लाइव टीवी

अपने ही घर में उपेक्षित हुई मंजूषा पेंटिंग, स्टेशन की दीवारों से हटाकर की जा रही मिथिला पेंटिंग
Bhagalpur News in Hindi

Rahul Kumar Thakur | News18 Bihar
Updated: February 3, 2020, 12:11 PM IST
अपने ही घर में उपेक्षित हुई मंजूषा पेंटिंग, स्टेशन की दीवारों से हटाकर की जा रही मिथिला पेंटिंग
भागलपुर स्टेशन पर खड़ी ट्रेन की बोगी पर की गई पेंटिंग

अंग क्षेत्र की लोकगाथा बिहुला-विषहरी पर आधारित पहचान मानी जाने वाली मंजूषा पेंटिंग को विश्व धरोहर के रूप में शामिल करने के लिए यूनेस्को भेजा गया है, साथ ही जीआई टैग के लिए भी कलाकारों की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है

  • Share this:
भागलपुर. लोकगाथा बिहुला विषहरी पर आधारित मंजूषा पेंटिंग (Manjusha Painting) भागलपुर (Bhagalpur) समेत अंग क्षेत्र की पहचान है और आज मंजूषा पेंटिंग को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. बावजूद इसके मंजूषा आज अपने ही घर भागलपुर में उपेक्षित है. भागलपुर रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यीकरण के तहत चल रहे कार्य में स्टेशन पर पहले से बनाया गया मंजूषा पेंटिंग पर वाइट वॉश कर उस स्थान पर मिथिला पेंटिंग का निर्माण किया जा रहा है जिससे स्थानी मंजूषा के कलाकारों में रोष देखा जा रहा है.

ट्रेन की बोगियों में भी हो रहा पेंटिंग का काम

भागलपुर रेलवे स्टेशन इस्टर्न रेलवे के मालदा रेल डिवीजन का सबसे अधिक राजस्व देने वाला स्टेशन है. तीन दर्जन से अधिक जोड़ी लोकल और लंबी दूरी के ट्रेनों का न केवल परिचालन होता है बल्कि हजारों की संख्या में यात्री स्टेशन पर उतरते हैं, यही कारण है कि स्थानीय मंजूषा कलाकारों की पहल पर कुछ माह पहले न केवल स्टेशन के दीवालों बल्कि विक्रमशिला एक्सप्रेस जैसे ट्रेनों के बोगी पर मंजूषा पेंटिंग उकेरी गई थी, स्टेशन को मंजूषा पेंटिंग से सजाया संवारा गया था. आज एक बार फिर भागलपुर रेलवे स्टेशन को सजाया संवारा जा रहा है, लेकिन इस बार मंजूषा पेंटिंग नहीं बल्कि मिथिला पेंटिंग की जा रही है.

उपेक्षा से नाराज हैं लोग

मंजूषा पेंटिग के लिए राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित उलूपी झा ने रेल प्रशासन की ओर से अंग क्षेत्र की पहचान मंजूषा को इस तरह दरकिनार किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि मंजूषा पेंटिंग आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है बावजूद इस तरह का कदम उठाया जाना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग का विरोध नहीं कर रही हैं बल्कि मंजूषा को भी समुचित स्थान मिले ऐसा वो चाहती हैं और इसके लिए डीआरएम से लेकर रेलवे के अधिकारियों से पत्राचार करने की बात दोहरायी.

रेलवे की मंशा पर सवाल

यूनेस्को के लिए भेजा मंजूषा पेंटिग के लिए राज्य पुरस्कार से सम्मानित मनोज पंडित ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि एक ओर मंजूषा पेंटिंग को यूनेस्को की ओर से जआई टैग के लिए कोशिश की जा रही है दूसरी ओर रेलवे प्रशासन की इस प्रकार का रवैया अंगवासियों को आहत करने वाली है. उन्होंने रेलवे की दीवालों पर मंजूषा पेंटिंग को मिटाकर उसपर मिथिला और मधुबनी पेंटिंग किये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की है. युवा मंजूषा कलाकार अर्चना कुमारी ने डिवीजन में सबसे अधिक राजस्व दिये जाने के बावजूद मंजूषा के उपेक्षा पर सवाल खड़ा किया है.अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस मामले में स्थानीय रेलवे के अधिकारी कुछ भी कहने से साफ बच रहे हैं. छह फरवरी को इस्टर्न रेलवे हावड़ा के महाप्रबंधक का स्टेशन पर निरीक्षण कार्यक्रम है इसके फलस्वरूप मंजूषा कलाकारों ने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए स्टेशन को मंजूषा पेंटिंग से नये सिरे से आच्छादित करने की मांग को लेकर गोलबंदी शुरू कर दी है.

ये भी पढ़ें- बीजेपी-जेडीयू का विपक्ष पर तंज, CAA-NRC पर अब क्यों बैकफुट पर आईं विरोध करने वाली पार्टियां?

ये भी पढ़ें- बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा आज से, जूता-मोजा पहनने पर रोक

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भागलपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 3, 2020, 12:03 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर