Buxar Lok sabha election Result 2019, बक्सर लोकसभा रिजल्ट 2019: ‘चौबे बाबा’ की दूसरी जीत की 10 बड़ी वजह
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Buxar Lok sabha election Result 2019, बक्सर लोकसभा रिजल्ट 2019: ‘चौबे बाबा’ की दूसरी जीत की 10 बड़ी वजह
अश्विनी चौबे

Buxar Lok sabha election Result 2019: वो 10 कारण जिसकी वजह से BJP के अश्चिनी चौबे को मिली, दूसरी बड़ी जीत.

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बक्सर लोकसभा सीट पर एक बार फिर बीजेपी का झंडा लहराया है. यहां से अश्विनी चौबे ने लगातार दूसरी जीत हासिल की है. इसके पहले 2014 के चुनाव में भी उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी जगदानंद सिंह को बड़े अंतर से शिकस्त दी थी. इस बार अश्विनी चौबे ने महागठबंधन की ओर से आरजेडी प्रत्याशी जगदानंद सिंह को 117609 वोटों से हराया. अश्विनी चौबे को कुल 473053 वोट हासिल हुए जबकि जगदानंद सिंह को 355444 वोट मिले.

अश्विनी चौबे की जीत का समीकरण


    • बक्सर लोकसभा सीट पर पूरे चुनाव में पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक, राष्ट्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ मोदी की सख्त नीति का मुद्दा छाया रहा. इन मुद्दों पर बीजेपी की आक्रमकता ने जनता को गोलबंद किया. मोदी-मोदी के नारों में बंधकर आम जनता ने वोट किया.

    • प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों ने बीजेपी के समर्थन में माहौल बांध दिया. स्थानीय मुद्दों पर कभी चर्चा हुई ही नहीं. प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर विपक्ष की विकल्पहीनता ने लोगों को बीजेपी के समर्थन में एकजुट होकर वोट करने को प्रेरित किया.



    • इस क्षेत्र के युवा बड़ी तादाद में फौज में हैं. उनके परिवारों में राष्ट्रवाद की भावना ने बीजेपी के समर्थन में गोलबंद किया. देशभक्ति बड़ा मुद्दा रहा. विपक्ष सरकार की नाकामियों को भुनाने में नाकाम रहा.

    • इस सीट पर सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मणों (करीब 4 लाख) की है. सवर्ण वोटर्स भी अच्छी तादाद में (राजपूत- 3 लाख, भूमिहार- 2.5 लाख) हैं. सवर्ण वोटर्स ने बीजेपी के पक्ष में खुलकर वोट दिया. इस बार जेडीयू के साथ होने से पिछड़े-अतिपिछड़े और महादलित वोटर्स का भी समर्थन मिला.

    • बक्सर में यादव वोटर्स की आबादी करीब 3.5 लाख है. डेढ़ लाख के करीब मुस्लिम वोटर्स भी हैं. आरजेडी के यादव और मुस्लिम वोटर्स मिलकर भी जगदानंद सिंह को नहीं जीता पाए. बाकी जातियों के वोट ने निर्णायक भूमिका अदा की. उन जातियों के वोटों के बिखराव ने अश्विनी चौबे की जीत की राह आसान की.

    • बक्सर लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ रही है. 1996 से लेकर अब तक (2009 को छोड़कर) इस सीट पर
      बीजेपी उम्मीदवार जीतते आए हैं. 2009 में आरजेडी के जगदानंद सिंह ने जीत हासिल की थी. महज 2 हजार वोटों के अंतर से बीजेपी के लालमुनि चौबे को हार मिली थी. बीजेपी के अपने गढ़ में जीत का समीकरण बनाने में आसानी रही.

    • पिछले चुनाव की तरह इस बार भी अश्विनी चौबे के बाहरी होने का मुद्दा उछला. लेकिन विकास फैक्टर के साथ जातीय समीकरण साध लेने की वजह से जनता बीजेपी के पक्ष में गई.

    • बक्सर लोकसभा क्षेत्र के 6 विधानसभा क्षेत्रों में 4 पर एनडीए का कब्जा है. एनडीए को अपने विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत होने का फायदा मिला.

    • तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार जगदानंद सिंह के समर्थन में वोट मांगे. लेकिन वो गैरयादव और गैर मुस्लिम वोटर्स को प्रभावित नहीं कर पाए.

    • महागठबंधन में शामिल आरएलएसपी, वीआईपी और हम जैसी पार्टियां अपनी समर्थक जातियों को आरजेडी उम्मीदवार जगदानंद सिंह के लिए गोलबंद नहीं कर पाई. राष्ट्रवाद, हिंदू प्रतीकवाद और देशभक्ति वाले मुद्दों के छाए रहने महागठबंधन के पक्ष में जातीय गोलबंदी नहीं हो पाई.



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