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भागलपुर: डॉल्फिन सेंटर, सिल्क सिटी और बिहार का पावर हाउस के नाम से जाना जाता है ये शहर

भागलपुर शहर का एक चर्चित जगह स्टेशन पार्क

भागलपुर शहर का एक चर्चित जगह स्टेशन पार्क

बिहार का भागलपुर जिला कोसी और गंगा दो नदियों से घिरा इलाका है. ये जिला इसलिए भी खास है क्योंकि यहां मेडिकल से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक मौजूद हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 2:05 PM IST
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भागलपुर. बिहार का भागलपुर विश्व में ज्ञान अर्जन का केन्द्र बिन्दु रहा है. भागलपुर बिहार की दो बड़ी नदियों गंगा और कोसी के तट पर स्थित है जो प्राचीन, सामरिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से न केवल अति महत्वपूर्ण जिला है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. भागलपुर का प्राचीन इतिहास काफी समृद्ध रहा है.

विक्रमशिला विश्वविद्यालय

पालवंश के संस्थापक धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्व में ज्ञान अर्जन का केन्द्र बिन्दु रहा है और आज भी विक्रमशिला भग्नावशेष पर्यटकों को लुभाता है. देश-विदेश से सैलानी भग्नावशेष को देखने यहां आते हैं. भागलपुर का इतिहास काफी पुराना है. झारखंड की सीमा से सटा भागलपुर सूफी-संतों का शहर रहा है. ज्ञानस्थली के साथ-साथ धार्मिक रूप से भी भागलपुर का खासा महत्व है. द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक देवघर के बाबा रावणेश्वर शिवलिंग पर जलाभिषेक सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी का गंगा जल से होता है.



यहीं से शुरू होती है बाबाधाम की यात्रा
बाबा अजगैबीनाथधाम मंदिर में पूजा अर्चना के बाद कांवरिया गंगा में स्नान कर जल उठाते हुए एक सौ चार किलोमीटर की देवघर की दूरी पैदल तय करते हैं, इसके अलावा भागलपुर शहर में गंगा तट स्थित बाबा बूढानाथ मंदिर और कहलगांव स्थित बाबा बटेश्वरनाथ धाम मन्दिर सावन माह में देश-विदेश के श्रद्धालुओं से भरा रहता है. गौतम बुद्ध, वर्द्धमान महावीर के साथ-साथ जैन समुदाय के दसवें गुरू वासुपूज्य का महाकल्याणक भागलपुर ही रहा है. नाथनगर स्थित जैन मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पूरे विश्व से जैन समुदाय के लोग पहुंचते हैं.

भागलपुर शहर
भागलपुर शहर स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज


भौगोलिक संरचना

जिले की भौगोलिक बनावट इसे दो भागों में बाटती हैं. गंगा के आरपार का इलाका. एक इलाका नवगछिया तो दूसरा इलाका गंगा के दक्षिणी छोर का इलाका भागलपुर का इलाकाय भागलपुर से होकर बहने वाली गंगा और कोशी नदी न केवल यहां के लोगों की प्यास बुझाती है बल्कि हरेक साल बाढ और सुखाड जैसी हालात भी पैदा करती है. हरेक साल बाढ़ जिले में कहर बरपाती है. लाखों की आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है लेकिन गंगा और कोशी न केवल कहर बरपाती है,बल्कि जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी संरक्षक का काम करती है.

डॉल्फिन अभ्यारण्य

कहलगांव बटेश्वरस्थान से लेकर सुल्तानगंज करीब साठ किलोमीटर का क्षेत्र तक का गंगा का क्षेत्र डॉल्फिन अभ्यारण्य के रूप से संरक्षित है. यहां गांगेय डॉल्फिन बहुतायत संख्या में है. डॉल्फिन अभ्यारण्य क्षेत्र होने के कारण दूसरे अन्य जलीय जीव जंतु जैसे कछुआ, उदबिलाव आदि भी पर्याप्त संख्या में है, इसके अलावा विश्व मे विलुप्त हो रही गरुड़ की प्रजाति भी पायी जाती है और इसकी संख्या में उत्तरोतर बढ़ोतरी हो रही है. यही कारण है पर्यावरण एवं वन विभाग की ओर से भागलपुर सुंदरवन में इसे संरक्षित करने के लिए गरुड़ रेस्क्यू एंड रेहिबिलेटेशन सेंटर स्थापित है और यह गरुड़ के अस्पताल के रूप में काम करता है.

भागलपुर शहर
भागलपुर शहर का घंटाघर


कतरनी और जर्दालु आम की होती है खेती

भागलपुर की पहचान सिल्क उद्योग के साथ-साथ कतरनी और जर्दालू आम की खुशबू के लिए फेमस है. यह शहर सिल्क सिटी के रूप में जाना जाता है. भागलपुर का तसर सिल्क विश्व विख्यात है. सिल्क का कारोबार हरेक साल अरबों रुपए का होता है. गंगा और कोसी नदी के किनारे होने के कारण यहां की मिट्टी काफी उपजाऊ है और यही कारण है कि यहां की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है. यहां मुख्य रूप से मक्का, धान और सब्जी के साथ केला की खेती होती है. आम और लीची के बड़े-बड़े बगीचे गर्मी के मौसम में कारोबारियों को आकर्षित करते हैं.जगदीशपुर में होने वाले कतरनी धान अपनी विशेष खुशबू के लिए जानी जाती है और देश विदेश में कतरनी चावल और चूड़ा का निर्यात यहां से होता है.

मेडिकल से लेकर इंजीनियरिंग पुल तक मौजूद

भागलपुर आज भी ज्ञान अर्जन का बहुत बड़ा केन्द्र के रूप में स्थापित है. दो-दो विश्वविद्यालय के साथ-साथ व्यवसायिक पाठ्यक्रम मसलन-मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, लॉ कॉलेज में पढने के लिए बिहार-झारखंड ही नहीं देश के दूरदराज क्षेत्रों से छात्र आते हैं. शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के आज भी भागलपुर तपोभूमि के समान है.

एनटीपीसी से होता है बिजली का उत्पादन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी योजना के लिए भागलपुर शहर ही ऐसा पहला शहर है जिसका चयन बिहार और झारखंड में सबसे पहले हुआ. ऊर्जा स्रोत के रूप में कहलगांव एनटीपीसी देश में अति महत्वपूर्ण है.

खानपान

खानपान के रूप में अधिकांश लोग मुख्य रूप से दिन में चावल और रात को रोटी लेते हैं. गंगा और कोसी के दियारा इलाके में सब्जी की खेती काफी होती है जिससे सालों भर सीजनल हरी सब्जी लेते हैं. मांसाहारी लोग ताजा फ्रेश वाटर मछली को ज्यादा पसंद करते हैं. जहां तक परिधान की बात है तो पश्चिमी सभ्यता के अनुरूप युवा पीढ़ी फॉर्मल पैंट के अलावे जीन्स, टी-शर्ट, कमीज को पसंद करते हैं वहीं महिलाएं साड़ी और सलवार कुर्ती ज्यादा पहनती हैं
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