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रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा में व्यस्त हैं 'तेजस' बनाने वाले डॉ वर्मा, मिलेगा पद्मश्री सम्मान

रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा में व्यस्त हैं 'तेजस' बनाने वाले डॉ वर्मा, मिलेगा पद्मश्री सम्मान

'तेजस' विमान की नींव रखने वाले वैज्ञानिकों में एक डॉ मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है. रिटायरमेंट के बाद साल 2005 से वह अपने गांव बाउर में रह कर बच्चों और शिक्षकों के बीच विज्ञान का प्रसार कर रहे हैं.

देश के पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान 'तेजस' को बनाने वाले दरभंगा निवासी डाॅ मानस बिहारी वर्मा को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ज्यों ही पद्मश्री देने की घोषणा हुई त्यों ही मिथिला वासियों में खुशी की लहर दौड़ गई.

दरभंगा जिले के सुदूरवर्ती और बाढ़ग्रस्त इलाके में शुमार घनश्यामपुर प्रखंड के छोटे से गांव बाउर में पिता आनंद किशोर लाल दास और माता यशोदा देवी के घर 29 जुलाई 1943 को डाॅ वर्मा का जन्म हुआ. चार बहन और तीन भाईयों वाले परिवार में वर्मा की बचपन की प्रवृत्तियों को देखकर माता-पिता इन्हें ऋषि  कहने लगे. प्रख्यात मैथिली साहित्यकार ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म के परिवार से संबंधित होने के कारण पठन-पाठन का उचित माहौल मिला और इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई पर हाईस्कूल की पढ़ाई इन्होंने जिला स्कूल चाईबासा, जिला स्कूल गया और जिला स्कूल मधेपुर से प्राप्त की. इसके बाद पटना साइंस कॉलेज, बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज और सागर विश्वविद्यालय से उच्च और तकनीकी शिक्षा प्राप्त की.

दर्जनों पुरस्कार से नवाजे जा चुके डाॅ वर्मा को डीआरडीओ के 'साइंटिस्ट आॅफ द इयर' और 'टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवॉर्ड' से क्रमशः पूर्व  पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी सम्मानित कर चुके हैं.

पद्मश्री मिलने से आश्चर्यचकित डाॅ वर्मा कहते हैं कि मुझे तनिक भी इस बात का आभास नहीं हुआ कि इस साल मुझे यह सम्मान दिया जा रहा है. यह सम्मान टीम वर्क से मिला है और इसके लिए मैं अपने तमाम सहयोगियों का आभारी हूं.

उन्होंने अपने हाईस्कूल के शिक्षक रहे वनखंडी झा, लक्ष्मीनारायण झा, शमसूल साहेब और अपने अग्रज क्रांति बिहारी वर्मा को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि मैं हर किसी से प्रेरणा ग्रहण करता हूें. मेरी सीखने की प्रक्रिया अभी तक कायम है. मेरा जीवन पूर्व राष्ट्रपति और सहयोगी रहे एपीजे अब्दुल कलाम,  डाॅ कोटा हरिनारायण, डाॅ टीजी पाई, डाॅ के वी राय, डाॅ पीएन एपी राय, मिस्टर कटी और श्री वात्स से प्रेरित रहा है.

रिटायरमेंट के बाद साल 2005 से वह अपने गांव बाउर में रह रहे हैं और अलग-अलग एनजीओ के जरिए बच्चों और शिक्षकों के बीच विज्ञान का प्रसार कर रहे हैं.

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