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बक्सर का लिट्टी-चोखा मेलाः भगवान राम की याद में मनाया जाने वाला अनोखा फूड-फेस्टिवल

बक्सर का लिट्टी-चोखा मेलाः भगवान राम की याद में मनाया जाने वाला अनोखा फूड-फेस्टिवल

Buxar Litti-Chokha Mela: छठ महापर्व के बाद भी बिहार के अलग-अलग इलाकों में कई पारंपरिक त्योहार हैं, जिन्हें पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसी क्रम में बक्सर का मशहूर लिट्टी-चोखा मेला अपनी तरह का अनोखा फूड-फेस्टिवल है. भगवान राम और महर्षि विश्वामित्र को लेकर मशहूर बक्सर में लगने वाला यह पांच दिनों का मेला रामायण काल का बताया जाता है. बक्सर में पंचकोसी परिक्रमा के लिए हर साल बड़ी तादाद में श्रद्धालु जुटते हैं और 5 दिनों तक इस इलाके को जीवंत बना देते हैं.

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    बक्सर- उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित बक्सर में बीते रविवार की सुबह आम दिनों की ही तरह ओस और कोहरे से भरी हुई थी. बक्सर का आसमान धुएं से भरा था, जो प्रतीक था लिट्टी-चोखा मेला की समाप्ति का. रामायण में वर्णित भगवान राम के अहिल्या उद्धार और महर्षि विश्वामित्र के आश्रम के लिए मशहूर बक्सर में लगने वाला यह सालाना मेला, आम लोगों के बीच लिट्टी-चोखा मेले के रूप में जाना जाता है. बक्सर के चरित्रवन घाट पर लाखों की तादाद में सत्तू, आटा और अन्य सामग्री लेकर आने वाले श्रद्धालु मुख्य तौर पर लिट्टी-चोखा (Litti Chokha)  बनाते हैं, जिसे महाप्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. इस बार भी अपनी तरह का अनोखा यह मेला पूरे देसी अंदाज के साथ सेलिब्रेट किया गया.

    बक्सर के चरित्रवन में लगने वाले पंचकोसी परिक्रमा मेले की समाप्ति यूं तो रविवार को हो गई, लेकिन इस बार मेले की रौनक कुछ ज्यादा ही दिखी. इसकी वजह कोरोनाकाल रहा, क्योंकि इस महामारी का संक्रमण रोकने के मद्देनजर पिछले साल मेले के आयोजन में बाधाएं आई थीं. बक्सर के अहिरौली में स्थित अहिल्या मंदिर से पारंपरिक तरीके से इस मेले की शुरुआत होती है. मान्यता है कि भगवान राम ने यहीं पर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को उनके श्राप से मुक्ति दिलाई थी. भगवान राम की इसी महिमा का गुणगान करने के लिए श्रद्धालु जुटते हैं और पुआ-पकवान बनाकर रात्रि विश्राम करते हैं. मेले के दूसरे दिन आकर्षण का केंद्र यहां से करीबन कोसभर दूर नदांव गांव होता है, जहां खिचड़ी और चोखे का प्रसाद भोग लगाया जाता है.

    रामायण काल की मान्यता

    मेले का तीसरा दिन श्रद्धालु भार्गव ऋषि आश्रम यानी भार्गवेश्वर महादेव का दर्शन कर चूड़ा-दही खाते हैं और इसके बाद बक्सर के बड़का नुआंव में स्थित ऋषि उद्दालक के आश्रम में चौथा दिन बीतता है. पंचकोसी मेले के अंतिम दिन आकर्षण का केंद्र बक्सर का चरित्रवन घाट होता है, जहां एक विशाल मैदान में लाखों की तादाद में श्रद्धालु जमा होते हैं और लिट्टी-चोखा का महाप्रसाद बनाते हैं. मान्यता है कि महर्षि विश्वामित्र ने ताड़का का वध करने वाले राम-लक्ष्मण को यहीं पर दिव्य अस्त्र प्रदान किए थे. मान्यता है कि रामायण में वर्णित भगवान राम ने यहां लिट्टी-चोखा जैसा व्यंजन बनाकर खाया था, जिसके उपलक्ष्य में ही आज भी श्रद्धालु इस मान्यता का उत्सव मनाते हैं.

    Tags: Bihar News, Bihar News in hindi, Buxar news

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