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प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ धर्मनिरपेक्षता का पैगाम दे रहे अभिजीत

प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ धर्मनिरपेक्षता का पैगाम दे रहे अभिजीत

    प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ धर्मनिरपेक्षता का पैगाम दे रहे अभिजीत

    बीसीसीएल बस्ताकोला में कार्यरत वित्त अधिकारी अभिजीत चटर्जी पिछले चालीस वर्षों से मां शारदा की प्रतिमा बनाते आ रहे हैं.

    इस बार इनकी बनाई प्रतिमा की खासियत यह है कि इन्होंने मां सरस्वती को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च के सम्मिलित आंगन में खड़ा दिखाया है ताकि माता ज्ञान की देवी आम लोगों को सांप्रदायिक सौहार्द्र की संदेश दे सकें. इतना ही नहीं उन्होंने प्रकृति संरक्षण को ध्यान में रखकर इस प्रतिमा को नारियल के छिलके, बुरादे और पन्द्रह सौ मिट्टी के दीए से तैयार किया है.

    बता दें कि पिछले चार महीने से मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में जुटे अभिजीत चटर्जी ने अपनी कला साधना को जीवित रखने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन से छुट्टी नहीं ली, बल्कि इस काम को वह ऑफिस से घर आने के बाद देर रात तक पूरा करते थे साथ ही छुट्टी के दिन रविवार को ज्यादा समय देते थे.

    उनकी बनाई गई प्रतिमा से ही बीसीसीएल की नारी शक्ति समिति द्वारा प्रत्येक साल पूजा की जाती है. हालांकि उन्होंने आज तक अपनी बनाई गई प्रतिमा के लिए शुल्क नहीं लिया है.

    बीसीसीएल के डायमंड क्लब में बसंत पंचमी के अवसर पर इनकी बनायी गयी मूर्ति से ही पूजा होगी. अभिजीत अब तक कोयला, साबुन, गमछा, धान की छिलके, पुआल सहित ज्यादातर इक्को फ्रेंडली अनोखी मूर्तियां बना चुके हैं.

    अभिजीत की पत्नी सरस्वती का कहना है कि इनकी बनाई गई कला कृति को जब कोई सराहना मिलती तो यही हम सबके लिए बड़ा पुरस्कार है.

     

    Tags: Saraswati Puja

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