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बिहारः एक कर्मचारी रिटायर होगा और अस्पताल में थम जाएगा ये काम, 20 जिलों को हो सकती है समस्या

भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 1 फरवरी से पोस्टमॉर्टम का काम थम जाएगा.
भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 1 फरवरी से पोस्टमॉर्टम का काम थम जाएगा.

बिहार के भागलपुर में स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) में एक कर्मचारी के रिटायर होने की वजह से शवों का पोस्टमॉर्टम बंद होने की आई नौबत.

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भागलपुर. बिहार के पूर्वी इलाके का सबसे बड़ा अस्पताल है भागलपुर (Bhagalpur) का जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH). यहां अगले महीने यानी 31 जनवरी के बाद शवों के पोस्टमॉर्टम (Postmortem) का काम थम जाएगा, क्योंकि अस्पताल का एक कर्मचारी रिटायर हो रहा है, जिसके ऊपर इसकी जिम्मेदारी थी. जेएलएनएमसीएच में पोस्टमॉर्टम बंद होने से भागलपुर समेत प्रदेश के पूर्वी इलाके (East Bihar) के करीब 20 जिलों पर इसका असर पड़ेगा. वहीं, झारखंड (Jharkhand) के सीमावर्ती जिलों के शवों का भी पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाएगा. इस अस्पताल में सिर्फ पोस्टमॉर्टम ही नहीं, बल्कि शवों की फॉरेंसिक जांच भी होती है. यह काम भी एक फरवरी से नहीं हो पाएगा.

कॉलेज ने गृह विभाग को लिखा पत्र
जेएलएनएमसीएच के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी डिपार्टमेंट में रोजाना चार से पांच शवों का पोस्टमॉर्टम होता है. भागलपुर समेत पूर्वी बिहार, कोशी और झारखंड के समीपवर्ती 20 जिलों के आपराधिक, एक्सीडेंटल और बर्न केस के मरीज इस अस्पताल में आते हैं. इलाज के दौरान मौत होने पर शवों का पोस्टमॉर्टम यहीं होता है. इसके अलावा शवों की फॉरेंसिक एवं टॉक्सिक मामलों की जांच भी यहीं होती है. इन सबकी जिम्मेवारी है एकमात्र पोस्टमॉर्टमकर्मी मानिकचंद मल्लिक के ऊपर. 1980 में अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के रूप में सेवा शुरू करने वाले मानिकचंद इसी माह 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं. इनका काम शवों के चीर-फाड़ के साथ विसरा एकत्र करना है. उनके रिटायर होने के बाद इस काम को करने के लिए अस्पताल में और कोई कर्मचारी नहीं है. लिहाजा, पोस्टमॉर्टम का काम एक फरवरी से बंद हो जाएगा. इसको लेकर कॉलेज प्राचार्य ने गृह विभाग को पत्र भी लिखा है.

पत्र के बाद भी कार्रवाई नहीं
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप लाल समेत कॉलेज के प्राचार्य ने जिला प्रशासन के साथ-साथ बिहार सरकार के गृह और स्वास्थ्य विभाग को इस बाबत पत्र लिखकर सूचना दी है. साथ ही इस पद पर कर्मचारी की बहाली को लेकर कई पत्र लिखे हैं. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. बहाली से पूर्व संविदा के आधार पर ही मानिकचंद की कार्यावधि बढ़ाने की मांग भी की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मामले को लेकर स्थानीय विधायक अजीत शर्मा ने भी सरकार से मानिकचंद के कार्यावधि विस्तार की मांग की है. प्रदेश के भवन निर्माण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने मामले पर समुचित पहल करने का आश्वासन दिया है.



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