Today's Chanakya सहित सच साबित हुए दूसरे एग्जिट पोल तो तेजस्वी होंगे 'बिहार के नए बाबू'

तमाम एग्जिट पोल्‍स संकेत दे रहे हैं कि तेजस्‍वी यादव बिहार के अगले मुख्‍यमंत्री हो सकते हैं. (फाइल फोटो)
तमाम एग्जिट पोल्‍स संकेत दे रहे हैं कि तेजस्‍वी यादव बिहार के अगले मुख्‍यमंत्री हो सकते हैं. (फाइल फोटो)

Bihar Chunav Exit Polls Results: तेजस्‍वी यादव को पता था कि उनके पास पहले से ही एक भरोसेमंद वोट बैंक है. ऐसे में उन्‍होंने 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी. तेजस्‍वी के इस ऐलान ने नीतीश के 'विकास' के दावे को बखूबी टक्‍कर दिया. तेजस्‍वी का बयान राज्‍य की राजनीति में इतना ज्‍यादा गर्माया कि वह बिहार का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल (Today Chanakya Exit Poll) ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 11:12 PM IST
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नई दिल्‍ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) के तीसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद अब एग्जिट पोल्‍स के नतीजे भी आ गए हैं. जिसमें नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए को बड़ा झटका लगता दिख रहा है, तो तेजस्‍वी की अगुवाई में महागठबंधन बढ़त में है. अगर टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल (Today Chanakya Exit Poll) और पोल ऑफ पोल्‍स के आंकड़े सही साबित हुए तो 'बिहार के नए बाबू' तेजस्‍वी यादव होंगे. हालांकि 10 नवंबर को चुनाव आयोग की मुहर के बाद ही बिहार की तस्‍वीर पूरी तरह से साफ होगी.

बता दें कि 31 साल के तेजस्‍वी यादव ने जब महागठबंधन का चेहरा बनकर प्रचार अभियान की शुरुआत की तो सार्वजनिक रूप से यह बात उठने लगी कि क्‍या वह मंझे हुए राजनीतिज्ञ नीतीश कुमार के सामने टिक पाएंगे? हालांकि तेजस्वी यादव बहुत सोच-समझकर कदम रख रहे थे. 26 अक्‍टूबर को रोहताश जिले में चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्‍वी यादव का एक 'बयान' इसका जीता जागता उदाहरण है.

दरअसल, नीतीश कुमार के 'जंगल राज' वाले बयान पर पहली बार तेजस्‍वी ने पलटवार करते हुए कहा था, लालू जी के राज में गरीब सीना तानकर बाबू साहेब के सामने बैठता था.' फिर क्‍या था, भीड़ उत्‍साह से भर उठी और तेजस्‍वी यादव के नारे लगाने लगी. एक तरफ नीतीश कुमार और एनडीए के स्‍टार प्रचारक 'लालू के जंगल राज' पर जोर दे रहे थे तो इसके जवाब में तेजस्‍वी कह रहे थे कि लालू यादव के राज में गरीबों को पूरा सम्‍मान मिलता था. अपने सूझ-बूझ और कौशल से वह रैलियों में भारी भीड़ जुटा रहे थे.



एनडीए के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्‍वास' नारे पर तेजस्‍वी ने रोहतास रैली में कहा था, 'सबको साथ लेकर चलना है.' वहीं तेजस्‍वी को लालू-राबड़ी के 15 साल के शासन का भी आभास था, जिसपर विरोधी लगातार सवाल उठाते थे. इसलिए वह काफी सोच समझकर कदम रख रहे थे. उन्‍हें इस बात का भरोसा  था कि उनके पास पहले से ही एक भरोसेमंद वोट बैंक है. बस मतदातों को आकर्षित करना था. ऐसे में उन्‍होंने 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी. तेजस्‍वी के इस ऐलान ने नीतीश के 'विकास' के दावे को बखूबी टक्‍कर दी. तेजस्‍वी का बयान राज्‍य की राजनीति में इतना ज्‍यादा गर्माया कि वह बिहार का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का था.
शायद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के सभी बड़े नेताओं को इस बात का आभास हो गया था. हर चुनावी रैली में तेजस्‍वी के 10 लाख रोजगार वाले बयान को लेकर निशाना साधा जाने लगा. इसपर, तेजस्‍वी चुनावी रैलियों में तो जवाब देते ही थे, साथ ही रोजगार पर वह सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चलाकर आम जनता से संवाद करने लगे. तमाम एग्जिट पोल्‍स के नतीजों से ऐसा लग रहा है कि तेजस्‍वी रोजगार का मुद्दा भुनाने में कामयाब हो गए.
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