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व्यक्ति विशेष: लेफ्ट से लेकर राजद तक, ऐसा था बेगूसराय के 'गार्जियन' भोला बाबू का सियासी सफर

व्यक्ति विशेष: लेफ्ट से लेकर राजद तक, ऐसा था बेगूसराय के 'गार्जियन' भोला बाबू का सियासी सफर

इलाज के दौरान अस्पताल में भर्ती भोला सिंह

इलाज के दौरान अस्पताल में भर्ती भोला सिंह

भोला सिंह के बेहद ही करीबी रहे पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि उनका भाषण संसद को हिला कर रख देता था. हर दल के लोगों से उनका गहरा लगाव था और सभी उनका सम्मान करते थे.

    बिहार के बेगूसराय से बीजेपी के सांसद भोला सिंह का शुक्रवार की रात दिल्ली में निधन हो गया. भोला बाबू के नाम से विख्यात सांसद को लोग गार्जियन के तौर पर जानते थे. जैसे ही उनके निधन की खबर लोगों को मिली शोक की लहर दौड़ गई. इस खबर के सामने आने के बाद जिला में हर तरफ शोक की लहर है.

    अधिकतर लोग बेगूसराय में राजनीति के एक युग का अंत मान रहे हैं. भोला बाबू का जन्म 3 जनवरी 1939 को बेगूसराय जिला के गढ़पुरा प्रंखड के दुहनी गांव में हुआ था. वो छात्र जीवन से ही राजनीति करते रहे यही कारण रहा कि एक प्रोफ्रेसर की नौकरी करने बाबजूद राजनीति में दिलचस्पी रही. 1967 में पहली बार निर्दलीय विधायक के रूप में बेगूसराय का उन्होंने प्रतिनधित्व किया. 1972 में सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय से विधायक चुने गए थे उसके बाद 1977 में कांग्रेस पार्टी से जुड़े.

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    1977 में उन्होंने उस वक्त परचम लहराया जब बिहार विधानसभा में 324 में कांग्रेस को मात्र 56 सीटें प्राप्त हुई थीं. 1988, 1989 में चंद्रशेखर सिंह के मंत्रिमंडल में पहली बार शिक्षा राज्य मंत्री के रूप में उन्हें स्थान मिला था उसके बाद कांग्रेस की स्थिति देखते हुए उन्होंने राजद का भी दामन थामा. 2000 में भोला बाबू ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

    फिर 2005 में जीत हासिल करते हुए विधानसभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए. 2008 में भोला बाबू ने शहरी विकास मंत्री के रूप योगदान दिया. इसके बाद 2009 में नवादा संसदीय क्षेत्र से बाहुबली सूरजभान सिंह को उन्होंने पराजित किया. 2014 में वो फिर से अपने गृह जिला बेगसराय से सांसद के रूप में चुने गए. वो लोकसभा के विभिन्न कमिटी के सदस्य थे. भोला बाबू का राजनीतिक करियर पांच दशक का रहा. भोला बाबू के घर में तीन पुत्र दो पुत्री हैं.

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    भोला सिंह के बेहद ही करीबी रहे पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि उनका भाषण संसद को हिला कर रख देता था. हर दल के लोगों से उनका गहरा लगाव था और सभी उनका सम्मान करते थे. सांसद का इस तरह दुनिया से चले जाना एक अपूर्णीय क्षति है. संजय सिंह के मुताबिक श्री कृष्ण सिंह के बाद अगर किसी ने बेगूसराय की चिंता की तो वो भोला बाबू ही थे. नवादा के सांसद रहने के बावजूद वो जिस तरह बेगूसराय की आवाज को संसद में उठाते रहे हैं उससे लगता था कि उनके रोम-रोम में बेगूसराय बसता था.

    रिपोर्ट- संतोष कुमार

    Tags: Begusarai news, Bihar News

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