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बक्सर लोकसभा सीट: केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे बचा पाएंगे अपना किला?

News18 Bihar
Updated: May 2, 2019, 3:22 PM IST
बक्सर लोकसभा सीट: केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे बचा पाएंगे अपना किला?
बक्सर लोकसभा में चुनाव प्रचार करते अश्विनी चौबे

बक्सर लोकसभा सीट पर चुनावी लड़ाई उन्हीं चेहरों के बीच है जिन्होंने 2014 में भी एक-दूसरे को टक्कर दी थी.

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बक्सर लोकसभा सीट पर चुनावी लड़ाई उन्हीं चेहरों के बीच है जिन्होंने 2014 में भी एक-दूसरे को टक्कर दी थी. एनडीए की तरफ से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे बीजेपी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार क्षेत्र के कद्दावर नेता माने जाने वाले जगदानंद सिंह हैं.

सीट का इतिहास

कहा जा सकता है कि आजादी के बाद हुए आम चुनावों में करीब तीन दशक तक कांग्रेस पार्टी का इस सीट पर एकतरफा राज्य रहा. क्योंकि 1952 से 1984 तक के चुनाव में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ जब 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर रामानंद तिवारी चुनाव जीते थे. रामानंद तिवारी भोजपुर इलाके के कद्दावर समाजवादी नेता थे और कई बार विधायक व बिहार सरकार में मंत्री भी रहे थे. 1989 के लोकसभा चुनाव में फिर कांग्रेस पत्ता यहां से बिल्कुल साफ हो गया. 1989 में इस सीट से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के तेज नारायण सिंह चुनाव जीते थे.

तेज नारायण सिंह ने यह सीट 1991 के चुनाव में भी जीती जब देश के प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव बने थे. 1996 से 2004 तक में हुए चार लोकसभा चुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे लाल मुनी चौबे ने लगातार जीतीं. 2009 का चुनाव यहां से जगदानंद सिंह ने जीता. आरजेडी के पुराने नेताओं में शुमार किए जाने वाले जगदानंद सिंह को इलाके में बिजली बाबा के नाम से भी पुकारा जाता है. 2014 के चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर राज्य के कद्दावर नेता माने जाने वाले अश्विनी चौबे को भेजा था. अश्विनी चौबे ने आलाकमान के भरोसे को सही ठहराते हुए जीत हासिल की.

लाल मुनी का 'अटल' प्रेम

file photo


बिहार के बक्सर सीट से लगातार चार बार लोकसभा के सांसद रहे लालमुनि चौबे अटल जी के काफी करीबी और ख़ास थे और इसकी वजह थी चौबे का 'फक्कड़' स्वभाव. शायद यही कारण था कि बीजेपी के सिंबल पर चौबे और एनडीए का पताका 1996 से 2004 तक बक्सर से लहराता रहा. लालमुनि बक्सर से 2009 में महज ढाई हजार वोटों से हार गए थे. लालमुनि चौबे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी माने जाते थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भर दिया था. हालांकि बाद में मान-मनौव्वल के बाद उन्होंने नामांकन वापस लिया.
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2014 के चुनाव नतीजे

2014 के लोसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 8,88,204 वोट पड़े थे. बीजेपी के अश्विनी कुमार चौबे को 3,19,012 वोट मिले थे. आरजेडी के 1,86,674 वोट मिले थे. बीएसपी के ददन यादव को 1,84,788 वोट मिले थे और जेडीयू के श्याम लाल कुशवाहा को 1,17,012 वोट हासिल हुए थे. अश्निनी चौबे ने 1,32,338 वोटों से जीत हासिल की थी. कुल मतदान प्रतिशत 54.14 प्रतिशत था.

सामाजिक और राजनीतक गणित



ऋषि विश्वामित्र की तपोभूमि और 1764 के बक्सर युद्ध के लिए देशभर में पहचाना जाने वाले इस लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाता 18,20,035 हैं. पुरुष मतदाता 967278 तो महिला मतदाता 852740 हैं. इस सीट पर 19 मई को आखिरी चरण में मतदान होंगे.

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First published: May 2, 2019, 1:41 PM IST
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