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बिहार उपचुनाव: नाथनगर में कम मतदान प्रत्याशियों को कर रहा परेशान, जीत-हार के गणित में उलझे समर्थक

भागलपुर के नाथनगर में कम मतदान प्रतिशत ने चुनाव नतीजों को लेकर प्रत्याशियों को परेशान कर रखा है.
भागलपुर के नाथनगर में कम मतदान प्रतिशत ने चुनाव नतीजों को लेकर प्रत्याशियों को परेशान कर रखा है.

मुस्लिम बहुल मतदान केन्द्रों पर सोमवार की सुबह मतदाताओं की लंबी कतार से ऐसा लग रहा था कि 2015 में हुए विधानसभा चुनाव का 56 प्रतिशत और पिछले लोकसभा चुनाव में हुए 60.07 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर जाएगा, लेकिन मतदान केन्द्रों पर शाम तक उस तरह की भीड़ नहीं जुट पायी और मतदान का यही प्रतिशत प्रत्याशियों और समर्थकों को परेशान कर रहा है.

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भागलपुर. नाथनगर विधानसभा उपचुनाव (By Election) सम्पन्न होने के साथ ही 24 अक्टूबर को होने वाली मतगणना (Counting of votes) का हर किसी को इंतजार है. इसी के साथ ही जीत-हार को लेकर प्रत्याशी सहित समर्थकों का कयास लगने शुरू हो गए हैं. हालांकि एक तथ्य जो सभी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परेशान कर रहा है, वह है कम वोटर टर्न आउट. बता दें कि 1967 में अस्तित्व में आए नाथनगर विधानसभा (Nathnagar Assrembly Seat) में सबसे कम इस बार मतदान हुआ है.

उपचुनाव में लोगों ने कम उत्साह दिखाया और महज 43.2 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मतदान में भाग लिया. अब तक सबसे कम हुए मतदान के पीछे राजीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव में मतदान के प्रति लोगों में कम इंट्रेस्ट के पीछे चंद दिनों पहले ही क्षेत्र के बड़े इलाके का बाढ़ से प्रभावित होना और उपचुनाव के प्रति लोगों में कम रूझान के साथ मुस्लिम समाज का पर्व चेहल्लुम का होना भी है.

हालांकि मुस्लिम बहुल मतदान केन्द्रों पर सोमवार की सुबह मतदाताओं की लंबी कतार से ऐसा लग रहा था कि 2015 में हुए विधानसभा चुनाव का 56 प्रतिशत और पिछले लोकसभा चुनाव में हुए 60.07 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर जाएगा, लेकिन मतदान केन्द्रों पर शाम तक उस तरह की भीड़ नहीं जुट पायी और मतदान का यही प्रतिशत प्रत्याशियों और समर्थकों को परेशान कर रहा है. हालांकि इससे पहले 2005 के अक्टूबर में हुए उपचुनाव में ही सबसे कम 46 प्रतिशत मतदान हुआ था.



नाथनगर विधानसभा उपचुनाव में चेहल्लुम होने के बावजूद मुस्लिम मतदाताओं ने बड़ी तादाद में मतदान किया.

बता दें कि चुनाव आयोग ने तमाम प्रयास किए थे कि मतदाता घरों से बाहर निकलें. इसके लिए मतदाताओं में जागरूकता को लेकर भी कार्यक्रम चलाये गये, लेकिन मतदाताओं का उपचुनाव में ज्यादा अभिरूचि नहीं होना जिला प्रशासन के किये कराये प्रयासों पर भी पानी फेर दिया.

बहरहाल यहां मुख्य रूप से गंगोता, मुस्लिम और यादव मतदाताओं की बहुलता है. यही वजह है कि कम मतदान के बावजूद चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे उम्मीदवार भी मतदान के बाद से ही बूथवाइज जातिगत आंकड़ों के साथ समीक्षा में लग गये हैं.

नाथनगर के एक बूथ पर अपने मतदान पर्ची के साथ वोटर.


जदयू प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल, राजद प्रत्याशी राबिया खातून, निर्दलीय प्रत्याशी डॉ अशोक कुमार आलोक और हम सेक्यूलर के अजय राय समेत अधिकतर उम्मीदवार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. वहीं इससे इतर वंचित समाज पार्टी की प्रत्याशी डॉली मंडल गंगोता और सवर्ण समाज के बड़े वोट बैंक पर सेंधमारी करने का दावा कर रही हैं.

रिपोर्ट- राहुल ठाकुर

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