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वार्ड सदस्य ने खोली करोड़ों के करप्शन की पोल तो कर दिया गया 'तड़ीपार', पढ़ें क्या है पूरा मामला
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News18 Bihar
Updated: January 25, 2020, 1:55 PM IST
वार्ड सदस्य ने खोली करोड़ों के करप्शन की पोल तो कर दिया गया 'तड़ीपार', पढ़ें क्या है पूरा मामला
भ्रष्टाचार की पोल खोलने के बाद शहर में रिक्शा चलाने को मजबूर वार्ड सदस्य विनोद राम.

आरोप है कि आरा सदर प्रखंड का पिरौटा पंचायत में मुख्यमंत्री नल-जल योजना सहित कई योजनाएं कार्यान्वित हुईं, लेकिन सिर्फ कागजों पर. धरातल पर कोई काम नहीं हुआ.

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आरा. पिरौटा पंचायत में मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना नल-जल योजना में करोड़ों का घोटाला सामने आया है. आरोप है कि पंचायत के मुखिया, पंचायत सचिव और पदाधिकारियों की मिलीभगत से इस योजना के लिए करोड़ों रुपये निकाल लिए गए,  लेकिन धरातल पर काम नहीं के बराबर हुआ. वहीं जब इस योजना में हुए पैसों के बंदरबांट का खुलासा पंचायत के एक वार्ड सदस्य ने किया तो उसे दबंग मुखिया ने गांव से बाहर रहने को मजबूर कर दिया. पीड़ित वार्ड सदस्य रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का पेट भर रहा है.

आरोप है कि आरा सदर प्रखंड का पिरौटा पंचायत में मुख्यमंत्री नल-जल योजना सहित कई योजनाएं कार्यान्वित हुईं, लेकिन सिर्फ कागजों पर. धरातल पर कोई काम नहीं हुआ. लाभ से वंचित पंचायत के ग्रामीणों ने आवाज उठाई और इस फेहरिस्त में सबसे आगे उस पंचायत का एक दलित वार्ड सदस्य विनोद राम आया जिसने पंचायत में मुखिया, पंचायत सचिव और आरा प्रखंड कार्यालय के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की मिलीभगत से दो करोड़ से ज्यादा रुपयों की बंदरबाट की जानकारी सीनियर पदाधिकारियों को दे दी.

पीड़ित वार्ड सदस्य के मुताबिक वर्तमान मुखिया के पति को ये बात नागवार गुजरी जिसके बाद उसने वार्ड सदस्य को अलग-अलग तरीकों से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. हालात ऐसे बन गए कि उसको गांव छोड़ना पड़ा. जिसके बाद से ही वो आरा में रिक्शा चलाकर अपने और अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है.

गांव से तडीपार वार्ड सदस्य ने आरोप लगाया है कि उसे पिरौटा पंचायत के मुखिया के पति विजय यादव ने अक्सर अपने लोगों के साथ योजनाओं के पैसों की हेराफेरी के लिए बैंक में अकाउंट खोलने के लिए मजबूर किया,  लेकिन जब उसने मुखिया पति की बात नहीं मानी तो दबंग मुखिया पति ने उसे गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया.

मुखिया पति की दबंगियत से परेशान वार्ड सदस्य ने पंचायत में हो रही गड़बड़ी की शिकायत पटना प्रमंडल के आयुक्त से लेकर विभाग के प्रधान सचिव तक को दी लेकिन पटना से निर्देश मिलने के बाद भोजपुर जिला प्रशासन ने जांच के नाम पर खानापूर्ति कर अपनी इतिश्री कर ली.

करोड़ों की सरकारी राशि की गबन की जांच प्राधिकार तक गई जिसके बाद जांच टीम का गठन भी किया गया. पंचायती राज पदाधिकारी के नेतृत्व में एक जांच टीम पिरौटा पंचायत के पिरौटा गांव के वार्ड संख्या 7 भी पहुंची और नल-जल योजना में भारी गड़बड़ियां भी पाई, लेकिन जांच टीम की रिपोर्ट हवा में गुम हो गई. हालात ये हैं कि जांच होने के एक महीने से ज्यादा बीत जाने के बावजूद भी न तो दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई न ही पंचायत के किसी भी घर मे नल का जल पहुंचा.

वार्ड सदस्य द्वारा किए गए खुलासे के आधार पर अपीलीय प्राधिकार में सुनवाई.
आरोप है कि पिरौटा पंचायत में पिरौटा, यादवपुर, नागोपुर, पिपरा, चौमुखा, जोगवलिया, तेतरिया, घेघटा और मठिया सहित कुल 9 गांव हैं जहां के 14 वार्डों में नल-जल योजना में भारी अनियमितता हुई और योजना को कागजों पर पूरा दिखा सरकारी राशि भी निकाल ली गई, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी समूचे पंचायत के लोगों की प्यास अबतक नही बुझ पाई है.

पिरौटा के ग्रामीणों की मानें तो नल-जल योजना के लिए अधिकतर वार्डों में खोदा गया बोरिंग भी मानक के अनुसार नहीं है. बोरिंग होने के तकरीबन एक साल बीत जाने के बावजूद वहां मोटर तक नही लगा. वहीं इन वार्डों में कुछ दूर तक पाइप तो बिछाया गया, लेकिन वो भी सिर्फ दिखावे के लिए. कई घरों में पाइप पहुंचा भी तो आजतक उसमें नल नहीं लग पाया. निर्धारित मानक के मुताबिक पाइप को जमीन में 3 फ़ीट की जगह 6 से 8 इंच भीतर ही बिछाया गया वो भी गंदे नाले से गुजार कर.

जब न्यूज़ 18 ने इस अनियमितता और सरकारी राशि के बंदरबांट से जुड़े सवाल भोजपुर डीडीसी अंशुल अग्रवाल से किया तो उन्होंने पहले हुई जांच की जानकारी न होने की बात कहते हुए मामले की दोबारा जांच करा लेने की बात कही. अब सवाल ये है कि कैसे तमाम मशीनरी सक्रिय होने के बावजूद सरकारी योजनाओं में करोड़ों की बंदरबांट हो गई. सवाल ये भी है कि दलितों के लिए तमाम कानून होने के बावजूद कैसे एक दलित जनप्रतिनिधि अपना गांव छोड़ने पर मजबूर हो गया.

रिपोर्ट- हिमांशु

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First published: January 25, 2020, 1:52 PM IST
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