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अजब-गजब बिहार: 12 सालों से बच्चे स्कूल बनने का कर रहे हैं इंतजार, प्रशासन ने क्लासरूम की जगह बनवा दिया शौचालय और किचन

अजब-गजब बिहार: 12 सालों से बच्चे स्कूल बनने का कर रहे हैं इंतजार, प्रशासन ने क्लासरूम की जगह बनवा दिया शौचालय और किचन

सुपौल जिले में एक ऐसा स्कूल मौजूद है, जहां किचन से लेकर शौचालय बना तक हुआ है पर बच्चों के पढ़ने के लिए कक्षाएं नहीं हैं.

सुपौल जिले में एक ऐसा स्कूल मौजूद है, जहां किचन से लेकर शौचालय बना तक हुआ है पर बच्चों के पढ़ने के लिए कक्षाएं नहीं हैं.

Bihar School: सुपौल जिले में एक ऐसा स्कूल मौजूद है, जहां किचन से लेकर शौचालय बना तक हुआ है पर बच्चों के पढ़ने के लिए कक्षाएं नहीं हैं. पिछले 12 सालों से यहां के बच्चे क्लासरूम बनने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि उनका इंतजार वर्षों बाद भी खत्म नहीं हो पाया है. गांव के सैकड़ों बच्चे आज भी निरक्षर है. शिक्षा विभाग के कागजों पर चलने वालें इस स्कूल में ज्ञान के मोती उगाने की जगह हर साल धान और गेहूं उपजाया जाता है. सुपौल शहर से महज 15 किमी दूरी पर पलासपुर गांव के शर्मा टोला में एक स्कूल है, जिसका नाम प्राथमिक विद्यालय पलासपुर बैरो है.

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सुपौल. ऐसे तो सभी ने सरकारी अफसरों द्वारा की गई लापरवाही के किस्से खूब पढ़ें और सुने होंगे. लेकिन, बिहार में जो हुआ उसे जानकर हर कोई हैरान हो सकता है. दरअसल, राज्य के सुपौल जिले में एक ऐसा स्कूल मौजूद है, जहां किचन से लेकर शौचालय बना तक हुआ है, पर बच्चों के पढ़ने के लिए कक्षाएं नहीं हैं. पिछले 12 सालों से यहां के बच्चे क्लासरूम बनने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि उनका इंतजार वर्षों बाद भी खत्म नहीं हो पाया है. गांव के सैकड़ों बच्चे आज भी निरक्षर हैं. शिक्षा विभाग के कागजों पर चलने वाले इस स्कूल में ज्ञान के मोती उगाने की जगह हर साल धान और गेहूं को उपजाया जाता है.

सुपौल शहर से महज 15 किमी दूरी पर पलासपुर गांव के शर्मा टोला में एक स्कूल हैं, जिसका नाम प्राथमिक विद्यालय पलासपुर बैरो है. सरकार के कागजों पर यह स्कूल कई सालों से संचालित है. इस वजह से यहां बच्चों के लिए शौचालय से लेकर किचन तक सरकारी खर्च पर बना दिया गया, लेकिन 12 सालों से इस स्कूल में कागजों पर पढ़ने वाले बच्चों को छत तक नसीब नहीं हो सका.

शर्मा टोला पलासपुर के इस स्कूल की स्थापना साल 2012 में हुई थी. गरीब तबके के निरक्षर लोगों ने अपनी किमती जमीन सरकार को सौंप दी, ताकि इस जगह पर स्कूल खुल सके और उनके बच्चों का भविष्य़ उज्वल हो सके. लेकिन, कुछ महीने तक पढ़ाई तो हुई पर स्कूल का भवन नहीं बनने के कारण इसे दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया. यह स्कूल 3 किमी दूर है, जिस वजह से बच्चे रोज पढ़ने नहीं जा पाते हैं. इस गांव के सैकड़ों बच्चों को अ आ तक पता नहीं है.

सुपौल शिक्षा पदाधिकारी ने इस मामले पर कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है. वहीं ग्रामीणों ने कई बार आवेदन देकर स्कूल शुरू करवाने की मांग की है. लेकिन उन्हें जवाब मिलता है कि देख लेंगे, कर लेंगे और हो जाएगा.

Tags: Bihar News in hindi, School

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