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बिहार: बीएचएमएस की पढ़ाई पूरी करने वाले सैकड़ों छात्र 2014 से कर रहे हैं परीक्षा का इंतजार

SUDHIR KUMAR | News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 10:33 AM IST
बिहार: बीएचएमएस की पढ़ाई पूरी करने वाले सैकड़ों छात्र 2014 से कर रहे हैं परीक्षा का इंतजार
परीक्षा न होने से बीएचएमएस के छात्रों का भविष्‍य अधर में लटक गया है.

परीक्षाओं को लेकर विश्वविद्यालय का कहना है कि कई कालेजों की परीक्षाओं पर रोक लगी है, इसलिए परीक्षा का आयोजन नहीं कराया जा रहा है. अनुमति प्राप्त होने के बाद सभी परीक्षाएं एक साथ ली जाएंगी.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 10:33 AM IST
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मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) : बिहार (Bihar) की शिक्षा व्‍यवस्‍था (Education System) के आलम का अंजादा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सूबे के इकलौते होम्‍योपैथी मेडिकल कालेज (homeopathy medical college) में बीते पांच सालों से एक भी परीक्षा (Examination) नहीं हुई है. जी हां, हम बात कर रहे हैं सूबे के इकलौते मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज (Muzaffarpur medical college) की. इस कॉलेज में बीएचएमएस (BHMS) के छात्रों को 2014 से परीक्षा का इंतजार है. आलम यह है कि यहां बीएचएमएस ही नहीं, बल्कि पीजी कोर्स के छात्रों की परीक्षा 2017 से लंबित है. बिहार की खस्‍ताहाल हो चुकी शिक्षा व्‍यवस्‍था के चलते होम्योपैथिक सैकड़ों छात्र-छात्राएं डॉक्टर (Doctor) बनने से वंचित है.

पीजी की परीक्षाएं भी हैं लंबित
उल्‍लेखनीय है कि बिहार विश्वविद्यालय के अधीन चलने वाले इस कॉलेज में 2014,  2015,  2016,  2018 बीएचएमएस बैच की परीक्षाएं नहीं हो रही है. 2017 के बाद से पीजी की भी कोई परीक्षा हुई ही नहीं है. इतना ही नहीं, सत्र में काफी विलंब होने के बावजूद 2014 बैच की दूसरे तीसरे साल की परीक्षाएं नहीं ली गई है. इसके अलावा, जिन छात्रों ने  2017 में पीजी में नामांकन लिया था, उनकी परीक्षाएं भी नहीं हुई है. जाहिर है कि बिहार विश्वविद्यालय के इस रवैए की वजह से यहां के छात्र दूसरे विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अपने ही बैच के छात्रों से जूनियर हो गए हैं.

प्रिंसिपल ने लगाई राज्‍यपाल से गुहार

विश्‍वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का आरोप है कि उन्‍होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी गुहार को लगातार अनसुना किया जाता रहा है.बिहार विश्‍वविद्यालय के इस रवैए से परेशान छात्रों ने अब कुलाधिपति को भी अपनी शिकायत भेजी है. ऐसा नहीं है कि छात्रों के भविष्‍य के साथ हो रहे खिलवाड़ से होम्योपैथी कॉलेज प्रशासन परेशान नहीं है. अपने छात्रों के भविष्‍य को लेकर चिंतित होम्‍योपैथी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एबी अंगार ने भी राज्यपाल को मौजूद स्थिति से अवगत कराया है. उन्‍होंने राज्‍यपाल को बताया है पढ़ाई पूरी होने के बावजूद परीक्षा न होने से सैकड़ों बच्‍चों का भविष्‍य अधर में लटक गया है.

नहीं हो पा रही इंटर्नशिप
डॉ. एबी अंगार के अनुसार, कई बैच के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पूरी हो चुकी है. साढ़े 4 साल की पढ़ाई करने के बाद परीक्षा न होने के चलते उन्‍हें इंटर्नशिप में नहीं भेजा जा सकता है. उन्‍होंने बताया कि कुछ सत्रों में पहले साल की परीक्षा हुई है, लेकिन दूसरे-तीसरे साल की परीक्षाएं नहीं हो सकी है. पीजी में नामांकित छात्र-छात्राओं की कोई परीक्षा अभी तक नहीं हो सकी है. वहीं, विश्वविद्यालय से संपर्क करने पर यह बताया जा रहा है कि कई कालेजों की परीक्षाओं पर रोक लगी है, इसलिए परीक्षा का आयोजन नहीं कराया जा रहा है. अनुमति प्राप्त होने के बाद सभी परीक्षाएं एक साथ ली जाएंगी.
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डिप्रेशन का शिकार हो रहे छात्र-छात्राएं
कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ बी एन एस भारती का कहना है कि निजी कालेजों के चक्कर में बोनाफाइड छात्र-छात्राओं का भविष्य चौपट हो रहा है. वहीं, पीजी में पढ़ाई कर रहे छात्र -छात्राओं ने बताया कि सालों पहले बीएचएमएस का कोर्स पूरा करने के बावजूद उन्‍हें नौकरी के लिए जूनियर पदों पर आवेदन करना पड़ेगा. उनके बैच के दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र अब उनसे सीनियर हो चुके हैं. छात्र-छात्राओं ने खुले तौर पर कहा कि विश्‍वविद्यायल के इस रवैए के चलते वे डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं, क्योंकि उन्‍हें अपना भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है.

कुछ कालेज की कमियों से चलते रुकी सभी परीक्षाएं
वहीं, विश्वस्त सूत्रों की बात माने तो बिहार विश्वविद्यालय में लगभग एक दर्जन ऐसे निजी कॉलेज संबद्ध है, जिनमें बहुत सारी तकनीकी गड़बड़ियां है.  विश्वविद्यालय के अलवा,आयुष मंत्रालय एआईसीटीई से मान्यता हासिल करने वाले इन कालेजों में कुछ न कुछ कमियां है, इस वजह से उन कालेजों की परीक्षाएं नहीं हो रही है. साथ में आरबीटीएस सरकारी कालेज की भी परीक्षा नहीं ली जा रही है. विश्वविद्यालय अधिनियम के जानकार बताते हैं कि सरकारी कालेज को निजी कॉलेजों से अलग करके इनकी सेपरेट परीक्षा ली जा सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय में रुचि नहीं ले रहा है.

कुलपति के हाथ अंतिम फैसला
परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने भी कहा कि आरबीटीएस कॉलेज के छात्र छात्राओं की परीक्षा अलग से आयोजित कराने का प्रावधान है. अंतिम फैसला कुलपति को लेना है. इधर कुलपति ने इस समस्या के जल्द समाधान का आश्वासन दिया है. बता दें कि सूबे का एकमात्र सरकारी होम्योपैथिक कॉलेज मुजफ्फरपुर में है. 1968 में स्थानीय एक रायबहादुर द्वारा रायबहादुर टुनकी  शाह होम्योपैथिक कॉलेज की स्थापना की गई थी. सन 1981 में सरकार ने इस कॉलेज को अधिग्रहित कर लिया जो पूरे बिहार में एकमात्र सरकारी होम्योपैथिक कालेज है. यहां छात्र-छात्राओं का नामांकन बिहार कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर होता है.

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First published: November 27, 2019, 10:33 AM IST
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