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Crime in Bihar: 17 महीने बाद भी नहीं मिला इंसाफ तो छलका शहीद के पिता का दर्द, कहा- इस्तीफा दें नीतीश

शहीद मिथिलेश शाह के पिता दशरथ शाह
शहीद मिथिलेश शाह के पिता दशरथ शाह

Crime in Bihar: छपरा में 20 अगस्त 2019 को अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ (Encounter) में एसआईटी (SIT) के सब-इंस्पेक्टर मिथिलेश शाह (Martyr Mithilesh Shah) और एक कांस्टेबल शहीद हो गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2021, 9:54 PM IST
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रिपोर्ट- अभिनय प्रकाश
आरा. बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर एक पिता का दर्द छलक उठा. दर्द क्यों ना छलके आखिर एक पिता के बेटे को सरेआम अपराधियों द्वारा गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया गया था. बेटे को शहीद हुए 17 महीने हो चुके हैं पर अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के इंतजार कर रहे पिता की आंखों के आंसू तो सूख गए पर एक शाहीद के पिता का दर्द नासूर बनकर आज भी जिंदा है. आलम यह है कि शहीद के पिता को हर बार पुलिस के चौखट से खाली हाथ ही आना पड़ता है. न्याय की आस में बैठे  पिता अब सीएम  नीतीश कुमार से नाराजगी जता रहे हैं और नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांग रहे हैं.

बता दें कि छपरा में 20 अगस्त 2019 को अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में एसआईटी के सब-इंस्पेक्टर मिथिलेश शाह व एक कांस्टेबल शहीद हो गए थे. शहादत की इस इबारत लिखने वाला एक जांबाज सब-इंस्पेक्टर मिथिलेश शाह भोजपुर जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के नागोंपुर पिरौटा गांव के निवासी थे. शहीद मिथलेश के पिता आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर पद से रिटायर्ड दशरथ शाह ने कहा कि बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर नीतीश कुमार को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.


उन्होंने कहा कि इस समय बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है. हत्या के बाद कई ऊंचे अधिकारियों से कई बार मिलने गए, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला. यहां तक कि पुलिस मुख्यालय में भी अपनी बातों को रखा, लेकिन वहां हमारे साथ दुर्व्यवहार किया गया. आम लोगों के साथ पुलिस का रवैया जैसा रहता है, वैसा ही रवैया हमलोगों के साथ भी वहां किया गया.



शहीद सब-इंस्पेक्टर के पिता ने अपने बेटे की मौत के पीछे नीतीश सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जदयू पार्टी के ही लोग हैं इसलिए सरकार कुछ नहीं कर रही. मामले में जिला परिषद चेयरमैन को अभी हाई कोर्ट से बेल भी मिली है.

गौरतलब है कि इस केस में अभी चार शूटर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. जो गिरफ्त में हैं, उनसे पुलिस पूछताछ कर रही है. उन्होंने कहा कि नए एसपी से मिलने पर भी कुछ उम्मीद की किरणें नहीं दिख रही हैं. अभी फिलहाल में हम लोग डीआईजी मनु महाराज से मिलकर आए हैं. इस बात को मनु महाराज ने चुनौती मानकर जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

उन्होंने बताया कि इस मामले में उस समय एसपी हर किशोर राय से मिलकर आए थे, लेकिन उनसे भी हमें आश्वासन ही मिला. वहीं दशरथ शाह ने अपने बेटे की मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी.  इसमें बिहार के पूर्व डीजीपी ने कहा था कि सीबीआई जांच सरकार के अधीन आती है. वहीं, एसपी हर किशोर राय ने कहा कि अगर सीबीआई जांच हुई तो हमारा हाथ कट जाएगा और हम कुछ नहीं कर पाएंगे.

शहीद के पिता का कहना है कि आज 17 महीने हो चुके हैं, अब भी सरकार और पुलिस प्रशासन के हाथ खाली हैं. आखिर कब मेरे बेटे के साजिशकर्ता का पता चलेगा, कब मेरे शहीद बेटा को न्याय मिलेगा. शहीद के पिता लाचार और बेबसी भरी आंखों में इंसाफ की उम्मीद लेकर बैठे हैं. बहरहाल देखना होगा कि कब लाचार पिता को न्याय मिलेगा या युहीं बुढ़ापे में पुलिस दफ्तरों की चक्कर काटकर दम तोड़ देंगे.

बिहार पुलिस में ईमानदारी की अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले सब इंस्पेक्टर मिथिलेश साह जब छपरा के बनियापुर थाना प्रभारी से पद ट्रांसफर हुआ था तब, वहां के ग्रामीणों ने बैंड बाजा और शहीद मिथिलेश को रथ पर बैठकर अपने नम आंखों से विदाई दी थी. उन लोगों को क्या पता था कि मिथिलेश यहां से जाएंगे तो फिर वापस लौट कर नहीं आएंगे. शहीद दारोगा मिथिलेश साह भोजपुर जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के नागोपुर पिरौटा निवासी दशरथ साह के पांच लड़कों में चौथे नम्बर पर थे. इनके पिता दशरथ साह भी आरपीएफ में सब इंस्पेक्टर से रिटायर्ड हैं.  मिथिलेश 2009 में आरपीएफ दरोगा पद से रिजाइन मारकर बिहार पुलिस दरोगा में भर्ती हुए थे.
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