Bihar Assembly Election: ... जब लालू-नीतीश की जोड़ी ने भोजपुर की सातों सीट से NDA का किया था सुपड़ा साफ

लालू प्रसाद के साथ नीतीश कुमार
लालू प्रसाद के साथ नीतीश कुमार

Bihar Assembly Election: बिहार में 2015 से 2020 के चुनाव काफी अलग हैं ऐसे में एनडीए के नेताओं को इस जिले में अच्छी वापसी करने का पूरा भरोसा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:56 PM IST
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रिपोर्ट- अभिनय प्रकाश

भोजपुर. कोरोना महामारी के बीच बिहार में चुनाव (Bihar Assembly Election) की घोषणा हो चुकी है ऐसे में भोजपुर (Bhojpur) जिले के सातों विधानसभा क्षेत्र की राजनीति भी चरम पर है. इन सीटों से कई नामी गिरामी नेता या पूर्व तथा वर्तमान विधायक अपने-अपने ताल ठोक रहे हैं. यहां प्रथम चरण में ही विधानसभा चुनाव होने वाला है, ऐसे में कई नए चहरे सामने आने की वजह से वर्तमान विधायकों की सांस अटक गयी है. सभी अपनी-अपनी गोटी लाल करने में जी जान लगा रहे हैं जबकि किसी राजनितिक पार्टी ने अभी तक सीट बंटवारे को लेकर कोई घोषणा नहीं की है. कई पूर्व विधायक, विभिन्न राजनितिक पार्टियों के वरिष्ठ नेतागण तथा पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहने वाले प्रत्याशियों का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आने जाने के भी कयास लगाये जा रहे हैं. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं भोजपुर के सात सीटों का गणित

आरा विधानसभा



बात करें भोजपुर के आरा विधानसभा की तो 2015 विधानसभा चुनाव में यहां से एनडीए (भाजपा) प्रत्याशी को हराकर महागठबंधन (आरजेडी) के मोहम्मद अनवर आलम उर्फ़ नवाज़ आलम विधायक बने थे लेकिन इस बार उनकी उम्मीदवारी खतरे में दिख रही है. चर्चा है कि भाजपा का कोई नेता इस बार आरा विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ सकता है. इसके अतिरिक्त कई दिग्गज टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय या राज्य स्तरीय राजनितिक पार्टी से भी चुनाव लड़ सकते हैं. एनडीए से चार बार के विधायक तथा बिहार विधान सभा में उपसभापति रहे अमरेन्द्र प्रताप सिंह 2015 में चुनाव हार गये थे इस बार पुनः चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं जबकि सन्देश विधानसभा से हारे हुए भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर की आरा से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है.
शाहपुर

भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाने वाला शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के राहुल तिवारी उर्फ़ मन्टू तिवारी विधायक हैं. पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय का नाम इस इलाके से चर्चा में है जबकि एनडीए से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. विशेश्वर ओझा की पत्नी शोभा देवी के नाम की चर्चा जोरों पर है. शाहपुर से शोभा देवी की गोतनी पूर्व विधायक मुन्नी देवी की दावेदारी शुरू से ही है.



जगदीशपुर

इस विधानसभा क्षेत्र से राम विशुन सिंह उर्फ़ लोहिया महागठबंधन से विधायक हैं. उन्होंने रालोसपा के संजय मेहता को हराया था. वहां से पूर्व आरजेडी विधायक दिनेश कुमार यादव उर्फ़ भाई दिनेश इस बार आरजेडी के विरुद्ध चुनाव लड़ने के मूड में हैं जबकि आरजेडी कोटे से पूर्व मंत्री श्री भगवान सिंह कुशवाहा इस बार एनडीए के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में आने को लालायित हैं.

अगिआंव (सुरक्षित)

इस विधानसभा सीट से जदयू के प्रभुनाथ राम विधायक हैं जिन्होंने भाजपा के शिवेश कुमार को पराजित किया था| इस बार भी प्रभुनाथ राम की उम्मीदवारी निश्चित दीख रही है वही भाजपा के पूर्व विधायक शिवेश कुमार काम भी उम्मीदवारी में है जबकि भाकपा माले भी पूरा जोड़ लगा रहा है|

तरारी

तरारी विधानसभा क्षेत्र से भाकपा माले के सुदामा प्रसाद ने पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय की पत्नी एलजेपी गीता पाण्डेय को हराया और विधायक बने. इस बार भी भाकपा माले ने सुदामा प्रसाद को तरारी से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है दूसरी तरफ सुनील पाण्डेय के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है. पूर्व एवं वर्तमान विधायक अपने क्षेत्रों में जमकर जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.

सन्देश विधानसभा

इस क्षेत्र से आरजेडी के अरुण कुमार ने भाजपा के पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर को हराया था. भाकपा माले के राजू यादव भी चुनाव मैदान में थे. इस बार अरुण कुमार जिन पर पर कई तरह के आरोप हैं और वो फरार हैं की पत्नी किरण देवी के चुनाव मैदान में आने की चर्चा जोरों पर है. वहीं पूर्व विधायक एवं आरजेडी प्रदेश उपाध्यक्ष रहे विजयेन्द्र यादव पार्टी छोड़ जदयू से दावेदारी ठोक रहे हैं. भाकपा माले के राजू यादव इस बार भी सन्देश से चुनाव लड़ सकते हैं.

बड़हरा

चित्तोड़ गढ़ कहे जाने वाले बड़हरा विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के सरोज यादव भाजपा नेत्री तथा पूर्व विधायक आशा देवी को हरा कर विधायक बने थे पर इस बार सरोज यादव की उम्मीदवारी पर संशय है. आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व की मानें तो सरोज यादव को टिकट मिल भी सकता है दूसरी तरफ आरजेडी कोटे से एमएलसी रहे रणविजय सिंह जदयू से चुनाव लड़ सकते हैं जबकि आरजेडी से पूर्व विधायक एवं मंत्री रहे राघवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ़ लाल बिहारी सिंह भी इसबार भाजपा से चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं. राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा था.

2015 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर के सातों विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था. सात में से पांच राजद, एक माले और एक जदयू को मिली थी पर इस बार भाजपा और जदयू मिलकर चुनावी मैदान में है तो चुनावी परिदृश्य कुछ और हो सकता है.
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