घोड़ों के लिए मशहूर है बिहार का ये पशु मेला, अनंत सिंह से लेकर तेजप्रताप यादव तक करते हैं खरीददारी
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घोड़ों के लिए मशहूर है बिहार का ये पशु मेला, अनंत सिंह से लेकर तेजप्रताप यादव तक करते हैं खरीददारी
बिहार के ब्रह्मपुर मेला में घोड़ा दौड़ाता घुड़सवार

बाबा ब्रह्ममेश्वर नाथ के नाम से बिहार के बक्सर जिले में लगने वाला यह पशु मेला मुगल काल से चला आ रहा है. ग्रामीण परिवेश में कृषि तथा पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था होने से शासकों ने इसके महत्व को भी समझा

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बक्सर. हरिहर क्षेत्र के सोनपुर पशु मेला के बाद पूरे बिहार में अपनी पहचान रखने वाला ब्रह्मपुर का घोड़ा मेला पूरे परवान पर है. आठ दिनों तक चलने वाले इस विख्यात मेले में सभी नस्लों के घोड़े पहुंचे हुए हैं. फागुनी महीने के महाशिवरात्रि के समय शुरू होने वाला यह पशु मेला अब केवल घोड़ों तक सिमट कर रह गया है. कभी ये मेला बैल, गाय, भैंस और कुत्तों से गुलजार हुआ करता था.

मुगलकाल से चली आ रही है पशु मेले की परंपरा

बाबा ब्रह्ममेश्वर नाथ के नाम से लगने वाला यह पशु मेला मुगल काल से चला आ रहा है. ग्रामीण परिवेश में कृषि तथा पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था होने से शासकों ने इसके महत्व को भी समझा. आज यह मेला हजारों लोगों की जीविका तथा सरकारी राजस्व प्राप्ति का केन्द्र बन गया है. घोड़े के कद्रदान आज भी इस मेले में सैकड़ों किलोमीटर दूर रह कर भी चले आते हैं. इस मेले की शोहरत बिहार के अलावा कई राज्यों तक फैली हुई है.



कई उन्नत किस्म के घोड़े आते हैं इस मेले में बिकने



राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी के कई क्षेत्रों से घोड़ा व्यापारी अपने घोड़ों को बेचने के लिए इस मेला में पहुंचते हैं.  पिछले वर्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल तेजप्रताप यादव ने भी इस मेले से मारवाड़ के रोकड़ नस्ल के घोड़े की खरीदारी की थी जिसकी किमत अस्सी हजार रुपए थी. छोटे सरकार के नाम से जाने जाने वाले अनंत सिंह भी इस घोड़े मेले से घोड़ों की खरीदारी कर चुके हैं. कई राजनीतिक घरानों से घोड़ों का शौक रखने वाले लोगो की भी पसंद ये घोड़ा मेला है.

ब्रह्मपुर पशु मेला
ब्रह्मपुर के पशु मेले में पहुंचा ग्राहक


प्रतिदिन होता है लाखों रुपए का कारोबार होता है

महंगाई का असर घोड़ों की कीमत पर भी पड़ा है लेकिन जब किसी व्यापारी को घोड़ा पसंद आ जाता है तो पैसों की कीमत मायने नहीं रखती है. इस मेले में आए घोड़े के बच्चों की कीमत अस्सी हजार से एक लाख रुपए तक की होती है जबकि कई घोड़े ऐसे भी हैं जिनकी कीमत दो से ढ़ाई लाख तक है.

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