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Durga Puja: बिहार के इस 'श्मशान' में गूंजते हैं मंगलगीत और बजती है शहनाई, जानिए रहस्य

Darbhanga News: इस मंदिर की विशेषता है कि यहां साल के चारों नवरात्र पर विशेष पूजा होती है. जबकि सामान्य दिनों में भी यह ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट: अभिनव कुमार

दरभंगा: आमतौर पर श्मशान घाट में शवों का दाह-संस्कार किया जाता है. पर आप जानकर चौंक जाएंगे कि बिहार के दरभंगा में एक ऐसा भी श्मशान घाट है, जहां विवाह जैसे बेहद शुभ कार्य भी किए जाते हैं. जी हां! हम बात कर रहे हैं कभी दरभंगा के महाराज रहे रामेश्वर सिंह की चिता भूमि का. दरभंगा महाराज की इसी चिता भूमि पर भगवती श्यामा माई की प्रतिमा स्थापित है और भव्य मंदिर भी. यहां मंदिर स्थापना के बाद लगभग 90 वर्षों से शादी-ब्याह, उपनयन, मुंडन, नए वाहनों की पूजा जैसे तमाम शुभ और मांगलिक कार्य कराए जाते हैं. यह भक्तों की आस्था ही है कि यहां हर मांगलिक कार्यों के लग्न के दिनों में अपार भीड़ उमड़ती है. मां श्यामा का दरबार इतना अलौकिक और भव्य है कि यहां भक्तजन देश-विदेश तक से खींचे चले आते हैं. यहां पर भक्तों की हर मुराद पूरी होती है. नवरात्रि के दिनों में यहां माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

आम धारणा है कि श्मशान घाट में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. नव दंपति तो शव-दाह तक के लिए एक साल तक श्मशान घाट नहीं जाते हैं. लेकिन यह श्यामा माय की महिमा ही है कि यहां विवाह भी होते हैं.

दरभंगा के श्मसान स्थल पर बने मंदिरों का रहस्य.

दरभंगा के श्मसान स्थल पर बने मंदिरों का रहस्य.

पंडित शरद कुमार झा बताते हैं कि मां श्यामा के दरबार में सभी भक्तजनों की मनोकामना पूर्ण होती है. यही कारण है कि यहां देश-विदेश से भक्तजन अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. दरअसल, यह मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता के ऊपर बना हुआ है.

नवरात्र को होती है विशेष पूजा
इस मंदिर विशेषता है कि यहां साल के चारों नवरात्र पर विशेष पूजा होती है. जबकि सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों की भीड़ जुटी रहती है. कोरोना काल में भी यहां माता की पूजा निरंतर होती रही है. मंदिर में पूजा करने बिरौल से आए कर्पूर यादव बताते हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने श्यामा माई से एक मन्नत मांगी थी. वह मन्नत पूरी हो गई,तो माता के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने आए थे. महिला श्रद्धालु पूनम कुमारी बताती हैं कि माता का बहुत ही खास प्रभाव है. यहां सच्चे दिल से मांगने पर हर मुराद पूरी होती है.

भक्त करते हैं तंत्र साधना
जिस महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता भूमि पर श्यामा माय का दरबार है, वह महाराजा रामेश्वर सिंह भी शक्ति के साधक थे. राजा की चिता भूमि होने के कारण इस मंदिर का नामकरण रामेश्वरी श्यामा माई किया गया. दरभंगा के राजा कामेश्वर सिंह ने 1933 में इस मंदिर की स्थापान की थी. इस मंदिर के गर्भ गृह में मां काली की विशाल प्रतिमा है.

इस प्रतिमा के दाहिनी ओर महाकाल, बाईं ओर गणेश जी और बटुक देव की प्रतिमा है. दाहिना हाथ हमेशा आने वाले शरणार्थियों को आशीर्वाद देता है. यहां पर मां काली की पूजा वैदिक और तांत्रिक, दोनों विधियों से की जाती है. मंदिर में होने वाली आरती का विशेष महत्व है.

Tags: Bihar News, Darbhanga news, Durga Puja festival, Hindu Temples, Navratri festival, Wedding Ceremony

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