बिहार: गंगा में समा गई 800 एकड़ जमीन, नदी के कटाव से लोगों का जीवन बेहाल, करेंगे वोट बहिष्कार
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बिहार: गंगा में समा गई 800 एकड़ जमीन, नदी के कटाव से लोगों का जीवन बेहाल, करेंगे वोट बहिष्कार
कटाव से परेशान लोगों ने वोट बहिष्कार का किया ऐलान.

गंगा नदी (Ganga River) के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने के कारण सोहरा पंचायत के लगभग आधा दर्जन गांव में बाढ़ संकट का ख़तरा मंडरा रहा है. पानी की तेज धार के कारण जमीन का लगातार कटाव हो रहा है.

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  • Last Updated: August 22, 2020, 2:31 PM IST
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रिपोर्ट--अभिनय प्रकाश
आरा. भोजपुर जिले में बड़हरा प्रखंड के सोहरा पंचायत में गंगा नदी (Ganga River) के जलस्तर में वृद्धि होने के कारण जमीन का कटाव शुरू हो गया है. पिछले कुछ सालों में लगभग 800 एकड़ जमीन गंगा में समा गए. 69 सालों से इस गांव के लोग बाढ़ (Flood) का दंश झेल रहे हैं. इसके बावजूद भी सरकार की ओर से एहतियातन कोई भी कदम नहीं उठाया गया है. गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बाद पटना सहित आसपास के कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. लेकिन तैयारियां वैसी नहीं हो पाई हैं, जैसी होनी चाहिए. आपदा विभाग की ओर से राहत एवं बचाव के लिए कोई भी ठोस उपाए अभी तक नहीं किये गए हैं. जिसके कारण लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है.अब लोगों ने मन बना लिया है कि इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी भागीदारी नही देंगे और वोट का बहिष्कार (Boycott of vote) करेंगे.

दरअसल गंगा नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने के कारण सोहरा पंचायत के लगभग आधा दर्जन गांव में बाढ़ संकट का ख़तरा मंडरा रहा है. पानी के कारण जमीन का लगातार कटाव हो रहा है. पानी ऊपर की ओर छड़ रहा है. हेतमपुर, सोहरा, त्रिभुआनी, महुली, केवटिया और पदमिनिया गांव के लोग डर-डर के जी रहे हैं. सरकारी व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उनकी काफी शिकायतें हैं. लगभग 13000 की आबादी वाले इस इलाके के लोग इसबार के बिहार विधयनसभा चुनाव में सरकार को सबक सीखाने का मूड बना रहे हैं.

भोजपुर जिले में सोहरा पंचायत के हेतमपुर गांव में लगभग 2500 से 3000 लोग रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दशकों से लगभग 800 एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा नदी की आगोश में समा गई. कई पीढ़ियों ने बाढ़ के संकट को देखा है. न जाने कितने खेत गंगा में विलीन हो गए. कई लोगों ने इसके दंश को झेला है. पिछले सालों में आये प्रलयकारी बाढ़ ने तो ग्रामीणों की जिंदगी बर्बाद कर दी.
बड़हरा प्रखंड में बलवा पंचायत के अचरज राय के टोला गांव में मंगलवार की सुबह से ही गंगा का पानी बढ़ रहा है. बाढ़ के पानी ने भी संकटावर शुरू कर दिया है. इस गांव के नजदीक 1 घंटे में लगभग 10 कट्ठा से ज्यादा जमीन गंगा में विलीन हो चुका है. कटाव से 40 गज की दूरी पर पचरा जी रायका टोला गांव स्थित है, जहां बाढ़ की विभीषिका से लोग दहशत में हैं. इस भीषण कटाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई उपाय नहीं किया गया है.



हेतमपुर गांव में रहने वाले 55 साल के पंडित रमाकांत पांडेय बताते हैं कि हेतमपुर गांव में हर साल बाढ़ आता है. सालों से यह गांव बाढ़ का शिकार होता है. गांव की उपजाऊ जमीन और फसल नदी में समा जाते हैं. हेतमपुर की जनता बहुत कठिनाई में है. पिछले 69 साल से हर बार गांव में कटाव होता आ रहा है. यहां के ग्रामीणों को रहने के लिए घर की भी बहुत दिक्कत है. जनप्रतिनिधियों की ओर से मदद नहीं मिलने के इसबार जनता ने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. जो लोग हमें रहने के लिए घर नहीं दे सकते, ऐसे लोगों को वोट देने का क्या फ़ायदा है.

पूर्व मुखिया विजय प्रकाश सिंह ने बताया कि कई सालों से गांव में कटाव हो रहा है. सोहरा पंचायत के कई गांव गंगा नदी में समा गए. कटाव को रोकने के लिए जो उपाए किये गए हैं, वो कारगर नहीं हैं. इस इलाके में 13000 लोगों की आबादी है. लेकिन इसके बावजूद भी सरकार का ध्यान इन ग्रामीण इलाकों की और आकृष्ट नहीं होता है. इसबार मैं भी अपनी जनता के साथ हूँ.

गांव के एक स्टूडेंट मनीष पांडेय ने बताया कि गांव के लोग काफी मुश्किलों से गुजर रहे हैं. कई पीढ़ियों से लोग इस समस्या को देखते आ रहे हैं. चुनाव के समय स्थानीय नेता आते हैं, चुनाव जीतकर विधायक और सांसद बन जाते हैं लेकिन बाद में उन्हें जनता की बिलकुल भी फिक्र नहीं होती है. हेतमपुर सोहरा गांव के लोगों के साथ अनदेखी की जाती है. मनीष ने आगे बताया कि इसबार के चुनाव में गांव के लोगों ने वोट बहिष्कार का मूड बना लिया है. जो जनप्रतिनिधि जनता की नहीं सुनते, इसबार जनता उनकी नहीं सुनेगी.

बिजेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीण घर से बेघर हो रहे हैं. सरकार की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है. जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण कोई सुनवाई नहीं होती है. गांव के उपजाऊ खेत नदी में समा गए. मिट्टी की कटाव को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी पहल नहीं की जा रही है. इसबार के चुनाव में हमलोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेंगे. दो बार-तीन बार हमने घर बनाया लेकिन वो हर बार काल के गाल में समा जाता है.

60 वर्षीय देव कुमार सिंह बताते हैं कि बहुत हद तक जमीन का कटाव शुरू हो गया है. प्रशासन ने अपना आंख बंद कर लिया है. कोई भी विधायक या सांसद हमारी सुध लेने वाले नहीं है. इसबार के विधानसभा चुनाव में पूरा गांव वोट का बहिष्कार करेगा.
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