बिहार: पिता को मुखाग्नि देने के बाद मतदान करने पहुंचा शख्स, वोट डालने के बाद निभाई रस्म

स्वर्गीय रामचंद्र सिंह के पुत्र राधेश्याम सिंह जब पिता को मुखाग्नि देने के बाद मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो उनकी वेशभूषा देख लोग हैरत में पड़ गए.

News18 Bihar
Updated: April 29, 2019, 4:28 PM IST
बिहार: पिता को मुखाग्नि देने के बाद मतदान करने पहुंचा शख्स, वोट डालने के बाद निभाई रस्म
बिहार के दरभंगा में पिता को मुखाग्नि देने के बाद मतदान करने पहुंचा शख्स
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Updated: April 29, 2019, 4:28 PM IST
विश्व का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र भारत क्यों है इसका एक नायाब उदाहरण बिहार के दरभंगा में देखने को मिला. यहां एक शख्स के पिता की मौत हो गई और लोकसभा चुनाव के लिए मतदान के दिन (29 अप्रैल) ही उनका दाह संस्कार किया गया. पिता को मुखाग्नि देने के बाद उस बेटे ने भारत मां का बेटा होने का भी फर्ज बखूबी निभाया. पिता के चिता की आग बुझने से पहले उसने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और देश का एक जागरूक नागरिक होने का कर्तव्य निभाया.

बिहार के दरभंगा जिले के पंचोभ पंचायत के रहने वाले स्वर्गीय रामचंद्र सिंह के पुत्र राधेश्याम सिंह जब पिता को मुखाग्नि देने के बाद महनौली उत्क्रमित मध्य विद्यालय मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो उनकी वेशभूषा देख लोग हैरत में पड़ गए. उन्होंने उतरी (दाह संस्कार के बाद पहना जाने वाला वस्त्र) पहने हुए ही मतदान किया.



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राधेश्याम सिंह ने कहा कि उनके पिता रामचंद्र सिंह का देहांत हो गया था. मुखाग्नि देने के बाद उन्हें लगा कि 5 साल में एक बार ही देश की सरकार चुनने का मौका आता है. इसलिए मैंने मतदान करना काफी जरूरी समझा. पिता के चिता को आग देकर गले में उतरी लिए ही मतदान करने पहुंच गए.

राधेश्याम सिंह ने बताया कि पहले 'मतदान फिर कोई काम', इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने यह फैसला किया. उनके इस फैसले की सराहना वहां लगे चुनाव कर्मियों ने भी की और बसे पहले लाइन से बाहर निकाल कर मतदान करवाया.

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बिहार के दरभंगा के सुदूर देहात के छोटे से इलाके में रहने वाले राधेश्याम सिंह ने ऐसा काम किया है जो देश के हर नागरिक को करना चाहिे. अपनी मनपसंद सरकार चुनने के लिए चाहे कितनी भी मुसीबत का पहाड़ क्यों न टूटे अपने मत का प्रयोग अवश्य करें. जाहिर है राधेश्याम के इस काम ने समाज में भी एक नई सोच जागृत की है.
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रिपोर्ट-  विपिन कुमार दास

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