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LNMU Corruption: कुलपति ने बिना टेंडर निकाले करवाए 2.56 करोड़ के कार्य, नियुक्ति पर भी उठे सवाल

LNMU Corruption: कुलपति ने बिना टेंडर निकाले करवाए 2.56 करोड़ के कार्य, नियुक्ति पर भी उठे सवाल

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल उजागर हुआ है.

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल उजागर हुआ है.

LNMU Corruption Case: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति एसपी सिंह की नियुक्ति पर भी सवाल उठे हैं. बताया जा रहा है कि एसपी सिंह पर लखनऊ विश्वविधालय के वीसी रहते अनियमितता के आरोप में  FIR हुई थी.  लखनऊ हसनगंज थाना में इसको लेकर मामला भी दर्ज हुआ था. RTI एक्टिविस्ट रोहित कुमार ने राजभवन को पत्र भी लिखा है. रोहित कुमार ने न्यूज़ 18 को FIR की कॉपी उपलब्ध करवाई है. FIR में एसकपी सिंह पर धारा 420, 471 और 468 का मामला दर्ज था.  जिस पर FIR दर्ज हो उसे कुलपति बनाने पर सवाल उठाया जा रहा है. कुलपति की योग्यता में अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्ति की बात भी शामिल है.

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दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. टेंडर में भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा कोई और नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के भाजपा नगर विधायक संजय सरावगी के लिखे एक पत्र से हुआ है. बीजेपी विधायक द्वारा बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अपर सचिव को जून महीने में एक पत्र लिखा गया था जो यूनिवर्सिटी में करप्शन के खेल को उजागर करता है. पूरा मामला ललित नारायण मिथिला विवि के कुलपति द्वारा चहारदीवारी, केंद्रीय लाइब्रेरी भवन, गांधी सदन के सामने तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य से जुड़ा है. आरोप है कि इसके लिए 2 करोड़ 56 लाख रुपये के लिये टेंडर निकले जाने में करप्शन का खेल हुआ है. बताया जा रहा है कि निविदा निकलने के पहले से ही संवेदक के द्वारा काम भी शुरू करवा दिया गया था.

भाजपा नगर विधायक संजय सरावगी में अपने लिखित पत्र में ये कहा है कि 2 करोड़ 56 लाख के निविदा में घोर अनियमितता हुई है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का ये नियम है कि 15 लाख से अधिक के कार्य का टेंडर कम समय में नही निकाला जाय, बल्कि इसके लिये ई-टेंडर किये जाने का प्रावधान है. लेकिन, विवि प्रशासन ने सरकार के इस  नियम को तोड़ते हुये अपने करीबी संवेदक (ठेकेदार) को लाभ पहुंचाने को लेकर टेंडर प्रकाशित नहीं किया.

संजय सरावगी में कहा कि विवि प्रशासन की ओर से 15 जून को टेंडर की अंतिम तारीख रखी गयी है, लेकिन इस बीच टेंडर वाले जगहों पर एक महीने पहले ही संवेदक के द्वारा काम शुरू कर दिया गया था. वहीं, विधायक ने विवि पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि बिहार सरकार का निर्णय था कि राज्य अलग-अलग विवि में 50 लाख से ऊपर के कार्य बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत सरंचना विकास निगम द्वारा करवाए जाएंगे. लेकिन, विवि ने बिहार सरकार के नियम को नहीं मानते हुए इसका उल्लंघन किया.

नगर विधायक ने कहा कि  सारी बातों की जानकारी कुलपति सुरेन्द प्रताप सिंह को दी थी, लेकिन कुलपति ने अनदेखी करते हुये ये सभी कार्य पूरे करवाए. जिसको लेकर जांच के लिए लिखा है. जून से लेकर नवंबर आ गया लेकिन, इतनी बड़ी लूट- खसोट के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं, पूरे मामले में छात्र संगठनों के नेताओं ने भी पूरे मामले को लेकर विवि प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि विवि और राजभवन लूट का अड्डा बन गया है. जब सत्ता दल की शिकायत नहीं सुनी जा रही हो तो आम लोगों की शिकायत कौन सुनेगा?

Tags: Bihar News, Darbhanga news, PATNA NEWS

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