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दरभंगा मॉड्यूल मरा है, लेकिन जिंदा हैं उसके स्लीपर सेल्स; ब्लास्ट की जांच में मिले कई सुराग

दरभंगा मॉड्यूल मरा है, लेकिन जिंदा हैं उसके स्लीपर सेल्स; ब्लास्ट की जांच में मिले कई सुराग

दरभंगा मॉड्यूल मरा है, लेकिन जिंदा हैं उसके स्लीपर सेल्स, ब्लास्ट की जांच में मिले कई सुराग.

दरभंगा मॉड्यूल मरा है, लेकिन जिंदा हैं उसके स्लीपर सेल्स, ब्लास्ट की जांच में मिले कई सुराग.

Darbhanga Blast: 4 जून 2010 को इंडियन मुजाहिदीन को भारत सरकार द्वारा आतंकी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी यह आतंकी संगठन लगातार देश के अलग अलग हिस्सों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता रहा. इस संगठन का सबसे मजबूत मॉड्यूल में से एक था दरभंगा मॉड्यूल.

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पटना. इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen) यानि IM इसका गठन 2010 में अब्दुल सुभान कुरैशी (Abdul Shubhan Qureshi) द्वारा किया गया था. 4 जून 2010 को इंडियन मुजाहिदीन को भारत सरकार द्वारा आतंकी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी यह आतंकी संगठन लगातार देश के अलग अलग हिस्सों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता रहा. इस संगठन का सबसे मजबूत मॉड्यूल में से एक था दरभंगा मॉड्यूल. इसका गठन 2010 में ही यासीन भटकल और तहसीन अख्तर ने एक साथ मिलकर दरभंगा के शिवधारा मुहल्ले में रहते हुए किया था. इस मॉडयूल के खिलाफ NIA में रहने के दौरान काम करने वाले बिहार के तेजतर्रार IPS अधिकारी विकास वैभव बताते हैं कि यासीन भटकल अपनी पहचान बदलकर दरभंगा के शिवधारा में एक किराये के मकान में रहता था. वो लोगों को लागतार आतंक का पाठ पढ़ाया करता था. जब उसे लगता था कि वो इस काम या इसके मॉड्यूल के संगठन के लिये तैयार है तो उसे अपने साथ जोड़ लेता था और जरूरत के हिसाब से उसका इस्तेमाल किया करता था.

यासिन भटकल की 2013 में नेपाल से हुई गिरफ्तारी के बाद इस आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का चीफ तहसीन अख्तर उर्फ मोनू बन गया. तहसीन अख्तर पूर्व से ही IM का साउथ इंडिया मॉड्यूल का मुखिया भी था. हालांकि यह अधिक दिनों तक अपने इस आतंकी संगठन को नही संभाल पाया. दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से साल 2014 में इसे गिरफ्तार किया लिया था.

गौरतलब है कि तहसीन अख्तर साल 2005 से 2013 तक इंडियन मुजाहिदीन के आईटी सेल का मुख्य सदस्य भी रहा था. तहसीन अख्तर उर्फ मोनू मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है. जानकर बताते है कि इंडियन मुजाहिद्दीन एक अपरिपक्व संगठन था. 2007 से हरकत में आए इंडियन मुजाहिद्दीन के ज्यादातर सदस्य भारत के ही थे. आशंका है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के आतंकवादी संगठनों से इंडियन मुजाहिद्दीन को मदद मिलती थी. 2007 में उत्तर भारत में हुए कई धमाकों से इंडियन मुजाहिद्दीन IM का नाम उभरा था. दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और बैंगलोर में हुए बम धमाकों के लिए IM को ही जिम्मेदार ठहराया गया था. IM ने भी खुद इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी.

NIA के पूर्व जांच अधिकारी और फिलहाल बिहार सरकार में बतौर विशेष सचिव के पद पर तैनात IPS अधिकारी विकास वैभव के मुताबिक इंडियन मुजाहिद्दीन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, हैकर, सिविल इंजीनियर, मनोविज्ञानी और कुछ धार्मिक नेता जुड़े हुए थे. जांच के दौरान जो बातें सामने आई थी उसकी सभी बातों की जानकारी अनुसंधान रिपोर्ट में दर्ज कर NIA की दिल्ली स्थित विशेष अदालत के समक्ष चार्जशीट फाइल की गई थी, जिसका ट्रायल कोर्ट में चल रहा है. इंडियन मुजाहिद्दीन ने अब तक सबसे बड़ा हमला 2008 में अहमदाबाद और जयपुर में किया था.

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Tags: Abdul Shubhan Qureshi, Darbhanga Blast, Indian mujahideen, Intelligence agency, इंडियन मुजाहिदीन, दरभंगा

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