'विधायक के पास रात में भेजा जाता था मुझे', जानें क्या है आरा सेक्सकांड
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'विधायक के पास रात में भेजा जाता था मुझे', जानें क्या है आरा सेक्सकांड
कांगड़ा में नाबालिग से रेप. (सांकेतिक तस्वीर)

आरजेडी के विधायक (RJD MLA) का नाम तब सामने आया था, जब एक नाबालिग पीड़िता (Mnor Victim) ने विधायक की संलिप्तता के बारे में बताया था.

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  • Last Updated: June 10, 2020, 12:49 PM IST
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आरा. भोजपुर जिले के संदेश से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक अरुण यादव (RJD MLA Arun Yadav) पर शिकंजा कसता जा रहा है. अब पटना स्थित उनकी संपत्ति कुर्क करने की तैयारी है. बता दें कि नाबालिग से रेप कांड में फंसे विधायक पर पॉक्सो (POCSO) के तहत 19 जुलाई 2019 को आरा टाउन थाना में केस दर्ज हुआ था. इसमें दो नामजद आरोपी बनाए गए थे. दरअसल, जुलाई 2019 में आरा की रहने वाली पीड़ित लड़की के बयान के बाद से भोजपुर पुलिस ने पटना में चल रहे बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया था. इसमें राज्य में चल रहे सेक्स रैकेट में राजनेताओं की मिलीभगत जाहिर हुई थी. इसके तार पटना से आरा तक जुड़े हुए थे.

नाबालिग लड़की का आरोप
इस केस में आरजेडी के विधायक (RJD MLA) का नाम तब सामने आया था, जब एक नाबालिग पीड़िता ने विधायक की संलिप्तता के बारे में बताया था. उस वक्‍त आरा पुलिस की चांज में ये बात सामने आई कि इस सेक्स रैकेट के तार आरजेडी एमएलए अरुण यादव से भी जुड़े थे.

यह है पूरा मामला
दरअसल, बीते 18 जुलाई 2019 को नाबालिग पीड़ित लड़की ने 164 के तहत दर्ज कराए गए अपने बयान में कहा था कि लड़कियों को आरा की एक इंजीनियर के आवास पर और होटलों में ले जाया जाता था. इसके बाद 6 सितंबर 2019 को नाबालिग पीड़ित ने 164 के दोबारा बयान में विधायक अरुण यादव का नाम लिया था और सेक्स रैकेट में उनकी संलिप्तता उजागर की थी.



'रात में बुलाते थे विधायक'
नाबालिग लड़की ने आरोप लगाते हुए कहा था कि राजद विधायक रात में उसे अपने पास बुलाते थे. इसके बाद से ही विधायक भूमिगत हो गए थे. फिर 16 सितंबर को अनुसंधानकर्ता के आवेदन पर आरा स्थित पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी विधायक अरुण यादव के खिलाफ इश्तहार वारंट जारी करने का आदेश दिया था.

मामले से जुड़े चार हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में आरा टाउन थाना की पुलिस सेक्स रैकेट की संचालिका अनीता, दलाल संजीत और इंजीनियर अमरेश के अलावा सेक्स रैकेट के संचालक संजय यादव उर्फ जीजा जेल भेजे जा चुके हैं. सीआईडी भी अलग से केस की तफ्तीश कर रही है. बता दें कि अनुसंधान में विधायक समेत चार का नाम आया था, इसमें केवल विधायक अरुण यादव ही हैं जो 9 महीने से फरार चल रहे हैं.

कुर्क होगी विधायक की पटना की संपत्ति
बहरहाल इस मामले में पुलिस की दबिश बढ़ी है और भोजपुर SP सुशील कुमार के मुताबिक जिला अवर निबंधक पटना, फुलवारीशरीफ और दानापुर से जुड़े विधायक की अचल संपत्ति से संबंधित ब्योरा प्राप्त किया गया है. दस्तावेज संख्या 529 से पाटलिपुत्र कॉलोनी पटना में करीब साढ़े तीन कट्ठा जमीन का पता चला है. यह जमीन विधायक के नाम पर है, इसका सरकारी मूल्य करीब तीन करोड़ 71 लाख रुपये आंका गया है.

पटना स्थित जमीन भी बहुत जल्द कुर्क होगी. कार्रवाई के लिए पटना डीएम के पास अंचल संपत्ति से संबंधित प्रतिवेदन समर्पित किया जा चुका है. बता दें कि भोजपुर जिले के आरा अनुमंडल के अगिआंव प्रखंड में कुल 15 एकड़ जमीन को कुर्क किया जा चुका है. पांच मौजा स्थित 19 प्लॉट पर जमीन जब्त करने संबंधी बोर्ड लगाया जा चुका है. अभी तक सरकारी दर के अनुसार करीब पांच करोड़ की अचल संपत्ति का पता चला है बाजार मूल्य इससे ढाई गुना अधिक है.

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