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भागलपुर के डॉ दिलीप कुमार सिंह को पद्मश्री: देश सेवा के लिए छोड़ दी अमेरिका की नौकरी, ढिबरी की रोशनी में करते थे गरीबों का इलाज

भागलपुर के डॉ दिलीप कुमार सिंह को पद्श्री सम्मान.
भागलपुर के डॉ दिलीप कुमार सिंह को पद्श्री सम्मान.

Padma Shree to Dr Dilip Kumar Singh: पढ़ाई खत्म करने के बाद दिलीप कुमार सिंह अमेरिका गए. वहां नौकरी भी की, लेकिन उनका मन नहीं लगा. देश की सेवा करने के जज्बे ने उन्हें वहां से लौटने के लिए बाध्य कर दिया.

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भागलपुर. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा पद्म सम्मान पाने वाले विभूतियों के नामों की घोषणा की गई. इनमें पीरपैंती प्रखंड के डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह को समाज एवं चिकित्सीय सेवा में उत्कृष्ठ कार्य करने के लिए पद्मश्री (Padma Shree to Dr Dilip Kumar Singh ) से नवाजा जाएगा. आईएमए भागलपुर के गॉड फादर माने जाने वाले दिलीप कुमार सिंह ने गरीब और नि:सहायों  को जीवनदान देने के  लिए चिकित्सकीय पेशा को अपनाया था. 92 वर्ष के हो चुके  डॉ दिलीप कुमार सिंह ने डॉक्टरी पास करने के बाद पिछले 68 सालों से अनगिनत  गरीबों और लाचार लोगों का मुफ्त और मामूली पैसा लेकर इलाज किया है. डॉ दिलीप सिंह को पद्म भूषण मिलने की जानकारी मिलते ही सिल्क सिटी के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

डॉ दिलीप कुमार सिंह का जन्म बांका जिला में  26 जून 1926 को हुआ था. डॉ दिलीप सिंह एक फिजिशियन डॉ थे. 1952 में उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई  पूरी की थी. उसके बाद  डीटीएम एंड एच इंग्लैंड से किया. पढ़ाई खत्म करने के बाद वह अमेरिका भी गए. वहां नौकरी भी की, लेकिन उनका मन नहीं लगा. देश की सेवा करने के जज्बे ने उन्हें वहां से लौटने के लिए बाध्य कर दिया.





इसके बाद वह सीधे अपने गांव पीरपैैंती लौटे और गरीबों का इलाज करना शुरू कर दिया. जिस दौर में उन्होंने इलाज करना शुरू किया था, उस समय छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई चरम पर थी. पीरपैैंती में न सड़क थी, न बिजली थी और न ही टेलीफोन की सेवा. जिस किसी गांव से मरीज की सूचना आती थी तो वे उस गांव में जाकर इलाज करते थे. यदि रात हो गई तो ढिबरी जलाकर इलाज करते थे.
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