मानवता की मिसाल, 52 की उम्र में 53 बार किया रक्तदान

53 बार रक्तदान कर चुके दरभंगा के उमेश प्रसाद को लोग चलता-फिरता ब्लड बैंक भी कहने लगे हैं.

Vipin Kumar Das | News18 Bihar
Updated: June 14, 2018, 9:34 PM IST
मानवता की मिसाल, 52 की उम्र में 53 बार किया रक्तदान
चलता-फिरता ब्लड बैंक हैं उमेश प्रसाद (न्यूज18 फोटो)
Vipin Kumar Das | News18 Bihar
Updated: June 14, 2018, 9:34 PM IST
52 साल की उम्र में एक शख्स ने 53 बार रक्तदान किया है. ये रक्तदाता हैं दरभंगा के उमेश प्रसाद. इनके रगों में दौड़ने वाले रक्त अब तक ना जाने कितनी जिंदगी में जान दी है. अति दुर्लभ माने जाने वाले ओ निगेटिव खून देकर इन्होंने एक नहीं, दो नहीं बल्कि 53 जिंदगियों को संभाला है.

मानवता की जिंदा मिसाल बन चुके उमेश प्रसाद दरभंगा के रहमगंज मुहल्ले में छोटे से घर में रहते हैं. परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है. अपने घर की आर्थिक स्थिति को चलाने के लिए उमेश एलआईसी के एजेंट का काम करते हैं.

1990 में पहली बार उमेश ने खून दिया जब मधुबनी के सांसद शिवचंद्र झा की बेटी को खून की आवश्यकता हुई. ये पहला मौका जरूर था लेकिन इसके बाद जैसे उमेश को रक्तदान करने का जुनून सवार हो गया. एक समय ऐसा भी आया कि उमेश के मां-बाप को जब पता चला कि रक्तदान करता है तो गुस्से में घर से निकाल दिया.

किसी तरह दो-तीन दिन घर से बेघर हो अपने दोस्त के यहां रह कर गुजरा किया फिर पिता को प्यार से रक्तदान के फायदे को समझाया. 1990 के दशक में परिवार के साथ उमेश को समाज का भी ताना सहना पड़ा, जब उन्हें लोग खून का चोर कहने लगे थे लेकिन आज वही समाज उन्हें सम्मानित करता है.

अब तो 52 साल की उम्र में 53 बार खुद का रक्तदान कर शोशल मीडिया व्हाट्सऐप और फेसबुक पर अपनी युवा टीम बना कर 400 से ज्यादा जिंदगियां बचाई है. सोशल मीडिया के तहत अगल-बगल के जिले के ही नहीं बिहार से बाहर भी यदि खून की आवश्यकता पड़ती है तो उमेश मदद को आगे आते हैं. इनके व्हाट्सऐप ग्रुप में देश के कई राज्य से युवा जुड़े हुए है. दरभंगा में तो अब उमेश को लोग चलता-फिरता ब्लड बैंक भी कहने लगे हैं.
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