लोकसभा चुनाव 2019: पिछली हार का बदला लेने मैदान में 6 दिग्गज

आठ सीटों में से छह सीटों पर पुराने योद्धा ही चुनाव लड़ रहे हैं. एक तरफ वो उम्मीदवार हैं जो जीत के रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ वो उम्मीदवार है जो 2014 की चुनावी हार का बदला लेने के लिए फिर से मैदान में उतरे हैं.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 17, 2019, 1:21 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: पिछली हार का बदला लेने मैदान में 6 दिग्गज
फाइल फोटो
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 17, 2019, 1:21 PM IST
बिहार में सातवें चरण के तहत 8 संसदीय सीटों- पटना साहिब, पाटलिपुत्र, नालंदा, बक्सर, जहानाबाद, आरा, सासाराम और काराकाट पर 19 मई को वोट डाले जाएंगे. इनमें विरासत की जंग जहां दो बेटियां चुनावी मैदान में हैं. पाटलिपुत्र से लालू याद की बड़ी बेटी मीसा भारती और भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार साराराम से चुनाव लड़ रही हैं, वहीं एनडीए सरकार के चार मंत्रियों की किस्मत दांव पर है.


इस चरण की आठ सीटों में से छह सीटों पर पुराने योद्धा ही चुनाव लड़ रहे हैं. एक तरफ वो उम्मीदवार हैं जो जीत के रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ वो उम्मीदवार है जो 2014 की चुनावी हार का बदला लेने के लिए फिर से मैदान में उतरे हैं.





सबसे खास ये है कि इन 8 में से सिर्फ नालंदा और पटना साहिब ऐसी सीटें हैं जिस पर दोनों ही गठबंधनों से उम्मीदवार पहली बार आपस में टकरा रहे हैं. आइये हम सीटवार एक नजर डालते हैं कि कहां क्या समीकरण है.



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सासाराम

इस सीट से पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम 8 बार सांसद रहे. इस कारण यह बिहार की वीआईपी सीटों में शामिल है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सासाराम से एक बार फिर बाबू जगजीवन राम की बेटी कांग्रेस की मीरा कुमार और बीजेपी के छेदी पासवान एक दूसरे के आमने-सामने है.  यूपीए सरकार के कार्यकाल में लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी संभाल चुकी मीरा कुमार को 2014 में बीजेपी के छेदी पासवान से हार का सामना करना पड़ा था.


पाटलिपुत्र

यहां से आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के रामकृपाल यादव ने मीसा भारती को लगभग 40 हजार वोटों से हराया था. मीसा के लिए राहत की बात यह है कि पिछले चुनाव में 51 हजार से ज्यादा वोट हासिल करने वाले माले ने इस बार अपना उम्मीदवार नहीं उतार कर मीसा को समर्थन का ऐलान कर दिया है.




बक्सर

यहां से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और आरजेडी के दिग्गज नेता जगदानंद सिंह आमने-सामने हैं. चौबे 2014 की तरह चुनावी जीत हासिल करना चाहते हैं वहीं आरजेडी के दिग्गज नेता और लालू यादव के करीबी जगदानंद सिंह 2014 की चुनावी हार का बदला लेने के लिए मैदान में उतरे हैं. इस सीट पर यादव और गैर यादव वोटरों के बीच ध्रुवीकरण की राजनीति होती रही.


आरा

इस सीट पर मोदी लहर में 2014 में पहली बार कमल खिला था.  केन्द्र सरकार में गृह सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके आरके सिंह ने बीजेपी के टिकट पर यहां से जीत हासिल की थी. बाद में वे मंत्री भी बनाए गए.  बीजेपी ने एक बार फिर से उन्हीं पर भरोसा करते हुए लोकसभा उम्मीदवार बनाया है. दूसरी तरफ आरजेडी के समर्थन से माले उम्मीदवार राजू यादव 2014 की हार का बदला लेने के लिए फिर से चुनावी मैदान में हैं.



काराकाट

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के घटक दल के तौर पर आरएलेसपी के उपेंद्र कुशवाहा यहां से चुनाव जीते थे.  इस बार कुशवाहा महागठबंधन के घटक दल के तौर पर बिहार की दो लोकसभा सीटों– काराकाट और उजियारपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं पिछली बार उपेंद्र कुशवाहा से चुनाव हारने वाले जेडीयू के महाबली सिंह इस बार बदला लेने के लिए फिर से मैदान में हैं.




जहानाबाद

इस बार भी यहां से पिछली बार रालोसपा से चुनाव जीते अरूण कुमार रालोसपा (सेकुलर) के बैनर तले फिर से चुनावी मैदान में खड़े हैं. वहीं 2014 की हार का बदला लेने के लिए आरजेडी के सुरेन्द्र यादव भी फिर से मैदान में उतरे हैं. एनडीए उम्मीदवार के तौर पर जेडीयू से चंदेशवर चंद्रवंशी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.


नालंदा

बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ माना जाता है नालंदा. इस सीट पर 2014 में भी मोदी लहर बेअसर ही रहा था. इस बार भी यहां मुख्य मुकाबला वर्तमान जेडीयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार और मांझी की पार्टी हम के अशोक चन्द्रवंशी के बीच ही है. दोनों पहली बार एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.


पटना साहिब

शत्रुघ्न सिन्हा इस बार बीजेपी की बजाय कांग्रेस के उम्मीदवाह हैं तो बीजेपी ने इस बार अपने दिग्गज नेता और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा है. रविशंकर प्रसाद और शत्रुघ्न सिन्हा का पहला आपसी मुकाबला है.  बिहारी बाबू के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी के टिकट पर दो बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं और इस बार हैट्रिक लगाने के लिए उतरे हैं.


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