैराकी का शौक था और वह घर से चोरी-छिपे निकलकर गांव के पोखर में एवं बरसाती नालों में जाकर तैराकी किया करती थी. धीरे-धीरे पायल पंडित ने संसाधनों की कमी के बावजूद अपने जज्बों के बदौलत सफलता के शिखर को छोटा कर दिखाया.



payal Pandir
मधुसूदन पंडित की बेटी पायल पंडित जिसे 4 साल की उम्र से ही तैराकी का शौक था. (File Photo)

अब तक 14 नेशनल गेम खेल चुकी हैं पायल

गांव से निकलकर पायल पंडित ने पहले स्टेट स्तर पर प्रतियोगिता में भाग लिया और चैंपियन रहीं. लगातार कई बार स्टेट चैंपियन रहने के बाद पायल पंडित का सलेक्शन नेशनल प्रतियोगिताओं के लिए हुआ और वहां भी पायल ने सातवां स्थान प्राप्त कर सबको चौंका दिया. अब तक पायल पंडित 14 नेशनल गेम खेल चुकी है. इनमें 5 किलोमीटर लगातार तैराकी और 5 किलोमीटर की दौड़ प्रतियोगिता भी शामिल है. पायल पंडित की मानें तो गांव के तानों के बीच परिवार का सहयोग उसे हमेशा मिलता रहा. अब पायल पंडित का सपना ओलंपिक में भारत को पदक दिलाने की है. लेकिन पायल पंडित ने सरकार से खेल को बढ़ावा देने एवं तैराकी के लिए स्विमिंग पूल की मांग भी की है.

माता-पिता के सहयोग से पायल ने पाया यह मुकाम

अपनी बेटी के जज्बे को देखते हुए पायल पंडित के पिता मधुसूदन पंडित ने कभी भी गांव के तानों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और बेटी की सफलता के लिए लगातार प्रयास करते रहे एवं स्वयं ही बेटी के कोच भी बने. पायल पंडित के पिता ने बताया कि गांव के लोग हमेशा उसे कहते की एक लड़की को तैराकी सिखा कर क्या करोगे, आखिर एक दिन शादी कर देनी है. लेकिन पायल के पिता ने लोगों की परवाह नहीं की और अपनी बेटी को आगे बढ़ाने के लिए सदैव तत्पर रहे और यही वजह है कि आज पायल पढ़ाई के साथ-साथ तैराकी में भी अव्वल है.

अब ग्रामीण भी पायल और उसके पिता की कर रहे प्रशंसा

वहीं गांव के लोग भी इस बात को मानते हैं कि शुरू-शुरू में लोगों ने पायल पंडित एवं उसके पिता को तरह तरह के ताने-बाने भी सुनने पड़े. ग्रामीण सुरेश चौधरी बताते हैं कि इन सबसे बेपरवाह पायल पंडित एवं उसका परिवार तन मन से तैराकी में समर्पित रहा और आज पायल पंडित ने लोगों की सोच तक बदल कर रख दी. अब लोग पायल पंडित एवं उसके परिवार की भूरी भूरी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं.

सरकार से मदद की है अपेक्षा

देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. सीमित संसाधनों के बीच भी लोग अलग-अलग क्षेत्र में बेटियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं. ऐसे में जरूरत है सरकार को भी एक कदम आगे बढ़ कर आने की जिससे पायल पंडित जैसे होनहार को अपनी उड़ान के लिए पंख मिल सके.

यह भी पढ़ें:  'बाबूजी' के अस्पताल में तेजप्रताप यादव का ड्रामा, डॉक्टरों को लगाई लताड़

पत्नी की हत्या कर थाना पहुंचा चौथा पति, बोला- अवैध संबंध के कारण ले ली जान
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज