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बिहार के इस शहर में 108 फीट लंबे कांवर को लेकर एक साथ निकले 300 कांवरिया
Bhagalpur News in Hindi

Rahul Thakur | News18 Bihar
Updated: February 5, 2020, 12:55 PM IST
बिहार के इस शहर में 108 फीट लंबे कांवर को लेकर एक साथ निकले 300 कांवरिया
बिहार के भागलपुर में 108 फीट लंबा कांवर निकालता भक्तों का जत्था

कांवर के साथ बाबा बासुकीनाथ धाम मंदिर पहुंचने में सामान्यतया पांच दिन लगते हैं और वहां पहुंचने के बाद पूर्णिमा के दिन शिविलंग पर जलाभिषेक करते हैं

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भागलपुर. जिले के सबौर बाबूपुर से बम बासुकी डाक बम सेवा समिति की ओर से तीन सौ कांवरियों का जत्था एक सौ आठ फीट लंबा कांवर के साथ जालभिषेक के लिए बाबा बासुकीनाथधाम मंदिर पैदल रवाना हुआ. बरारी सीढ़ीघाट से गंगा का जल उठाकर कांवरियों का जत्था बाबा बुढ़ानाथ मंदिर होते हुए शहर की परिक्रमा कर दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए रवाना हुआ.

कांवरियों में पुरूषों के साथ बड़ी संख्या में महिला कांवरिया भी मौजूद थीं. कांवर यात्रा में शामिल कांवरिया लगातार बाबा भोलेनाथ का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं. कांवर यात्रा में शामिल कांवरियों का जत्था कांवर के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को साथ लेकर चल रहे हैं. बम बासुकी डाक बम सेवा समिति के अरूण कुमार शर्मा ने बताया कि विश्व कल्याण और सामाजिक समरसता को लेकर पिछले दो दशक से बाबुपुर से एक सौ आठ फीट लंबा कांवर लेकर वे लोग निकल रहे हैं.

कांवर के साथ बाबा बासुकीनाथ धाम मंदिर पहुंचने में सामान्यतया पांच दिन लगते हैं और वहां पहुंचने के बाद पूर्णिमा के दिन शिविलंग पर जलाभिषेक करते हैं. वर्षों से बरारी स्थित सीढ़ी घाट से उत्तरवाहिनी गंगा जल का उठाव कर अपनी कांवर यात्रा को शुरू करते हैं. कांवर यात्रा की सफलता को लेकर कांवरियों की ओर से कांवर उठाने के बाद बाबा वृद्धेश्वरनाथधाम मंदिर में बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते हैं. कांवर यात्रा में शामिल संत राजकुमार ने बताया कि यह कांवर यात्रा सामाजिक विद्वेष को मिटा देता है और गांव के सभी समाज के लोग ऊंच-नीच, छोटा-बड़ा का भेदभाव मिटाकर एक साथ बाबा बोलेनाथ का जयकारा लगाते हुए चलते हैं.

कांवरिया मीना देवी ने बताया कि बाबा बासुकीनाथधाम मंदिर में फौजदारी सुनवाई के लिए हरेक साल बाबा का दरबार जाती है और भूलवश की गई गलती की माफी मांगती है. एक सौ आठ फीट लंबे कांवर को काफी आकर्षक ढंग से सजाया संवारा गया है. देवी-देवताओं और पशु-पक्षियों के कलाकृतियों के साथ कंधा देने वाले स्थान को चिन्हित कर गद्दानुमा बनाया गया है ताकि कांवरियों को कांवर उठाने में ज्यादा परेशानी न हो. तीन सौ लोगों के कांवरियों का जत्था है,जो बाबा भोलेनाथ के जयकारों और उद्घोषों के साथ शामिल लोगों में उत्साह और ऊर्जा भरने का काम कर रहे हैं.

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First published: February 5, 2020, 12:55 PM IST
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