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Begusarai Lok sabha Result 2019, बेगूसराय लोकसभा रिजल्ट 2019: इन वजहों से बिहार के 'लेनिनग्राद' में गिरिराज सिंह ने हासिल की जीत

फाइल फोटो

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Begusarai Election Result 2019 (बेगूसराय इलेक्शन रिजल्ट २०१९) बेगूसराय लोकसभा परिणाम 2019: चुनावी नतीजों में गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार को 422217 वोटों से शिकस्त दी.

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आखिरी वक्त में नवादा से सीट बदलकर बेगूसराय किए जाने को लेकर केंद्रीय नेता और बीजेपी के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह नाराज थे. शुरुआत में सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय से मुकाबले में उतरे कन्हैया कुमार की चुनौती स्वीकार करने से गिरिरिज सिंह हिचकिचा रहे थे. हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद वो पूरे जोश से चुनावी समर में कूद पड़े. वहीं, चुनावी नतीजों में गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार को 422217 वोटों से शिकस्त दी. गिरिराज सिंह को कुल 692193 वोट हासिल हुए जबकि कन्हैया कुमार को 269976 वोट मिले. तीसरे नंबर पर रहे तनवीर हसन को 198233 वोट मिले.

गिरिराज सिंह की जीत का समीकरण

-कन्हैया कुमार के मुकाबले में होने की वजह से कहा जा रहा था कि भूमिहार वोटों के बंटने की वजह से गिरिराज सिंह को नुकसान होगा. कन्हैया और गिरिराज सिंह दोनों इसी समुदाय से आते हैं. लेकिन भूमिहार वोटर्स को कन्हैया कुमार अपने पाले में खींचने में नाकाम रहे. बेगूसराय सीट पर भूमिहारों की संख्या करीब 4.75 लाख है.



-भूमिहार के अलावा यादव और मुस्लिम वोट छोड़कर बाकी पिछड़ी जातियों ने गिरिराज सिंह का समर्थन किया. बेगूसराय सीट पर कुर्मी-कुशवाहा जाति के लोगों की संख्या 2 लाख के करीब है. इसके साथ ही भूमिहार, ब्राह्मण और कायस्‍थ जातियों में मोदी लहर का होना गिरिराज सिंह के लिए काम कर गया.
-गिरिराज सिंह के सामने दो मजबूत उम्मीदवारों का होना उनके पक्ष में गया. सीपीआई के कन्हैया कुमार और आरजेडी के तनवीर हसन, दो ताकतवर उम्मीदवारों के बीच वोट बंटने का फायदा गिरिराज सिंह को मिला.

-बेगूसराय सीट पर मुसलमानों की संख्या करीब 2.5 लाख है, वहीं यादव बिरादरी की आबादी करीब 1.5 लाख है. कुल मिलाकर 4 लाख की आबादी वाले इन दोनों समुदाय के वोट कन्हैया कुमार और तनवीर हसन के बीच बंट गए. इसका सीधा फायदा गिरिराज सिंह को मिला.

-देशविरोधी नारे लगाने और देशद्रोह के आरोपों के इर्द-गिर्द कन्हैया कुमार की छवि को समेटने की बीजेपी की कोशिश काम कर गई. राष्ट्रवाद के दौर में कन्हैया कुमार पर ‘देशविरोधी’ कृत्यों वाले आरोपों के छींटे जनता के बीच गलत संदेश लेकर गईं. कन्हैया कुमार को इससे नुकसान हुआ.

-बेगूसराय की राजनीति भूमिहार समाज के इर्द-गिर्द घूमती है. इसके पहले हुए 10 चुनावों में यहां से 9 बार इसी समाज के प्रत्य़ाशी ने जीत हासिल की है. कन्हैया की जात-पात विरोधी राजनीति उनके अपने समुदाय के वोटर्स को आकर्षित नहीं कर पाई.

-2014 में मोदी लहर के बावजूद आरजेडी के तनवीर हसन को 3.70 लाख वोट मिले थे. उन्हें 58 हजार वोटों से बीजेपी के भोला सिंह ने शिकस्त दी थी. तनवीर हसन की दावेदारी के बीच में कन्हैया के आने से गिरिराज सिंह को फायदा मिला.

-बेगूसराय में मुसलमानों की आबादी करीब 15 फीसदी और यादव जाति की आबादी करीब 12 फीसदी है. अनुसूचित जाति के लोग भी अच्छी खासी संख्या में हैं. इन जातियों का गठजोड़ करीब 30 फीसदी का है. इस गठजोड़ के सामने कोई एक उम्मीदवार (कन्हैया कुमार या तनवीर हसन) होता तो रिजल्ट बदल सकते थे. वोटों में बिखराव ने बेगूसराय के जातीय समीकरण को तोड़ दिया.

-विपक्ष पर प्रधानमंत्री मोदी के हमलों और बिहार में नीतीश कुमार के विकास के वायदों पर जनता ने भरोसा जताया. विपक्ष में बिखराव की वजह से स्थानीय नाराजगी को वो भुना नहीं पाए.

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