बिहार के इस शहर के आश्रम से जुड़ी हैं बापू और लौहपुरुष की यादें, जीर्णोद्धार की है जरूरत

1929 में सरदार बल्लभ भाई पटेल यहां पहुंचे थे. इसके बाद यहां स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े राजेन्द्र प्रसाद, जेबी कृपलानी, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, विमला फारुखी, जयप्रभा देवी के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता यहां जुटे और स्तंत्रता सेनानी के सारथी बने.

News18 Bihar
Updated: August 14, 2019, 6:26 PM IST
बिहार के इस शहर के आश्रम से जुड़ी हैं बापू और लौहपुरुष की यादें, जीर्णोद्धार की है जरूरत
जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा दरभंगा का मगन आश्रम
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Updated: August 14, 2019, 6:26 PM IST
हम अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ कैसा सलूक करते हैं यह दरभंगा के मगन आश्रम को देखकर सहज ही समझा जा सकता है. कभी स्वयं महात्मा गांधी इस आश्रम से जुड़ कर आजादी की लड़ाई को दिशा दिया करते थे. भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने यहां आकर हिंदुस्तान सेवा दल के साथ मिल आजादी के लिए योजना बनाया करते थे. कभी सरदार बल्लभ भाई पटेल ने भी इस आश्रम मे पहुंच कर सेवा दल के सेनानियों का मनोबल बढ़ाया था. इस आश्रम से पर्दा प्रथा, छुआछूत , नशा मुक्ति के खिलाफ अभियान चलाया गया तो यहां से विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का शंखनाद भी हुआ था. लेकिन, सरकार के उपेक्षित रवैये की वजह से ऐतिहासिक धरोहर मगन आश्रम अपना अस्तित्वहीन हो चुका है.

रघुनाथपुर के नामचीन जमींदार राजेंद्र प्रसाद मिश्र के पुत्र स्वतंत्रता सेनानी रामनन्दन मिश्र की अगुआई में उक्त आश्रम स्थापना की. पर्दा प्रथा के खिलाफ बिगुल बजाते हुए अपनी पत्नी राजकिशोरी के साथ घर से बाहर निकल पड़े. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसक स्वराज्य आंदोलन में कूद पड़े. इस दौरान गांधीजी अपने भतीजे मगनलाल गांधी को यहां भेजा. लेकिन, यहां आने के क्रम में 22 अपैल 1928 को पटना में ही उनका निधन हो गया. उन्हीं की याद में स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामनन्दन मिश्र सहित अन्य लोगों ने मिलकर वर्ष 1929 में मझौलिया गांव में मगन आश्रम की स्थापना की.

Darbhanga
दरभंगा के मगन आश्रम से महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभ भाई पटेल की यादें जुड़ी हैं.


1929 में सरदार बल्लभ भाई पटेल यहां पहुंचे थे. इसके बाद यहां स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े राजेन्द्र प्रसाद, जेबी कृपलानी, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, विमला फारुखी, जयप्रभा देवी के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता यहां जुटे और स्तंत्रता सेनानी के सारथी बने. आश्रम के संस्थापक रामनन्दन मिश्र के साथ मझौलिया के दर्जनों लोग जुड़ गए और आश्रम में रहने लगे फिर इसी आश्रम से खादी का उद्योग शुरू हुआ बड़े-बड़े चरखे लगे.

Darbhanga
दरभंगा का मगन आश्रम कभी उद्योग धंधों से गुलजार था, लेकिन अब अस्तित्वहीन हो गया है.


आश्रम में ही तेल निकालने को लेकर देसी तरीके से उद्योग लगाया गया.  इस कारण आश्रम का क्षेत्र में फैलाव हुआ और जाले, बहेड़ा, बिरौल, सदर, वारिसनगर, समस्तीपुर सहित 22 शाखाएं जिले भर में काम करने लगीं. 100 से ज्यादा युवक इस आश्रम से जुड़ गए जिन्हें 1 मार्च 1930 में हिंदुस्तानी सेवा दल बना कर इन्हें शिक्षित भी किया गया. साथ ही महिलाओं को जोड़ कर पर्दा प्रथा के खिलाफ एक अलग दल बनाया गया. आजादी के बाद कई वर्षों तक वर्तमान मुखिया तारणी देवी के स्वतंत्रता सेनानी पति स्व बाबूलाल चौधरी आजीवन बतौर मैनेजर इस जगह का देख- रेख करते थे. मगर उनके देहांत के बाद इस स्थल पर कोई शाम का दीपक भी जलाने वाला नहीं है.

आज भी स्थानीय लोगों के बीच इस आश्रम को लेकर काफी यादें जुड़ी हैं. कभी गुलजार रहने वाला मगन आश्रम में अब सब कुछ खत्म हो गया है. न चरखा है, न मशीन. कुछ अवशेष बचा भी है तो वो कमरे में बंद है और उसे कोई देखने वाला नहीं.  दो-तीन कमरों को किराए पर लगा कर मरम्मत करने का रुपया ऊपर कर किसी तरह इस धरोहर को बचाये रखा गया है, लेकिन बिना सरकारी मदद के इसका जीर्णोद्धार संभव नहीं.
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रिपोर्ट- विपिन कुमार दास

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First published: August 14, 2019, 6:19 PM IST
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