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    Bihar Election Result 2020 Live: बखरी विधानसभा सीट से सीपीआई के सूर्यकांत पासवान जीते, बीजेपी की हार

    Bihar Election Result: सीपीआई ने भाजपा को दी पटखनी.
    Bihar Election Result: सीपीआई ने भाजपा को दी पटखनी.

    Bihar Assembly Election Result 2020 Live Updates: इस सीट पर सीपीआई ने सूर्यकांत पासवान को प्रत्याशी बनाया. वहीं भाजपा ने रामशंकर पासवान को चुनाव मैदान में उतारा था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 10, 2020, 4:39 PM IST
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    बेगूसराय. बखरी विधानसभा सीट सुबह 8 बजे से मतगणना जारी है. इस सीट पर सीपीआई ने सूर्यकांत पासवान को प्रत्याशी बनाया था, वह अब जीत चुके हैं. इस विधानसभा सीट पर इस बार 13 प्रत्याशी मैदान में उतरे. इस सीट पर भाजपा ने रामशंकर पासवान को चुनाव मैदान में उतारा, वहीं इसके अलावा रालोसपा की ओर से विजय पासवान चुनाव मैदान में रहे. बखरी विधानसभा क्षेत्र  (Bakhari Assembly Constituency) से  2015 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के उपेंद्र पासवान (Upendra Paswan, RJD) ने जीत दर्ज की थी. 2015 चुनाव में उपेंद्र पासवान ने बीजेपी के रमादान राम को पटखनी दी थी. इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 212958 है. वहीं पुरुष मतदाताओं की संख्या 112234 है, वहीं महिला मतदाताओं की संख्या 100724 है. पिछले चुनाव में कुल 55.71 प्रतिशत मतदान हुआ था. पिछले चुनाव में उपेंद्र पासवान ने लालटेन जलाई थी.

    माना जा रहा है कि इस बार यहां एनडीए में भाजपा की ओर से फिर उम्मीदवार खड़ा किया जा सकता है. जबकि महागठबंधन में देखना दिलचस्प रहेगा कि अगर वामदल इसका हिस्सा रहते हैं तो राजद और सीपीआई में किसके हिस्से यह सीट आती है.

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    वर्ष  विधायक का नाम    पार्टी
    2015 उपेंद्र पासवान राजद
    2010  रामानंद राम   भाजपा
    2005 (अक्टूबर) राम विनोद पासवान  सीपीआई
    2005 (फरवरी)  राम विनोद पासवान  सीपीआई
    2000  रामानंद राम  राजद
    1995  राम विनोद पासवान  सीपीआई
    1990  राम विनोद पासवान  सीपीआई

    चुनावी मुद्दे

    विधानसभा क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई संस्थान नहीं बना है. डिग्री कॉलेज की मांग अब तक अधूरी है. बाढ़ व खेतों की सिंचाई की समस्या  के साथ नौजवानों के लिए बेरोजगारी, उच्च शिक्षा व तकनीकी प्रशिक्षण मुख्य चुनावी मुद्दे हैं. वहीं महिलाओं के लिए चुनावी मुद्दे- महंगाई, घरेलू सामानों के दाम में वृद्धि, शिक्षा हैं.  महिला सुरक्षा के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया. किसान की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ ही रही है.
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