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BJP सांसद ने लोकसभा में उठाया गंडक नहर परियोजना का मुद्दा, बोले-बिहार के हक का पानी हो रहा है 'चोरी'

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: December 11, 2019, 9:13 PM IST
BJP सांसद ने लोकसभा में उठाया गंडक नहर परियोजना का मुद्दा, बोले-बिहार के हक का पानी हो रहा है 'चोरी'
लोकसभा में सांसद राजीव प्रताप रूडी ने उठाया पानी का मुद्दा.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी (Rajiv Pratap Rudy) ने गंडक परियोजना (Gandak Project) का मुद्दा उठाते लोकसभा में कहा कि पिछले 50 वर्षों में हमारे हिस्‍से के लगभग 48 लाख क्यूसेक पानी की चोरी की गयी है. इस वजह से सिवान, गोपालगंज और सारण के लगभग 2 करोड़ किसानों समस्‍या से जूझ रहे हैं.

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पटना. सारण से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी (Rajiv Pratap Rudy) ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि पिछले 50 वर्षों में हमारे लगभग 48 लाख क्यूसेक पानी की चोरी की गयी है. जबकि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण सिवान, गोपालगंज (Gopalganj) और सारण (Saran) के लगभग 2 करोड़ किसानों के लिए संबंधित क्षेत्र में सिंचाई की गंभीर समस्या बनी हुई है. उन्‍होंने ये बात बुधवार को लोकसभा में शून्यकाल के तहत गंडक परियोजना (Gandak Project) का मुद्दा उठाते हुए सदन को बताई. रूडी ने सदन को बताया कि गंडक परियोजना के समझौते के तहत बिहार को पूरा पानी नहीं दिया जा रहा है. भारत सरकार (Government of India) के नेपाल सरकार से समझौते के अनुसार भारत को 15665 क्यूसेक पानी मिलना तय हुआ था. जबकि इसके तहत उत्तर प्रदेश को लगभग 7500 और बिहार को 8530 क्यूसेक पानी मिलना निर्धारित किया गया था.

राजीव प्रताप रूडी ने कही ये बात
सांसद राजीव प्रताप रूडी ने सदन को बताया कि समझौते के बावजूद पश्चिम नहर का केवल 2500-3000 क्यूसेक पानी ही बिहार में आता है. बाकी का पानी कहां जाता है इसकी जांच होनी चाहिए और हमारा पानी हमें वापस मिलना चाहिए. साथ ही उन्‍होंने बताया कि गंडक परियोजना से निकले नहर का अंतिम सीमा सारण में पहुंचता है. सारण प्रमंडल के तहत पड़ने वाले तीन जिले गोपालगंज, सिवान और सारण में गंडक परियोजना की नहरें हैं. इसके बावजूद जहां नवंबर महीने में हमें 6000 क्यूसेक और दिसंबरमें 5600 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए था, लेकिन इस वक्‍त नहर में एक बूंद पानी भी नहीं है.
सदन के माध्यम से रूडी ने सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि सारण जिला भारत सरकार के 154 जिलों की सूची में पानी की कमी वाला जिला (Water Deficient District) घोषित किया गया है. जबकि उत्तर प्रदेश के लगभग 112 किलोमीटर और बिहार के 65 किलोमीटर की भूमि को सिंचित करने के उदेश्य से मुख्य पश्चिमी नहर का निर्माण किया गया था. बिहार में इसका उदेश्य पूरा ही नहीं हो पाता है, क्योंकि हमारे हिस्से का पानी हमें नहीं मिल पाता है. रूडी ने सरकार से मांग की है कि दो महीने के भीतर इस विषय पर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए.

गंडक नहर के लिए राज्‍य और भारत सरकार करे ये काम
रूडी ने मांग की है कि समझौते के अनुसार सारण, सिवान और गोपालगंज जिला को पानी उपलब्ध कराया जाए. साथ ही गंडक नहर के जीर्णोद्धार एवं विस्तार के लिए भारत सरकार AIPB (त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम) योजना के तहत बिहार सरकार द्वारा भेजी गई वित्तीय प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान करें. उन्‍होंने बताया कि गंडक नदी, गंगा नदी की चौथी सबसे बड़ी सहायक नदी है. गंडक नदी को नेपाल की पहाड़ियों में काली या कृष्णा गंडकी और नेपाल तराई में नारायणी के नाम से भी जाना जाता है. भारतीय ग्रंथों में इसका नारायणी नदी के रूप में उल्लेख मिलता है. सारण और चंपारण जिले में कृषि के लिए आजादी के लगभग 50 वर्ष पूर्व सन 1900 से पहले सारण तटबंध व चंपारण और तिरहुत तटबंध का निर्माण अंग्रेजों द्वारा किया गया था.

रूडी ने बताया कि सन 1914 ई॰ में चंपारण जिले (गंडक के पूर्व) में सिंचाई के लिए त्रिवेणी नहर प्रणाली को पूरा किया गया, जो कि स्वतंत्रता के बाद भी चलता रहा. हालांकि सारण जिले में सिंचाई के लिए जल निकासी नहरों का भी निर्माण किया गया था, लेकिन इस उद्देश्य की पूर्ति करने में वे असफल रहे और बाद में योजना को ब्रिटिश सरकार ने छोड़ दिया.उनके मुताबिक आजादी से पहले, बिहार और बिहार राज्य की प्रांतीय सरकार ने अपने-अपने राज्यों में सिंचाई सुविधा देने के लिए गंडक नदी के पार दो अलग-अलग डायवर्सन संरचनाओं का प्रस्ताव रखा था. बाद में भारत सरकार ने पहल की और नेपाल सरकार से नेपाल में गंडक में एक बैराज के निर्माण के लिए पहल की.

नेपाल को लेकर रूडी ये बोले
सांसद रूडी ने यह भी कहा कि यह बिहार और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है. गंडक नदी पर सूरतपुरा (नेपाल) में हाइड्रो बिजली का उत्पादन किया जाता है. ये बांध बिहार में भैसलोतन (वाल्मीकि नगर) में बनाया गया है. वर्ष 1959 के समझौते के आधार पर नेपाल को भी गंडक परियोजना से लाभ मिल रहा है. इस परियोजना के अंतर्गत वाल्मीकि नगर (बिहार) में त्रिवेणी घाट नाम स्थान पर बांध निर्मित किया गया है. यह बांध बिहार तथा नेपाल में विस्तृत है. इसलिए इसे त्रिवेणी नहर प्रणाली भी कहते हैं. इस परियोजना के अंतर्गत दो मुख्य नहर का निर्माण किया गया है.

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First published: December 11, 2019, 9:09 PM IST
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