'सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है', राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को गृह मंत्री ने इस अंदाज में किया याद

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को हुआ था.
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को हुआ था.

राज्यसभा में भाजपा के एक सदस्य ने बुधवार को संसद भवन के ग्रंथालय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar) भूपेंद्र यादव (Bhoopendra Yadav) ने के नाम पर साहित्य की एक पीठ स्थापित करने का सुझाव दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 11:55 AM IST
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पटना. दिनकर मतलब रवि या सूर्य या सूरज. 23 सितम्बर 1908 को बिहार के बेगूसराय की धरती पर ऐसे ही एक सूर्य का उदय हुआ था जिनके शब्दों की चमक को संजो आज भी भारत का हिंदी साहित्य जगत समृद्ध है. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar) ने विद्रोह और क्रांति हो या श्रृंगार या फिर प्रेम, कविता की हर विधा में साहित्य रचे और अपनी शाब्दिक कुशलता के साथ ही स्वयं चैतन्य भी साबित किया. यह सही भी है कि एक चैतन्य ही साहित्य की रचना कर सकता है और समाज को सही दिशा दे सकता है. आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर लोग इसी स्वरूप में उन्हें याद कर रहे हैं. इसी क्रम में देश के गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने भी उन्हें याद किया है.

अमित शाह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए लिखा, राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत अपनी कविताओं से ‘दिनकर’ जी ने राष्ट्रीयता के स्वर को बुलंद किया. देश के लोकतंत्र पर हुए सबसे बड़े आघात आपातकाल का उन्होंने निडर होकर विरोध किया और उनकी कविता ‘सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है’ उस आंदोलन का स्वर बनी. राष्ट्रकवि दिनकर को कोटिशः नमन.


इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट किया जिसमें लिखा, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी अपनी उपाधि के अनुरूप साहित्य जगत में अपने लेखन के माध्यम से एक सूरज की भांति चमके. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनी कलम की शक्ति से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आजादी के बाद अपने विचारों से समाज की सेवा की.



बता दें कि राज्यसभा में भाजपा के सदस्य भूपेंद्र यादव ने बुधवार को संसद भवन के ग्रंथालय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर साहित्य की एक पीठ स्थापित करने का सुझाव दिया. शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि 23 सितंबर को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में जन्मे रामधारी सिंह ने हमेशा बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि गद्य तथा पद्य विधाओं में महारथ रखने वाले दिनकर द्वन्द्व के कवि माने जाते थे और साहित्य जगत में उनका उल्लेखनीय योगदान है.

भूपेंद्र यादव ने कहा कि राज्यसभा के सदस्य रह चुके दिनकर को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ सम्मान तथा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. वर्ष 1999 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया. यादव ने राष्ट्रकवि दिनकर के नाम पर संसद भवन के ग्रंथालय में साहित्य की एक पीठ स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि ऐसा करने से भारतीय भाषाओं में लिखने वाले सांसदों को प्रोत्साहन मिलेगा. सभापति एम वेंकैया नायडू ने इसे एक अच्छा और महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार इस ओर ध्यान देगी.
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