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मिथिला, मैथिली भाषा और मैथिल लोगों को मिला 'अटल' सहयोग और सम्मान

Vipin Kumar Das | News18 Bihar
Updated: August 17, 2018, 3:23 PM IST

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद मिथिलांचल और मैथिली भाषा के लिए जो ऐतिहासिक कदम उठाया था वो मील का पत्थर बन गया है.

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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद मिथिलांचल और मैथिली भाषा के लिए जो ऐतिहासिक कदम उठाया था वो मील का पत्थर बन गया है. मैथिली देश की सवार्धिक समृद्ध, शालीन और मिठास पूर्ण भाषाओं में एक है और भारत के साथ नेपाल के इलाकों में भी बोला जाता है. इसे उचित सम्मान दे कर अपने और पड़ोसी देश नेपाल के मिथिलाभाषी आबादी का दिल वाजपेयी जी ने जीत लिया था.

मिथिलांचल की मीठी भाषा के उत्थान में वाजपेयी जी ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई. जब वह प्रधानमंत्री बने तो दरभंगा आकाशवाणी से मैथिली में समाचार प्रसारण 16 अगस्त 2003 से शुरू करवाया. मिथिलांचल इलाके से लगातार उठ रही आवाज को भी सुना और मैथिली भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल करवाया. उनके प्रयासों से 22 दिसम्बर 2003 को भारत सरकार की ओर से मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था.

इसके बाद मिथिलांचल के लोगों के दिल में वाजपेयी जी हमेशा के लिए बस गए हैं. वाजपेयी जी जब बिहार विधानसभा 2005 के चुनाव प्रचार के आखिरी सभा के लिए दरभंगा के ऐतिहासिक राज मैदान पहुंचे तो उनको सुनने के लिए पूरा दरभंगा उमड़ पड़ा था.

दरभंगा शहरी विधानसभा के भाजपा विधायक आज भी उस दिन को याद कर कहते हैं कि जब वाजपेयी जी चुनाव प्रचार के लिये दरभंगा आये थे. उन्होंने सरावगी से पूछा था कि तुम जीत पाओगे न, बड़े ही आत्मविश्वास से सरावगी ने जवाब दिया था कि निश्चित रूप से जीतूंगा.

संजय सरावगी ने कहा कि राजनीति के भीष्म पितामह का मिथिला से उनका विशेष लगाव रहा. ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर हो, मैथिली को अष्टम सूची में शामिल करने का योगदान हो, आकाशवाणी से मैथिली समाचार का प्रसारण हो या आज मिथिला के विकास का स्वरूप सबमें अटल बिहारी वाजपेयी जी की कोशिशें दिखती हैं.

सरावगी ने उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच नहीं रहे. ऐसे राजनेता इस पृथ्वी पर विरले ही जन्म लेते हैं. मिथिला के लोग उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे.

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First published: August 17, 2018, 12:35 PM IST
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