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Holi 2020: बेगूसराय में विधवा महिलाओं ने मनाई होली, गीतों पर लगाए ठुमके

Holi 2020: बेगूसराय में विधवा महिलाओं ने मनाई होली, गीतों पर लगाए ठुमके

सामाजिक बंदिशों को तोड़कर विधवा महिलाओं ने जमकर होली खेली.

सामाजिक बंदिशों को तोड़कर विधवा महिलाओं ने जमकर होली खेली.

बेगूसराय की आपका आंचल नाम की सामाजिक संस्था ने विधवा महिलाओं के लिए होली (Holi For Widow) का आयोजन किया. यहां महिलाओं ने एक-दूसरे को जमकर गुलाल लगाया और होली के गीतों पर ठुमके (Dance) लगाए.

बेगूसराय. बेगूसराय की एक सामाजिक संस्था ने विधवा महिलाओं (Widow) के लिए होली (Holi) का आयोजन किया. रुढ़िवादी परंपराओं की तमाम बंदिशों को तोड़ते हुए आपका आंचल (Aapka Aanchal) नामक की संस्था और उसके कार्यकर्ताओं ने बीते रविवार को विधवा महिलाओं के लिए होली मिलन समारोह का आयोजन किया. संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में विधवा महिलाएं शामिल हुईं, जो ना सिर्फ एक दूसरे को रंग लगाती हुए नजर आईं बल्कि उन्होंने होली के गीतों पर जमकर ठुमके लगाए. इसके बाद विधवाओं ने सुहागिन महिलाओं की मांग में अबीर भरकर उन्हें आशीर्वाद भी दिया. संस्था से जुड़ी एक महिला अधिकारी ने बताया कि एक तो होली और दूसरे आज महिला दिवस होने की वजह से यह कार्यक्रम अपने आप में खास हो गया. बेगूसराय में लोग इस संस्था की भूरी भूरी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं.

होली के गीतों पर लगाए ठुमके

यहां सैकड़ों विधवा महिलाओं ने अपने गम को भुला कर होली के गीतों पर जमकर ठुमके लगाए और खुशियां मनाई. दरअसल, मौके पर मौजूद सैकड़ों महिलाओं का सुहाग पहले ही उजड़ चुका है और विधवाओं की जिंदगी में खुशियों की कोई जगह नहीं होती है. लेकिन आज जिले के आपका आंचल नामक संस्था ने अपने इस अनोखे कार्यक्रम की वजह से महिलाओं को खुशी देने में कामयाब रही.

'समाज में सभी को है जीने का हक'

कार्यक्रम की संचालिका कामिनी कुमारी बताती हैं कि समाज में हर व्यक्ति को जीने का बराबर हक होता है. किसी का जीना और मरना मनुष्य के हाथ में नहीं है और जो महिलाएं अपने पति को खो चुकी हैं, उनके चेहरे पर खुशी ढूंढना भी बड़ी चुनौती का कार्य है. यह कार्य हमारी संस्था ने किया और यह संदेश दिया कि हमारा समाज चाहे तो विधवा महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान और सुकून ला सकता है.

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विधवा महिलाओं ने सुहागिन महिलाओं की मांग में अबीर भरकर उन्हें आशीर्वाद भी दिया. 


कामिनी कुमारी ने बताया कि किसी कार्य को शुरू करने में दिक्कतें तो आती हैं और लोगों के ताने भी सुनने पड़ते हैं, लेकिन इन मुरझाए चेहरों में क्षण भर की खुशी उन तानों पर अधिक भारी पड़ती है इसलिए संस्था द्वारा ऐसे कार्य लगातार जारी रहेंगे.

समाज के लोग भी कर रहे हैं भूरी भूरी प्रशंसा

वहीं समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोग भी ऐसे आयोजन को समाज की बदलती रूढ़िवादी परंपरा की दिशा में सार्थक कदम बता रहे हैं. प्रगतिशील लेखक संघ के जिला अध्यक्ष ललित लालित्य ने बताया कि एक समय था जब देश में सती प्रथा जैसी परंपरा भी मौजूद थी, लेकिन कुछ साहसी लोगों के प्रयास के चलते इस प्रथा का आज नामोनिशान नहीं है. आज समाज से सती प्रथा जैसी बड़ी कुरीति समाप्त हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ऐसे ही जो महिलाएं मानसिक रूप से कमजोर थीं, उनकी खुशियों के लिए उठाया गया यह कदम आने वाले दिनों में बेहतर समाज निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा.

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Tags: Begusarai news, Bihar News, Holi 2020, Holi celebration

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