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बक्‍सर में अनोखी शादी: कैदी बना दूल्‍हा, दुल्‍हन के लिए जेल बना ससुराल

Agencies
Updated: November 27, 2014, 11:29 PM IST
बक्‍सर में अनोखी शादी: कैदी बना दूल्‍हा, दुल्‍हन के लिए जेल बना ससुराल
यूं तो लोगों के जेहन में जेल का नाम आते ही खूंखार कैदियों और रोबदार पुलिस वालों का चेहरा सामने आता होगा परंतु बक्सर स्थित मुक्त कारागार (ओपन जेल) में एक कैदी ने दूल्हा और शेष कैदियों ने बाराती बनकर जेल की स्थिति में बदलाव का प्रमाण दे दिया।

यूं तो लोगों के जेहन में जेल का नाम आते ही खूंखार कैदियों और रोबदार पुलिस वालों का चेहरा सामने आता होगा परंतु बक्सर स्थित मुक्त कारागार (ओपन जेल) में एक कैदी ने दूल्हा और शेष कैदियों ने बाराती बनकर जेल की स्थिति में बदलाव का प्रमाण दे दिया।

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  • Last Updated: November 27, 2014, 11:29 PM IST
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यूं तो लोगों के जेहन में जेल का नाम आते ही खूंखार कैदियों और रोबदार पुलिस वालों का चेहरा सामने आता होगा परंतु बक्सर स्थित मुक्त कारागार (ओपन जेल) में एक कैदी ने दूल्हा और शेष कैदियों ने बाराती बनकर जेल की स्थिति में बदलाव का प्रमाण दे दिया।

ओपन जेल की स्थापना अपराध के दलदल में फंसने वाले कैदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के उद्देश्य से की गई थी, और बक्सर को ओपन जेल में इस उद्देश्य की पूर्ति का प्रमाण उस समय मिला जब आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक युवक ने सात फेरे लिए और लोगों से सफल वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद लिया।

अपने ही दोस्त की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्णिया जिले के रामबाग कॉलोनी में रहने वाले अनुज गुप्ता जहां बुधवार को सजधज कर दूल्हा बने वहीं बक्सर ओपन जेल के कैदी बाराती बने। अनुज बुधवार को कटिहार जिले के ठकपोल गांव की मीनू के साथ परिणय सूत्र में बंधा।

बक्सर के रामरेखा घाट पर जेल अधिकारियों और बारातियों की मौजूदगी के बीच अनुज ने मीनू के साथ सात फेरे लिए और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का वचन दिया। इस विवाह में पंडित की भूमिका भी कैदी ने ही अदा था।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2002 में अपने दोस्त छोटू की हत्या के मामले में पूर्णिया की एक अदालत ने अनुज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लेकिन, जेल में अच्छे आचरण की वजह से इसी साल अनुज को बक्सर ओपने जेल भेज दिया गया। ओपन जेल में रहते हुए अनुज बिजली मिस्त्री का काम करता है और अपने परिवार वालों का पेट पालता है।

अनुज की दुल्हन मीनू के पिता मनोज मंडल कहते हैं कि अनुज के सहज स्वभाव ने उन्हें इस रिश्ते के लिए मंजूरी देने पर विवश कर दिया। वे कहते हैं, 'मेरी पुत्री मीनू के लिए अनुज से अच्छा वर कोई हो ही नहीं सकता है।' उन्होंने बताया कि इस विवाह से मीनू भी पूरी तरह खुश है। मीनू भी अपने पति के साथ अब बक्सर ओपन जेल में ही रहेगी।

मीनू को दुल्हन के रूप में पाकर खुश अनुज ने कहा कि जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे व्यक्ति से कोई लड़की विवाह नहीं करना चाहेगी, परंतु मीनू से ऐसा किया। उसे बताया, 'मीनू मेरे जीवन में एक ज्योति बनकर आई है।'ओपन जेल के उपाधीक्षक ललन कुमार सिन्हा ने गुरुवार को बताया कि विवाह के मौके पर वर और वधू पक्ष को जिस किसी भी चीज की कमी रही उसे जेल प्रशासन ने उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से लड़की के परिजन भी जेल परिसर में ही ठहरे हुए थे। उल्लेखनीय है कि बक्सर ओपन जेल में इससे पहले भी कई कैदियों का विवाह हो चुका है।

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First published: November 27, 2014, 11:24 PM IST
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