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बांग्लादेश की जेल ने बना दिया बीमार, घर लौटकर भी बंधा रहता है जंजीरों में, जानें यह दुखद कहानी

Emotional Story: दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड क्षेत्र के मनोरथा निवासी सतीश चौधरी को 11 वर्षों तक बांग्लादेश की जेल मे ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट : अभिनव कुमार

दरभंगा. अपने देश के नागरिकों के लिए जेल बंदी सुधार गृह कहलाता है. वहीं, जब कोई व्यक्ति अगर दूसरे देश की जेल में किसी कारण से बंद रहता है, तो फिर बंदी सुधार गृह उसके लिए यातना गृह बन जाता है. यही नहीं, वर्षों जेल में रहने के बाद जब कोई व्यक्ति भाग्य से अपने परिजनों से मिलता है, तो बची रहती है सिर्फ और सिर्फ अपनों के साथ रहने की खुशी. जबकि होश-ठिकाना तो जेल में मिलने वाली यातना से वैसे ही कोसों दूर छूट जाता है, जैसे छूट गया होता है उसका अपना गांव-अपना घर. 11 वर्षों तक अपनों से दूर रहने के बाद अपने घर लौटे हायाघाट प्रखंड क्षेत्र के मनोरथा गांव निवासी सतीश की भी कहानी ऐसी ही है.

11 वर्षों तक बांग्लादेश की जेल में रहने वाला सतीश मानसिक रूप से अस्वस्थ है. जेल में भी वह जंजीरों से बंधा रहता था और आज घर वाले भी उसे जंजीरों में ही बांधकर रखने को मजबूर हैं. जबकि घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी सतीश की बूढ़ी मां के कंधों पर है.

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घर वाले भी सतीश को जंजीरों में ही बांधकर रखने को मजबूर हैं.

कहीं भाग न जाए इसलिए...

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