'तेजस' की नींव रखने वाले बिहार के वैज्ञानिक डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा का निधन, मिसाइल मैन के लिए थे खास

'तेजस' की नींव रखने वाले बिहार के वैज्ञानिक डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा का निधन (फाइल फोटो)

'तेजस' की नींव रखने वाले बिहार के वैज्ञानिक डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा का निधन (फाइल फोटो)

Bihar scientist Manas Bihari Verma Death : पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा ने 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया. वह मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ( Dr. APJ Abdul Kalam) के लिए खास अहमियत रखने वाले साथियों में से एक थे.

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दरभंगा. दरभंगा जिला के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव से निकल कर देश ही नहीं दुनिया में अपना नाम रोशन करने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर पद्मस्री मानस बिहारी वर्मा का देहांत हो गया. कुछ दिनों से वो अस्वस्थ चल रहे थे, बीती रात यानी सोमवार को आए हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया. अपनी मौत के वक्त वह दरभंगा के लहेरियासराय स्थित अपने निवास पर थे. डॉ वर्मा डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अभिन्न मित्र रहे. 1986 में तेजस फाइटर जेट विमान बनाने के लिए टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान दिया था.

मानस बिहारी वर्मा का जन्म दरभंगा जिला के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव में ही हुआ था. उनके पिता का नाम किशोर लाल दस था. तीन भाई और चार बहनों का परिवार है. उनकी स्कूली शिक्षा मधेपुर के जवाहर हाई स्कुल से पूरी हुई थी जिसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना और कलकत्ता विश्वविद्यालय से अध्यन किया था. मानस बिहारी वर्मा ने 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया. उन्होंने बैंगलोर, नई दिल्ली और कोरापुट में स्थापित विभिन्न वैमानिकी विभागों में भी काम किया. मानस बिहारी को लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने का मौका भी मिला.

कलाम साहब के खास मित्र

डॉ मानस बिहारी वर्मा डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अभिन्न मित्र रहे. 1986 में तेजस फाइटर जेट (Tejas Fighter Jet Plane) विमान बनाने के लिए टीम बनी थी उस समय लगभग 700 इंजीनियर इस टीम में शामिल किए गए थे. डॉक्टर वर्मा ने इस टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान दिया था.
वैज्ञानिक से बने समाजसेवी

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुलाई, 2005 में सेवानिवृत्त होने के बाद बेंगलुरु में पांच सितारा जीवन को त्यागकर वो अपने गांव पहुंच गए. अवकाश के बाद दरभंगा जिले का शायद ही कोई गांव है, जहां उनकी टीम नहीं पहुंची है. जिन स्कूलों में विज्ञान शिक्षक का अभाव रहता है, वहां टीम मेंबर बच्चों को प्रयोग कराते हैं. मोबाइल वैन के जरिये एक स्कूल में दो से तीन माह कैंप कर बच्चों को विज्ञान और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी दी जाती है.

मिला था पद्म श्री सम्मान



मानस वर्मा को कई सम्मानों से भी सम्मानित किया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. मानस बिहारी वर्मा को साइंटिस्ट ऑफ द ईयर(Scientist Of The Year) पुरस्कार से सम्मानित किया था. 2018 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था.
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