बिहार सरकार की 'लेटलतीफी' से टूट सकता है स्‍मार्ट सिटी का सपना! 2600 करोड़ रुपए हो जाएंगे वापस

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट को लेकर बिहार सरकार पर उठे सवाल.

बिहार के पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहार शरीफ का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट (Smart City Project) का काम काफी धीरे हो रहा है. अगर मार्च तक बिहार सरकार ने डीपीआर और टेंडर रिपोर्ट केंद्र सरकार (Central Government) के पास जमा नहीं की तो 2600 करोड़ रुपए वापस लौट जाएंगे.

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पटना. बिहार में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट (Smart City Project) का काम काफी धीरे-धीरे हो रहा है. ऐसे में यदि काम का पूरा डीपीआर बनाकर टेंडर की रिपोर्ट मार्च तक बिहार सरकार केंद्र सरकार (Central Government) के पास जमा नहीं करती है तो स्मार्ट सिटी का पैसा वापस लौट जाएगा. बिहार के विपक्षी दल इस मामले को लेकर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर हमलावर हैं. हालांकि नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा का कहना है कि किसी भी हाल में मार्च तक चारों स्मार्ट सिटी के टेंडर की रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास चली जाएगी और इसके लिए बिहार सरकार दिन रात काम कर रही है.

ना डीपीआर बना और ना टेंडर दिया गया
बिहार के पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहार शरीफ को स्मार्ट सिटी बनाना है. इन चारों शहरों के लिए केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के तौर तीन साल पहले ही परमिशन दी थी, लेकिन अब तक इन चारों स्मार्ट सिटी का ना डीपीआर बना और ना टेंडर की रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास पहुंची है. ऐसे में यदि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यानी मार्च तक इन चारों शहरों का डीपीआर बनाकर टेंडर की रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास नहीं जाती है तो इस स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट के 2600 करोड़ रुपए वापस लौट जाएंगे.

 
स्मार्ट सिटी के नाम पर लूट खसोट
इस मामले को लेकर विपक्ष पूरी तरह से राजनीति करने के मूड में हैं. आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि सरकार लूट खसोट कर रही है. सिर्फ स्मार्ट सिटी के साथ ही नहीं और कई योजनाओं के साथ भी यही कुछ हो रहा है. विकास का काम ठप पड़ा हुआ है और अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं.

एक पैसा वापस नहीं जाने देंगे
मामले को तूल पकड़ता हुआ देख नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने इस स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में काम कर रहे अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की. उन्‍होंने कहा कि इन लोगों ने डीपीआर और टेंडर देने में काफी देरी की है. अब यह कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुजफ्फरपुर और भागलपुर को लेकर बैठक हो चुकी है. जबकि पटना को लेकर एक बैठक करनी बाकी है. मंत्री ने बताया कि किसी भी हाल में इस पैसे को वापस नहीं जाने दिया जाएगा. जो अधिकारी इस मामले में कोताही करेंगे उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस स्मार्ट सिटी को लेकर एक मॉनिटरिंग कमिटी भी बनाई गई है.
तीन साल से कछुआ चाल
पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहार शरीफ में सब कुछ स्मार्ट हो और यह शहर स्मार्ट सिटी के रूप में जाना जाए. ये सबकी इच्छा है. हालांकि 3 साल बीत गए अब तक इस प्रोजेक्ट में कुछ भी काम नहीं हो पाया है. केंद्र सरकार लगातार बिहार सरकार पर यह दबाव बना रही है कि काम में तेजी लाई जाए, लेकिन बिहार के अधिकारी अपनी कछुआ चाल में पारंगत है और अब तक ना ही डीपीआर बना है और ना ही टेंडर दिया गया है. लिहाजा अब और देरी होती है तो बिहार के शहरों का स्मार्ट बनने का सपना चकनाचूर हो जाएगा.

 

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