नवजात की किलकारी से गूंजा भोजपुर का ये क्वारेंटिन सेंटर, सबने दी बधाइयां
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नवजात की किलकारी से गूंजा भोजपुर का ये क्वारेंटिन सेंटर, सबने दी बधाइयां
कि शुरुआत में बच्चों को संभालना मुश्किल हो सकता है, लेकिन बच्चे की परेशानी कम करने में मदद कर सकते हैं.

महिला का नाम खुशबू कुमारी है जो सिकरिया गांव (Sikaria Village) निवासी सचिन कुमार की पत्नी है.

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आरा. बिहार के भोजपुर (Bhojpur) जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां स्थित एक क्वारेंटिन सेंटर (Quarantine Center) शुक्रवार को नवजात की किलकारी से गूंज उठा. दरअसल, शुक्रवार की शाम को जिले के गड़हनी के बराप स्थित जन सहकारी कॉलेज में बनाये गए क्वारेंटिन सेंटर में एक महिला ने नवजात को जन्म (Birth) दिया. नवजात का जन्म होते ही पूरे क्वारेंटिन सेंटर के लोगों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. बच्चे को जन्म देने वाली महिला गड़हनी के बड़ौरा पंचायत के सिकरिया गांव की रहने वाली बताई जाती है. वहीं, क्वारेंटिन सेंटर में हुए सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ बताए जा रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, महिला का नाम खुशबू कुमारी है जो सिकरिया गांव निवासी सचिन कुमार की पत्नी है. महिला का पति उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में काम करता था. वह लॉकडाउन के दौरान गाजियाबाद में ही फंस गया था. सचिन कुमार पिछले 20 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिए अपनी पत्नी को साथ लेकर गाजियाबाद से आरा पहुंचा था. इसके बाद वह गड़हनी पहुंचा. गड़हनी आने के बाद पति-पत्नी दोनों को क्वारेंटाइन किया गया. तब से दोनों क्वारेंटिन सेंटर में ही हैं.

पूरे क्वारेंटिन सेंटर में खुशी की का माहौल है
क्वारेंटिन सेंटर प्रभारी वरीय शिक्षक विजय केशरी ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद पूरे क्वारेंटिन सेंटर में खुशी का माहौल है. वहीं, सेंटर में मौजूद लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पति-पत्नी दोनों को बधाइयां दीं. कहा जा रहा है कि क्वारेंटिन सेंटर पर नवजात का जन्म होने के साथ ही उसका कोरोना टेस्ट कराने की चर्चा भी जोरों पर थी.



दामाद सरीखा सम्मान देते हुए धोती-साड़ी देकर रवाना किया


उधर, मधुबनी जिले के सरिसब पाही पश्चिमी पंचायत का एक क्वारंटाइन सेंटर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस सेंटर में रह रहे 55 लोगों को क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद उनके घर रवाना किया गया. इस मौके पर पंचायत के मुखिया रामबहादुर चौधरी ने प्रवासी मजदूरों को जिस अंदाज में विदाई दी, वह न सिर्फ मिथिला की पहचान का प्रतीक, बल्कि एक नजीर भी है. मुखिया ने घर लौट रहे प्रवासियों को मेहमान या कह लें कि दामाद सरीखा सम्मान देते हुए धोती-साड़ी देकर रवाना किया. ऐसा सम्मान देख प्रवासियों की आंखें भर आईं.

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First published: May 30, 2020, 10:05 AM IST
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