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इतिहास में अपनी अलग पहचान रखता है बक्सर, कई युद्ध और आंदोलनों का रहा है गवाह

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्राचीन काल में बक्सर का नाम 'व्याघ्रसर' था क्योंकि उस समय यहां पर बाघों का निवास हुआ करता था. बक्सर में गुरु विश्वामित्र का आश्रम था.

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बिहार के बक्सर का दिलचस्प रहा इतिहास है. यहां प्रथम युद्ध मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच 26 जून, 1539 को बक्सर स्थित चौसा के मैदान में लड़ा गया था. लेकिन अब यहां लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और गठबंधन उम्मीदवार के जगदानंद सिंह के बीच लड़ी जा रही है.

'व्याघ्रसर' के नाम से जाना था बक्सर
बिहार के पश्चिम भाग में गंगा नदी के किनारे स्थित बक्सर शहर का सियासी और धार्मिक महत्व रहा है, यहां की अर्थ-व्यवस्था मुख्य रूप से खेतीबारी पर आधारित है. प्राचीन काल में बक्सर का नाम 'व्याघ्रसर' था क्योंकि उस समय यहां पर बाघों का निवास हुआ करता था. बक्सर में गुरु विश्वामित्र का आश्रम था. यहीं पर राम और लक्ष्मण का प्रारम्भिक शिक्षण-प्रशिक्षण हुआ था.

लंबी लड़ाई के बाद बना जिला
11 साल के लंबे आंदोलन के बाद 17 मार्च 1991 को बक्सर को जिला बनाया गया था. इस दौरान कई लड़ाई लड़ी गईं. लड़नेवाले उत्साही लोगों में करीब 18 प्रमुख लोगों की मौत हो गई थी. 1980 से लेकर 1990 तक में बक्सरवासियों ने 5 बार बक्सर बंद कराया, जो अभूतपूर्व रहा और उससे सरकार की कुंभकर्णी निद्रा टूटी और फिर बक्सर को जिला का दर्जा मिल गया.



फाइल फोटो


कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है बड़ा मेला
बक्सर पटना से लगभग 172 किमी पश्चिम और मुगलसराय से 109 किमी पूर्व में पूर्वी रेलवे लाइन के किनारे स्थित है. यह एक व्यापारिक नगर भी है. बक्सर में बिहार का एक प्रमुख कारागृह है, जिसमें अपराधी लोग कपड़ा आदि बुनते और अन्य उद्योगों में लगे रहते हैं. कार्तिक पूर्णिमा को यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें लाखों व्यक्ति इकट्ठे होते हैं.

शुजाउद्दौला और कासिम अली खां की लड़ाई
सुप्रसिद्ध बक्सर की लड़ाई शुजाउद्दौला और कासिम अली खां की तथा अंग्रेज मेजर मुनरो की सेनाओं के बीच 1764 में लड़ी गई थी, जिसमें अंग्रेजों की विजय हुई. इस युद्ध में शुजाउद्दौला और कासिम अली खां के लगभग 2,000 सैनिक डूब गए या मारे थे.

फाइल फोटो


ब्रह्मपुर में ब्रह्मेश्वर मंदिर
बक्सर स्थित यह गांव विशेष रूप से प्राचीन ब्रह्मेश्वर मंदिर के लिए जाना जाता है. यह मंदिर मोहम्मद गजनवी के समय से यहां स्थित है. मुगल शासक अकबर के समय में राजा मान सिंह ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था.

बक्सर सीट पर किसका रहा वर्चस्व?
बक्सर लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधासभा सीट आती हैं. कमल सिंह यहां से पहले सांसद थे, जिन्होंने साल 1952 का पहला आम चुनाव निर्दलीय रूप से लड़ा था. यहां आजादी के बाद हुए आम चुनावों में करीब तीन दशक तक कांग्रेस पार्टी का इस सीट पर एकतरफा राज्य रहा. क्योंकि 1952 से 1984 तक के चुनाव में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ जब 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर रामानंद तिवारी चुनाव जीते थे. रामानंद तिवारी भोजपुर इलाके के कद्दावर समाजवादी नेता थे और कई बार विधायक व बिहार सरकार में मंत्री भी रहे थे. 1989 के लोकसभा चुनाव में फिर कांग्रेस पत्ता यहां से बिल्कुल साफ हो गया. 1989 में इस सीट से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के तेज नारायण सिंह चुनाव जीते थे.

90 के दशक में पहली बार खिला कमल
1996 के चुनाव में यहां पहली बार कमल खिला और लाल मुनि चौबे यहां के सांसद चुने गए और वो लगातार चार बार यहां से सांसद रहे यानी कि 1996 से लेकर 2004 तक इस सीट पर बीजेपी का ही राज रहा, लेकिन साल 2009 के चुनाव में भाजपा से ये सीट राष्ट्रीय जनता दल के जगदांनद सिंह ने छीन ली और वो यहां से एमपी बने. लेकिन साल 2014 के चुनाव में एक बार फिर से बाजी पलटी और बीजेपी ने यहां बड़ी जीत दर्ज की और अश्विनी चौबे यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे.

बक्सर लोकसभा सीट पर मतदाता
2014 चुनाव में इस सीट पर कुल वोटर्स की संख्या 16 लाख 40 हजार 567 थी. इनमें से 8 लाख 88 हजार 204 मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया. इसमें 4,93,930 पुरष और 3,94,274 महिला मतदाताओं की संख्या थी. बक्सर को सवर्ण बाहुल्य सीट कहा जाता है और ब्राह्मण वोटरों की अच्छी संख्या है. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में लोगों ने अधिकांशत: किसी सवर्ण या ब्राह्मण उम्मीदवार को जिताया है और अश्विनी चौबे बाहरी होने के बावजूद इस सीट से सांसद बन पाए. इस बार के हालात पिछले चुनाव से अलग है, इस चुनाव में बीजेपी-जेडीयू साथ-साथ हैं जिसकी वजह से राजद की परेशानी बढ़ गई है तो वहीं बीजेपी की जीत इस बार केवल जातीय समीकरण पर नहीं बल्कि विकास फैक्टर भी निर्भर करेगी. क्योंकि बीजेपी और अश्निनी चौबे ने विकास के ही नाम पर यहां की जनता से वोट मांग रहे हैं.

बक्सर की कुल जनसंख्या
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक बक्सर की जनसंख्या 24 लाख 73 हजार 959 है , जिसमें से 92 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है और 7 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है.

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